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Trade Deal: भाकियू चढूनी ने किया ट्रेड डील का विरोध

Trade Deal: भाकियू चढूनी ने किया ट्रेड डील का विरोध

नोएडा में भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) गौतमबुद्धनगर इकाई ने केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित नए व्यापार समझौतों यानी ट्रेड डील के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। बुधवार को जिला मुख्यालय पर बड़ी संख्या में किसान और संगठन के पदाधिकारी एकत्र हुए और सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल उठाते हुए ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन का नेतृत्व संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष के आह्वान पर किया गया, जिसमें किसानों के हितों की अनदेखी का आरोप लगाया गया।

प्रदर्शन के दौरान पदाधिकारियों ने कहा कि भारतीय किसान पहले से ही कई समस्याओं से जूझ रहा है, जिनमें खेती की बढ़ती लागत, फसलों का उचित मूल्य न मिलना, प्राकृतिक आपदाएं और कर्ज का बोझ शामिल हैं। ऐसे समय में यदि विदेशी कृषि उत्पादों को भारतीय बाजार में अधिक छूट या खुली पहुंच दी जाती है, तो इसका सीधा असर देश के किसानों की आय पर पड़ेगा और वे और अधिक संकट में आ जाएंगे।

संगठन का कहना है कि भारत में कृषि केवल एक व्यापार नहीं बल्कि करोड़ों लोगों की आजीविका का मुख्य साधन है, जबकि कई विकसित देशों में कृषि बड़े पैमाने पर औद्योगिक और कॉर्पोरेट मॉडल पर आधारित है। ऐसे में सस्ते आयातित कृषि उत्पाद भारतीय बाजार में प्रतिस्पर्धा को असंतुलित कर देंगे, जिससे स्थानीय किसानों की उपज की कीमतें गिर सकती हैं और उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर हो सकती है।

भाकियू चढूनी ने यह भी चेतावनी दी कि यदि मुक्त व्यापार समझौते लागू होते हैं तो बहुराष्ट्रीय कंपनियों का प्रभाव कृषि क्षेत्र में तेजी से बढ़ेगा। इससे खेती पर निजीकरण और कॉर्पोरेट नियंत्रण का खतरा बढ़ सकता है, जिससे छोटे और मध्यम किसानों की स्वतंत्रता प्रभावित होगी। संगठन ने आशंका जताई कि इससे देश की खाद्य सुरक्षा पर भी दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था कमजोर हो सकती है।

प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि लगातार बढ़ते दबाव और आर्थिक अस्थिरता के कारण किसानों के आत्महत्या जैसे गंभीर मामलों में वृद्धि की आशंका है और कई किसान मजदूर बनने को मजबूर हो सकते हैं। इस स्थिति को रोकने के लिए सरकार को तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए और किसानों के हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए।

संगठन ने स्पष्ट मांग रखी कि कृषि, डेयरी, पोल्ट्री और किसानों से जुड़े अन्य सहायक क्षेत्रों को किसी भी प्रकार के मुक्त व्यापार समझौते से बाहर रखा जाए। साथ ही न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी सुनिश्चित करने की भी मांग की गई ताकि किसानों को उनकी फसलों का उचित और स्थिर मूल्य मिल सके।

इस दौरान कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे जिनमें युवा जिलाध्यक्ष अनुज नागर, इरफान प्रधान, छोटे नंबरदार, वहाब चौधरी, गोपाल शर्मा, मोनू कसाना, अशोक नागर और अब्दुल रऊफ प्रधान सहित अन्य लोग शामिल रहे। सभी ने एक स्वर में सरकार से किसानों के हितों की रक्षा करने और किसी भी ऐसे समझौते को लागू न करने की मांग की जिससे खेती और किसान प्रभावित हों।

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