Student Mental Health: अभिभावकों के समर्थन से ही संभलेंगे बच्चे, रिजल्ट के बाद बढ़ रहा तनाव

Student Mental Health: अभिभावकों के समर्थन से ही संभलेंगे बच्चे, रिजल्ट के बाद बढ़ रहा तनाव

परीक्षा परिणाम आने के बाद छात्रों में मानसिक तनाव, अवसाद और आत्मग्लानि के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है। अपेक्षित अंक न मिलने पर कई छात्र खुद को असफल मान बैठते हैं, जिससे उनकी मानसिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ता है। हाल ही में गुरुग्राम में परिणाम के बाद एक छात्र द्वारा आत्महत्या की घटना ने इस चिंता को और गहरा कर दिया है, जबकि गौतमबुद्धनगर में भी ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस नाजुक समय में अभिभावकों की भूमिका सबसे अहम होती है। यदि माता-पिता बच्चों को समझने और समर्थन देने के बजाय दबाव डालते हैं, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय के मनोविज्ञानी प्रो. डॉ. एपी सिंह के अनुसार, जब छात्रों को उनकी अपेक्षा के अनुरूप अंक नहीं मिलते, तो वे खुद को असफल मानने लगते हैं और परिवार की प्रतिक्रिया से डरते हैं।

समाज और परिवार अक्सर परीक्षा परिणाम को प्रतिष्ठा से जोड़ देते हैं, जिससे बच्चों पर अतिरिक्त दबाव बनता है। ऐसे में अभिभावकों को चाहिए कि वे सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार अपनाएं। डांट-फटकार या तुलना करने से बच्चे मानसिक रूप से टूट सकते हैं और अवसाद में जा सकते हैं, जो उन्हें गलत कदम उठाने की ओर धकेल सकता है।

विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि माता-पिता बच्चों की रुचि और क्षमता को समझें और उसी के अनुसार उनका मार्गदर्शन करें। जिस विषय में बच्चा अच्छा कर रहा है, उसकी सराहना करना जरूरी है, ताकि उसका आत्मविश्वास बढ़े। वहीं जिन विषयों में कमजोरी है, उसमें निराशा जताने के बजाय प्रोत्साहन देना चाहिए और यह विश्वास दिलाना चाहिए कि मेहनत से सुधार संभव है।

बच्चों के साथ सकारात्मक संवाद, भावनात्मक समर्थन और धैर्यपूर्ण व्यवहार बेहद जरूरी है। अभिभावकों को यह समझना होगा कि हर बच्चा अलग होता है और उसकी अपनी क्षमता होती है। सही मार्गदर्शन और सहयोग से ही बच्चे न केवल परीक्षा में बल्कि जीवन की हर चुनौती का सामना आत्मविश्वास के साथ कर सकते हैं।

Realme GT 6 भारत में लॉन्च होने की पुष्टि। अपेक्षित स्पेक्स, फीचर्स, और भी बहुत कुछ

Hot this week

Topics

spot_img

Related Articles

Popular Categories

spot_imgspot_img