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AIIMS Delhi : एम्स में POSH कानून पर उठे सवाल, छह महीने से लंबित अपील पहुंची दिल्ली हाईकोर्ट

aiims and Delhi high court

AIIMS Delhi : एम्स में POSH कानून पर उठे सवाल, छह महीने से लंबित अपील पहुंची दिल्ली हाईकोर्ट

देश के प्रतिष्ठित सरकारी अस्पतालों में शामिल All India Institute of Medical Sciences यानी एम्स दिल्ली एक बार फिर विवादों में घिर गया है। इस बार मामला कार्यस्थल पर महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा से जुड़ा है। कथित आपत्तिजनक और यौन-संकेतक टिप्पणियों से जुड़े मामले में छह महीने से अधिक समय तक वैधानिक अपील लंबित रहने के बाद अब मामला Delhi High Court पहुंच गया है।

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम के लिए बने पॉश अधिनियम 2013 का एम्स प्रशासन में प्रभावी तरीके से पालन नहीं हो रहा है। उनका कहना है कि समयबद्ध न्याय की व्यवस्था प्रशासनिक निष्क्रियता के कारण केवल कागजी कानून बनकर रह गई है।

याचिका के अनुसार 29 सितंबर 2025 को सीटीवीएस-आईसीयू-ए में आयोजित एक आधिकारिक बैठक के दौरान तत्कालीन विभागाध्यक्ष डॉ. ए.के. बिसोई द्वारा नर्सिंग स्टाफ को लेकर कथित तौर पर अपमानजनक और यौन-संकेतक टिप्पणियां की गई थीं। शिकायत में दावा किया गया कि इन टिप्पणियों से महिला कर्मचारियों की पेशेवर गरिमा को ठेस पहुंची। साथ ही नर्सिंग स्टाफ को लेकर कथित रूप से “गधों की तरह काम करने” जैसी टिप्पणी भी की गई थी।

मामले की जांच एम्स की आंतरिक शिकायत समिति द्वारा की गई। समिति ने अपनी रिपोर्ट में इन टिप्पणियों को “अनुचित” और “महिला कर्मचारियों की पेशेवर गरिमा को कम करने वाला” माना, लेकिन इसके बावजूद किसी प्रकार की कार्रवाई की सिफारिश नहीं की गई।

इस फैसले के खिलाफ 19 नवंबर 2025 को एम्स निदेशक के समक्ष वैधानिक अपील दायर की गई थी, लेकिन आरोप है कि अब तक इस पर कोई सुनवाई नहीं हुई। लंबे समय तक कार्रवाई न होने के बाद पीड़ित पक्ष ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल एक संस्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी संस्थानों में पॉश कानून के वास्तविक क्रियान्वयन और संस्थागत जवाबदेही की बड़ी परीक्षा बन सकता है। महिला कर्मचारियों की सुरक्षा और सम्मान को लेकर अब इस मामले पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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संवाददाता

Priyanka Singh

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