Delhi Sanjay Lake: दिल्ली में पानी की कमी से तड़प-तड़प कर मरीं सैकड़ों मछलियां, विभागीय लापरवाही पर उठे सवाल

Delhi Sanjay Lake: दिल्ली में पानी की कमी से तड़प-तड़प कर मरीं सैकड़ों मछलियां, विभागीय लापरवाही पर उठे सवाल
रिपोर्ट: रवि डालमिया
पूर्वी दिल्ली के मयूर विहार स्थित संजय झील में पानी की भारी कमी के चलते सैकड़ों मछलियों की मौत हो गई है। झील के किनारों पर बड़ी संख्या में पड़ी मरी हुई मछलियों ने इलाके में बदहाली और लापरवाही की तस्वीर सामने ला दी है। स्थानीय लोगों और कर्मचारियों का आरोप है कि झील का जलस्तर लगातार घट रहा था और इसकी जानकारी संबंधित विभागों को पहले ही दी जा चुकी थी, लेकिन समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
अब हालात इतने खराब हो चुके हैं कि केवल मछलियां ही नहीं, बल्कि झील के आसपास मौजूद पेड़-पौधे और पक्षियों का अस्तित्व भी खतरे में पड़ गया है। झील का सूखता स्वरूप देखकर स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है और लोग जिम्मेदार विभागों पर सवाल उठा रहे हैं।
करीब 182 एकड़ में फैली संजय झील को वर्ष 1982 में विकसित किया गया था। इसमें लगभग 12 एकड़ का जल क्षेत्र और करीब 170 एकड़ का वन क्षेत्र शामिल है। यह जगह लंबे समय से यमुनापार के प्रमुख पिकनिक स्पॉट के रूप में जानी जाती रही है। यहां नौका विहार, जॉगिंग ट्रैक, झूला पुल और हरियाली के बीच सुकून भरा वातावरण लोगों को आकर्षित करता था, लेकिन अब झील सूखे और अव्यवस्था की मार झेल रही है।
झील की देखरेख से जुड़े कर्मचारियों के अनुसार करीब चार साल पहले डी-सिल्टिंग के नाम पर की गई खुदाई के बाद से पानी का संकट लगातार बढ़ता गया। पहले झील की तलहटी में चिकनी मिट्टी होने के कारण पानी लंबे समय तक ठहर जाता था, लेकिन खुदाई के बाद सतह बलुई हो गई, जिससे पानी तेजी से जमीन में समाने लगा और झील सूखने लगी।
कर्मचारियों का कहना है कि पहले नालों के जरिए झील में पर्याप्त पानी पहुंचता था, लेकिन बाद में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के जरिए पानी सप्लाई की व्यवस्था लागू की गई। इसके बाद हालात और खराब हो गए। पूरे परिसर की हरियाली झील के पानी पर निर्भर करती है, लेकिन अब पानी की कमी के कारण छोटे पौधे लगातार सूख रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक परिसर में इस समय केवल एक बोरवेल ही काम कर रहा है, जबकि पूरे क्षेत्र की जरूरत पूरी करने के लिए 20 से 25 बोरवेल की आवश्यकता बताई जा रही है। कई पुराने बोरवेल लंबे समय से खराब पड़े हैं और उनकी मरम्मत तक नहीं कराई गई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले चार महीनों से झील का जलस्तर लगातार गिर रहा था, लेकिन दिल्ली विकास प्राधिकरण और दिल्ली जल बोर्ड ने इस समस्या को गंभीरता से नहीं लिया। अब मछलियों की मौत के बाद विभागीय कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगों का कहना है कि अगर जल्द स्थायी समाधान नहीं निकाला गया तो आने वाले समय में संजय झील पूरी तरह सूख सकती है और यहां का पर्यावरणीय संतुलन बुरी तरह प्रभावित हो सकता है।
