Himachal Pradesh: नीति आयोग की बैठक में मुख्यमंत्री सुक्खू ने उठाए हिमाचल के वित्तीय हितों के मुद्दे, केंद्र से विशेष सहायता और उच्चस्तरीय समिति गठन की मांग

Himachal Pradesh: नीति आयोग की बैठक में मुख्यमंत्री सुक्खू ने उठाए हिमाचल के वित्तीय हितों के मुद्दे, केंद्र से विशेष सहायता और उच्चस्तरीय समिति गठन की मांग

 

नई दिल्ली/शिमला, 11 जून। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल की बैठक में भाग लेते हुए हिमाचल प्रदेश के वित्तीय और विकास संबंधी मुद्दों को मजबूती से रखा। ‘विकसित भारत के लिए समावेशी मानव विकास’ विषय पर आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में देश के विभिन्न राज्यों के विकास, आर्थिक चुनौतियों और भविष्य की रणनीतियों पर व्यापक चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री सुक्खू ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि हिमाचल प्रदेश की आर्थिक स्थिति का समग्र मूल्यांकन करने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया जाए। उन्होंने कहा कि राजस्व घाटा अनुदान की समाप्ति, प्राकृतिक आपदाओं से हुए भारी नुकसान, जलविद्युत परियोजनाओं में मुफ्त बिजली के हिस्से में कमी तथा जीएसटी लागू होने के बाद राज्य को हुए राजस्व नुकसान ने प्रदेश की वित्तीय स्थिति को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि समिति की रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार हिमाचल प्रदेश को उसका उचित और न्यायसंगत हिस्सा प्रदान करे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व घाटा अनुदान समाप्त होने के बाद हिमाचल प्रदेश को गंभीर आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने पहाड़ी राज्यों के लिए जारी किए गए 25 हजार करोड़ रुपये के विशेष पैकेज को अपर्याप्त बताते हुए इसे बढ़ाकर 50 हजार करोड़ रुपये करने की मांग की, ताकि विकास परियोजनाओं और जनकल्याणकारी योजनाओं को प्रभावी ढंग से जारी रखा जा सके।

उन्होंने हिमाचल प्रदेश को देश का ‘ग्रीन फ्रंटियर’ बताते हुए कहा कि राज्य पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। भारतीय वन प्रबंधन संस्थान के अध्ययन का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश देश को प्रतिवर्ष लगभग 90 हजार करोड़ रुपये मूल्य की पारिस्थितिकीय सेवाएं प्रदान करता है, लेकिन इसके बदले राज्य को पर्याप्त आर्थिक सहायता नहीं मिलती।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में लगभग 13 हजार मेगावाट बिजली उत्पादन होने के बावजूद राज्य को मुफ्त बिजली का उचित हिस्सा नहीं मिल रहा है। इसके अलावा भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड से हिमाचल प्रदेश को लगभग 7 हजार करोड़ रुपये की बकाया राशि अभी तक प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि प्राकृतिक आपदाओं से सर्वाधिक प्रभावित होने के बावजूद केंद्र द्वारा घोषित 1,500 करोड़ रुपये की विशेष सहायता राशि राज्य को अब तक नहीं मिली है। साथ ही जीएसटी व्यवस्था के कारण पिछले आठ वर्षों में प्रदेश को लगभग 25 हजार करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान का सामना करना पड़ा है।

मुख्यमंत्री ने मानव विकास के क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में प्रदेश को पूर्ण साक्षर राज्य घोषित किया गया। वहीं वर्ष 2026 के स्कूल शिक्षा प्रदर्शन ग्रेडिंग सूचकांक में हिमाचल प्रदेश ने छठा स्थान हासिल किया है, जबकि वर्ष 2022 में यह राज्य 21वें स्थान पर था। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा में राज्य का सकल नामांकन अनुपात 43 प्रतिशत है, जो राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण में भी हिमाचल प्रदेश का प्रदर्शन सराहनीय रहा है।

सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार सौर ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन, पंप स्टोरेज और बैटरी स्टोरेज जैसी परियोजनाओं के माध्यम से हिमाचल प्रदेश को हरित ऊर्जा के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने चंद्रभागा-रावी-ब्यास लिंक परियोजना के क्रियान्वयन के दौरान प्रदेश के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने की भी मांग की।

उन्होंने राज्य सरकार की ‘मुख्यमंत्री अपना परिवार सुखी परिवार’ योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इस योजना के माध्यम से लगभग डेढ़ लाख गरीब परिवारों की पहचान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बेहतर हवाई संपर्क की आवश्यकता पर बल देते हुए गग्गल हवाई अड्डे के विस्तार और विकास का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश को ‘वन स्टेट, वन इंटरनेशनल डेस्टिनेशन’ के रूप में विकसित करने के लिए यह कदम अत्यंत आवश्यक है।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने बच्चों के पोषण कार्यक्रमों के प्रभावी संचालन के लिए स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास तथा शिक्षा विभागों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के बीच डेटा साझा करने की व्यवस्था को मजबूत बनाने तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित आधुनिक निगरानी प्रणाली विकसित करने की भी आवश्यकता बताई।

मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार द्वारा नशे के खिलाफ चलाए जा रहे व्यापक अभियान की जानकारी देते हुए केंद्र सरकार से खुफिया तंत्र को मजबूत बनाने और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में सहयोग का अनुरोध किया। बैठक में विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, उपराज्यपाल, केंद्रीय मंत्री, नीति आयोग के वरिष्ठ अधिकारी तथा हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव के.के. पंत भी उपस्थित रहे।

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