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Sahara Scheme: हिमाचल में 4,050 लाभार्थी नई ऑनलाइन प्रणाली पर स्थानांतरित, गंभीर बीमारियों से पीड़ित पात्र लोगों को हर महीने मिलेंगे 3,000 रुपये

Sahara Scheme: हिमाचल में 4,050 लाभार्थी नई ऑनलाइन प्रणाली पर स्थानांतरित, गंभीर बीमारियों से पीड़ित पात्र लोगों को हर महीने मिलेंगे 3,000 रुपये

शिमला। हिमाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री सहारा योजना को अधिक पारदर्शी, सुगम और प्रभावी बनाने के लिए 4,050 सक्रिय एवं पात्र लाभार्थियों को नई ऑनलाइन प्रणाली पर स्थानांतरित कर दिया गया है। इनमें से 3,958 लाभार्थियों का आधार आधारित ई-केवाईसी भी पूरा हो चुका है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने मंगलवार को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री सहारा योजना सहित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के कार्यान्वयन की समीक्षा की।

बैठक में मुख्यमंत्री को बताया गया कि सहारा योजना के प्रभावी और पारदर्शी क्रियान्वयन के लिए विभाग ने एक समर्पित ऑनलाइन सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन विकसित की है। नई व्यवस्था के तहत योजना के सक्रिय और पात्र लाभार्थियों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जा रहा है।

विभाग के अनुसार अब तक 4,050 सक्रिय एवं पात्र लाभार्थियों को सफलतापूर्वक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर स्थानांतरित किया जा चुका है। इनमें से 3,958 लाभार्थियों की आधार आधारित ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी हो गई है।

नई ऑनलाइन व्यवस्था के माध्यम से जुलाई 2026 के लिए अब तक 3,723 लाभार्थियों को वित्तीय सहायता जारी की जा चुकी है। सरकार का प्रयास योजना से जुड़ी पूरी प्रक्रिया को डिजिटल माध्यम से अधिक सरल और पारदर्शी बनाना है।

ई-कल्याण पोर्टल के माध्यम से मुख्यमंत्री सहारा योजना के तहत नए आवेदन भी लगातार प्राप्त हो रहे हैं। अब तक कुल 4,143 नए आवेदन पोर्टल पर प्राप्त हुए हैं। इन आवेदनों को योजना के निर्धारित प्रावधानों के अनुसार प्रक्रिया में लाकर पात्रता के आधार पर स्वीकृत किया जा रहा है।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की ओर से विकसित ऑनलाइन पोर्टल को आम जनता के लिए लाइव कर दिया गया है। पात्र एवं जरूरतमंद लोग अब मुख्यमंत्री सहारा योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए ई-कल्याण पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि सहारा योजना का उद्देश्य गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के उन लोगों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है, जो योजना के तहत चिन्हित गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं।

योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को प्रति माह 3,000 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। इसका उद्देश्य लंबे समय तक चलने वाले चिकित्सा उपचार के दौरान जरूरतमंद परिवारों पर पड़ने वाले आर्थिक दबाव को कम करना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्ति के साथ उसके परिचारक को भी कई तरह की आर्थिक और व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसी को ध्यान में रखते हुए योजना के तहत परिचारकों को भी सहायता प्रदान करने का प्रावधान है।

उन्होंने कहा कि लंबे समय तक उपचार चलने के कारण कई परिवारों की नियमित आय और आर्थिक स्थिति प्रभावित होती है। ऐसे परिवारों को सहारा योजना के माध्यम से आर्थिक मदद देकर कठिन समय में सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।

बैठक में योजना के लिए उपलब्ध बजट और अब तक हुए खर्च की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने बताया कि चालू वित्त वर्ष के लिए मुख्यमंत्री सहारा योजना के तहत 20.01 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है।

इस बजट में से अब तक 4.46 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि उपलब्ध बजट का उपयोग पात्र लाभार्थियों तक समय पर आर्थिक सहायता पहुंचाने के लिए किया जाए।

मुख्यमंत्री ने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि योजना का लाभ प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक पारदर्शी, समयबद्ध और सुगम तरीके से पहुंचे। आवेदन से लेकर सत्यापन और सहायता राशि जारी करने तक की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने विशेष रूप से उन जरूरतमंद परिवारों पर ध्यान देने के निर्देश दिए, जिन्हें लंबे समय तक चलने वाले चिकित्सा उपचार के कारण आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे परिवारों की पहचान कर उन्हें योजना से जोड़ने पर जोर दिया गया।

नई ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से सरकार लाभार्थियों के रिकॉर्ड, ई-केवाईसी, नए आवेदन और आर्थिक सहायता जारी करने की प्रक्रिया को एकीकृत तरीके से संचालित करने की दिशा में काम कर रही है। इससे योजना की निगरानी बेहतर होने के साथ पात्र लोगों तक सहायता पहुंचाने की प्रक्रिया भी आसान होने की उम्मीद है।

बैठक में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल, प्रधान सचिव देवेश कुमार, सचिव सी.पी. वर्मा, ईएसओएमएसए के निदेशक सुमित किमटा, महिला एवं बाल विकास विभाग के निदेशक डॉ. पंकज ललित सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री ने विभाग की अन्य कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की भी समीक्षा की और अधिकारियों को निर्देश दिया कि सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं में तकनीक का प्रभावी इस्तेमाल करते हुए पात्र लोगों को समय पर लाभ उपलब्ध कराया जाए।

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संवाददाता

Priyanka Singh

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