Himachal Welfare Schemes: हिमाचल में दो लाख अतिनिर्धन परिवारों को 300 यूनिट मुफ्त बिजली, महिलाओं को हर महीने मिलेंगे 1500 रुपये- मुख्यमंत्री सुक्खू

Himachal Welfare Schemes: हिमाचल में दो लाख अतिनिर्धन परिवारों को 300 यूनिट मुफ्त बिजली, महिलाओं को हर महीने मिलेंगे 1500 रुपये- मुख्यमंत्री सुक्खू

शिमला, 2 सितम्बर। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार समाज के प्रत्येक वर्ग के कल्याण के लिए प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। पिछले साढ़े तीन वर्षों में विभिन्न वर्गों के लिए अनेक कल्याणकारी योजनाएं तैयार कर उन्हें धरातल पर उतारा गया है और सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि इनका लाभ पात्र व्यक्तियों तक पहुंचे। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार 2 अक्तूबर से ‘मुख्यमंत्री का अपना परिवार सुखी परिवार योजना’ शुरू करने जा रही है, जिसके तहत करीब दो लाख अतिनिर्धन परिवारों को 300 यूनिट मुफ्त बिजली और महिलाओं को प्रतिमाह 1500 रुपये प्रदान किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने बुधवार को हिमाचल प्रदेश राजपूत कल्याण बोर्ड की बैठक की अध्यक्षता करते हुए राज्य सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास ऐसी योजनाओं का लाभ समाज के उन लोगों तक पहुंचाना है, जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि ‘मुख्यमंत्री का अपना परिवार सुखी परिवार योजना’ के तहत प्रदेश के लगभग दो लाख अतिनिर्धन परिवारों को लाभान्वित करने का लक्ष्य रखा गया है। योजना के तहत पात्र परिवारों को 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली उपलब्ध कराई जाएगी।

इसके साथ ही योजना के दायरे में आने वाली महिलाओं को प्रतिमाह 1500 रुपये प्रदान किए जाएंगे। मुख्यमंत्री के मुताबिक लाभार्थियों में करीब 90 हजार ऐसे परिवार भी शामिल हैं, जिन्हें अभी तक किसी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिला था।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार कृषि क्षेत्र में भी किसानों की आय बढ़ाने और प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए काम कर रही है। प्रदेश में प्राकृतिक खेती से तैयार उत्पादों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य उपलब्ध कराया जा रहा है।

मुख्यमंत्री के मुताबिक सरकार गेहूं के लिए 80 रुपये प्रति किलो और मक्की के लिए 50 रुपये प्रति किलो का समर्थन मूल्य प्रदान कर रही है। प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को इसका लाभ दिया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि कच्ची हल्दी के लिए 150 रुपये प्रति किलो का समर्थन मूल्य दिया जा रहा है। इसके अलावा पहली बार अदरक के लिए भी 30 रुपये प्रति किलो का समर्थन मूल्य निर्धारित किया गया है।

सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार दुग्ध उत्पादकों की आय बढ़ाने के लिए दूध की खरीद पर भी विशेष ध्यान दे रही है। उन्होंने दावा किया कि हिमाचल प्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य है, जहां दूध पर सबसे अधिक समर्थन मूल्य दिया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में गाय का दूध 61 रुपये प्रति लीटर और भैंस का दूध 71 रुपये प्रति लीटर की दर से खरीदा जा रहा है। सरकार का उद्देश्य किसानों और पशुपालकों को उनके उत्पादों का बेहतर मूल्य देकर उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करना है।

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों के लिए शुरू की गई डॉ. वाई.एस. परमार विद्यार्थी ऋण योजना का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि मेधावी विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने में आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े, इसके लिए योजना के तहत रियायती ब्याज दर पर शिक्षा ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है।

योजना के तहत पात्र विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए एक प्रतिशत ब्याज दर पर 20 लाख रुपये तक का ऋण दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिक से अधिक विद्यार्थी इस योजना का लाभ उठा सकें, इसके लिए पारिवारिक आय की सीमा में भी बड़ा बदलाव किया गया है।

सरकार ने योजना के तहत पारिवारिक आय की सीमा चार लाख रुपये से बढ़ाकर 12 लाख रुपये कर दी है। इससे अब अधिक परिवारों के विद्यार्थी उच्च शिक्षा के लिए रियायती शिक्षा ऋण का लाभ ले सकेंगे।

मुख्यमंत्री ने विधवा महिलाओं और दिव्यांग माता-पिता के बच्चों की शिक्षा के लिए संचालित इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आर्थिक परिस्थितियों के कारण ऐसे परिवारों के बच्चे शिक्षा से वंचित न रहें, इसे ध्यान में रखकर यह योजना शुरू की गई है।

योजना के तहत विधवा महिलाओं और दिव्यांग माता-पिता के 18 वर्ष तक की आयु के पात्र बच्चों को प्रतिमाह एक हजार रुपये की सहायता दी जा रही है।

इसके अतिरिक्त 18 से 27 वर्ष आयु वर्ग के पात्र बच्चों की उच्च शिक्षा का खर्च भी राज्य सरकार उठा रही है। प्रदेश के साथ बाहरी राज्यों के सरकारी शैक्षणिक संस्थानों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले पात्र विद्यार्थियों को इसका लाभ दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने पर्यटन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए होम स्टे योजना के तहत दिए जा रहे ब्याज अनुदान की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस योजना के माध्यम से स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां बढ़ाने और लोगों के लिए आय के अवसर पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि होम स्टे योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में चार प्रतिशत, शहरी क्षेत्रों में तीन प्रतिशत और जनजातीय क्षेत्रों में पांच प्रतिशत ब्याज अनुदान दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तरह की योजनाओं से पर्यटन गतिविधियों का विस्तार होने के साथ स्थानीय लोगों की आर्थिकी को मजबूत करने में भी मदद मिल रही है। सरकार विभिन्न क्षेत्रों में योजनाएं लागू कर पात्र लोगों तक उनका लाभ पहुंचाने के लिए काम कर रही है।

हिमाचल प्रदेश राजपूत कल्याण बोर्ड की बैठक में उप-मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया, मुख्य सचिव के.के. पंत, बोर्ड के सरकारी एवं गैर-सरकारी सदस्य, प्रशासनिक सचिव और विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष उपस्थित रहे।

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