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Xylitol Study: शुगर-फ्री की मिठास, दिल पर पड़ रही भारी? जाइलिटोल के बढ़े स्तर को हार्ट अटैक और स्ट्रोक के जोखिम से जोड़ा गया

Xylitol Study: शुगर-फ्री की मिठास, दिल पर पड़ रही भारी? जाइलिटोल के बढ़े स्तर को हार्ट अटैक और स्ट्रोक के जोखिम से जोड़ा गया

नई दिल्ली, 30 अगस्त। चीनी कम करने की कोशिश में रोजमर्रा के कई शुगर-फ्री उत्पादों का इस्तेमाल करने वाले लोगों के लिए एक नया अध्ययन अहम संकेत लेकर आया है। जैम, शुगर-फ्री चुइंगम, कुछ योगर्ट, लो-कैलोरी खाद्य पदार्थों और टूथपेस्ट में इस्तेमाल होने वाला जाइलिटोल खून में अधिक स्तर पर पाए जाने पर हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक और अन्य गंभीर हृदय संबंधी घटनाओं के बढ़े जोखिम से जुड़ा पाया गया है। हालांकि वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि यह अध्ययन जाइलिटोल को इन बीमारियों की प्रत्यक्ष वजह साबित नहीं करता, बल्कि दोनों के बीच एक संबंध दर्शाता है।

यूरोपियन सोसाइटी ऑफ कार्डियोलॉजी के नए अध्ययन में 17,710 लोगों के स्वास्थ्य आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन लोगों के रक्त में जाइलिटोल का स्तर अधिक था, उनमें गंभीर हृदय संबंधी घटनाओं का जोखिम अपेक्षाकृत ज्यादा दिखाई दिया।

अध्ययन में प्रतिभागियों का लगभग छह वर्षों तक अनुसरण किया गया। इस दौरान जिन लोगों के खून में जाइलिटोल का स्तर सबसे अधिक था, उनमें हार्ट अटैक, स्ट्रोक या हृदय संबंधी मृत्यु जैसी गंभीर घटनाओं का खतरा सबसे कम स्तर वाले लोगों की तुलना में 57 प्रतिशत अधिक पाया गया।

शोधकर्ताओं ने लंबे समय के आंकड़ों का भी विश्लेषण किया। करीब 30 वर्षों के डेटा में भी जाइलिटोल का उच्च स्तर रखने वाले लोगों में गंभीर हृदय संबंधी घटनाओं का जोखिम 18 प्रतिशत अधिक दर्ज किया गया। अध्ययन में यह भी देखा गया कि जाइलिटोल का स्तर बढ़ने के साथ जोखिम बढ़ने का रुझान दिखाई देता है।

शोधकर्ताओं के अनुसार जाइलिटोल प्लेटलेट्स को अधिक सक्रिय कर सकता है। प्लेटलेट्स की यह सक्रियता रक्त के थक्के बनने की संभावना बढ़ा सकती है, जिससे हृदय या मस्तिष्क की धमनियों में रुकावट पैदा होने का खतरा बढ़ सकता है। वर्ष 2024 के एक अध्ययन में भी जाइलिटोल को प्लेटलेट सक्रियता और थक्का बनने की क्षमता से जोड़ा गया था।

भारत जैसे देश में यह अध्ययन इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यहां डायबिटीज, मोटापा और हृदय रोग तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य चुनौतियां हैं। वजन नियंत्रित रखने या चीनी का सेवन कम करने के लिए बड़ी संख्या में लोग शुगर-फ्री चुइंगम, डाइट प्रोडक्ट और लो-कैलोरी पैकेज्ड खाद्य पदार्थों का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि भारतीय आबादी में जाइलिटोल और हृदय रोग के बीच संबंध को समझने के लिए अलग अध्ययन की आवश्यकता होगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों को इस अध्ययन से घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि जागरूक रहने की आवश्यकता है। किसी भी पैकेज्ड उत्पाद का इस्तेमाल करते समय उसका लेबल पढ़ें और जाइलिटोल के साथ एरिथ्रिटोल जैसे अन्य शुगर अल्कोहल की जानकारी भी देखें। ताजे फल, संतुलित भोजन और कम प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता देना बेहतर विकल्प माना जाता है।

शोधकर्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल एक अध्ययन के आधार पर डॉक्टर की सलाह के बिना किसी जरूरी खाद्य या स्वास्थ्य उत्पाद को बंद नहीं करना चाहिए। भविष्य में बड़े और विविध आबादी वाले अध्ययनों से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि जाइलिटोल का हृदय स्वास्थ्य पर वास्तविक प्रभाव कितना महत्वपूर्ण है।

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संवाददाता

Priyanka Singh

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