RK-251 Cancer Therapy: कैंसर लक्षित थेरेपी में भारत का नया कदम, IIT गुवाहाटी के वैज्ञानिकों ने विकसित की ‘स्मार्ट’ दवा; इंसानों में परीक्षण अभी बाकी
नई दिल्ली, 31 अगस्त। कैंसर के इलाज में वैज्ञानिकों का जोर अब केवल कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने पर नहीं, बल्कि उनकी खास कमजोरियों की पहचान कर उन्हीं को निशाना बनाने वाली लक्षित थेरेपी विकसित करने पर बढ़ रहा है। इसी दिशा में भारतीय वैज्ञानिकों की विकसित प्रायोगिक दवा RK-251 ने उम्मीद जगाई है। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह कैंसर कोशिकाओं के भीतर सामान्य से अधिक मौजूद रिएक्टिव ऑक्सीजन स्पीशीज (ROS) का फायदा उठाकर कैंसर-रोधी यौगिक को सक्रिय कर सके।
हालांकि RK-251 अभी मरीजों के उपचार के लिए उपलब्ध दवा नहीं है। यह फिलहाल शोध और प्रायोगिक अध्ययन के स्तर पर है तथा इंसानों में इसकी सुरक्षा और प्रभावशीलता का परीक्षण होना बाकी है। इसलिए शुरुआती नतीजों को कैंसर के स्थापित उपचार के विकल्प के रूप में नहीं देखा जा सकता।
आईआईटी गुवाहाटी से जुड़े वैज्ञानिकों द्वारा विकसित RK-251 को आसान भाषा में एक ‘स्मार्ट प्रोड्रग’ के रूप में समझा जा सकता है। प्रोड्रग ऐसा यौगिक होता है जिसे शरीर या लक्ष्य कोशिका के भीतर मौजूद खास परिस्थितियों के आधार पर सक्रिय दवा में बदलने के उद्देश्य से डिजाइन किया जाता है।
RK-251 की खासियत कैंसर कोशिकाओं के भीतर पाए जाने वाले ROS के बढ़े हुए स्तर को पहचानने की इसकी रणनीति है। कैंसर कोशिकाओं में सामान्य कोशिकाओं की तुलना में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और ROS का स्तर अधिक हो सकता है। वैज्ञानिकों ने इसी जैविक अंतर को उपचार के संभावित लक्ष्य के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश की है।
RK-251 को कैंसर कोशिका में अधिक ROS मिलने पर NBDHEX नामक एंटी-कैंसर कंपाउंड छोड़ने के लिए डिजाइन किया गया है। इसके बाद यह कैंसर कोशिका के भीतर मौजूद GSTP1 नामक प्रोटीन को प्रभावित करता है।
GSTP1 कैंसर कोशिकाओं को तनाव से निपटने और अपनी सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने में भूमिका निभा सकता है। इस प्रोटीन की गतिविधि को बाधित करने का उद्देश्य कैंसर कोशिका की जीवित रहने की क्षमता को कमजोर करना है।
इस रणनीति का प्रमुख उद्देश्य स्वस्थ कोशिकाओं पर अनावश्यक प्रभाव को कम करते हुए कैंसर कोशिकाओं के भीतर मौजूद विशिष्ट जैविक परिस्थितियों का फायदा उठाना है। इसी वजह से इस प्रकार की दवाओं को लक्षित या ‘स्मार्ट’ कैंसर थेरेपी विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
शुरुआती प्रायोगिक अध्ययनों में ट्रिपल-नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर मॉडल में RK-251 के प्रभाव के संकेत मिले हैं। ट्रिपल-नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर को उपचार के लिहाज से चुनौतीपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसमें कुछ ऐसे रिसेप्टर मौजूद नहीं होते जिन्हें कई मौजूदा लक्षित दवाएं निशाना बनाती हैं।
ऐसे में वैज्ञानिक नए जैविक लक्ष्य और ऐसी दवाएं तलाश रहे हैं जो कैंसर कोशिकाओं की दूसरी कमजोरियों का इस्तेमाल कर सकें। RK-251 से जुड़ा शोध इसी व्यापक प्रयास का हिस्सा है।
इसके बावजूद इस शोध को लेकर सावधानी जरूरी है। किसी दवा का प्रयोगशाला या शुरुआती मॉडल में प्रभावी दिखाई देना यह साबित नहीं करता कि वह इंसानों में भी उतनी ही सुरक्षित और प्रभावी होगी। इसके लिए नियंत्रित क्लीनिकल ट्रायल के विभिन्न चरणों से गुजरना आवश्यक होता है।
RK-251 का इंसानों में परीक्षण अभी बाकी है। मानव परीक्षणों के माध्यम से ही यह निर्धारित किया जा सकेगा कि दवा की सुरक्षित खुराक क्या होगी, इसके संभावित दुष्प्रभाव क्या हो सकते हैं और कैंसर मरीजों में यह वास्तव में कितना प्रभावी परिणाम देती है।
कैंसर के खिलाफ वैज्ञानिक प्रयास केवल नई दवाओं के विकास तक सीमित नहीं हैं। बीमारी की रोकथाम और समय पर जांच को भी कैंसर से होने वाली मौतों को कम करने की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन और इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर से जुड़े वैश्विक विश्लेषण के अनुसार वर्ष 2022 में दुनिया में सामने आए नए कैंसर मामलों में करीब 37.8 प्रतिशत मामले ऐसे 30 जोखिम कारकों से जुड़े थे, जिन्हें नियंत्रित या कम किया जा सकता है।
इन जोखिम कारकों में तंबाकू का सेवन, शराब, अस्वास्थ्यकर जीवनशैली और कुछ प्रकार के संक्रमण प्रमुख रूप से शामिल हैं। ऐसे में कैंसर की रोकथाम के लिए जीवनशैली में सुधार और नियंत्रित किए जा सकने वाले जोखिम कारकों को कम करना महत्वपूर्ण माना जाता है।
समय पर स्क्रीनिंग भी कैंसर के खिलाफ लड़ाई में अहम भूमिका निभा सकती है। घर पर की जाने वाली कोलोरेक्टल कैंसर स्क्रीनिंग से जुड़े एक अध्ययन में जांच का निमंत्रण मिलने वाले लोगों में कैंसर से मृत्यु का जोखिम 26 प्रतिशत कम पाया गया। वहीं जांच पूरी करने वाले लोगों में यह कमी 43 प्रतिशत तक दर्ज की गई।
ये आंकड़े इस ओर संकेत करते हैं कि कैंसर के खिलाफ भविष्य की रणनीति केवल नई और अधिक शक्तिशाली दवाओं के विकास पर निर्भर नहीं रहेगी। रोकथाम, शुरुआती चरण में बीमारी की पहचान और मरीज के कैंसर की जैविक विशेषताओं के आधार पर सटीक उपचार का संयोजन अधिक महत्वपूर्ण होता जाएगा।
RK-251 जैसे प्रायोगिक एजेंट इसी दिशा में हो रहे बदलाव का उदाहरण हैं, जहां वैज्ञानिक कैंसर कोशिकाओं की विशिष्ट कमजोरियों की पहचान कर उन्हें निशाना बनाने का प्रयास कर रहे हैं। यदि आगे के प्रीक्लीनिकल और मानव परीक्षणों में इसकी सुरक्षा और प्रभावशीलता स्थापित होती है, तभी इसके वास्तविक चिकित्सकीय उपयोग की संभावनाओं को स्पष्ट रूप से आंका जा सकेगा।
फिलहाल RK-251 एक आशाजनक शोध उपलब्धि है, न कि मरीजों के लिए स्वीकृत कैंसर उपचार। इसके आगे के परीक्षण यह तय करेंगे कि प्रयोगशाला में दिखाई दे रही यह ‘स्मार्ट’ रणनीति भविष्य में कैंसर की लक्षित थेरेपी का हिस्सा बन सकती है या नहीं।


