Primary Healthcare Training: प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार की बड़ी पहल

Primary Healthcare Training: प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार की बड़ी पहल
नई दिल्ली। देशभर में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक मजबूत, प्रभावी और जन-केंद्रित बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री Jagat Prakash Nadda ने ‘इंटीग्रेटेड ट्रेनिंग फॉर प्राइमरी हेल्थ केयर टीम्स’ कार्यक्रम की शुरुआत की है। इस नई पहल का मकसद फ्रंटलाइन स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को आधुनिक, दक्ष और तकनीकी रूप से सक्षम बनाना है ताकि गांवों और दूरदराज के क्षेत्रों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा सकें।
यह कार्यक्रम हाल ही में आयोजित 10वें राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन ‘नवाचार और समावेशिता: भारत के स्वास्थ्य भविष्य को आकार देने वाली सर्वोत्तम प्रथाएं’ के दौरान लॉन्च किया गया। सरकार का मानना है कि देश में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने के लिए जमीनी स्तर पर काम करने वाले स्वास्थ्य कर्मियों को मजबूत करना बेहद जरूरी है। इसी सोच के तहत यह एकीकृत प्रशिक्षण मॉडल तैयार किया गया है।
नई व्यवस्था के तहत आशा वर्कर्स, एएनएम और कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर यानी सीएचओ सहित प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों को एक संरचित और दक्षता आधारित प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे वे न केवल मरीजों को बेहतर सेवाएं दे सकेंगे बल्कि स्वास्थ्य संबंधी नई चुनौतियों से भी अधिक प्रभावी तरीके से निपट पाएंगे। सरकार का कहना है कि इससे स्वास्थ्य कर्मियों का आत्मविश्वास बढ़ेगा और लोगों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, पहले अलग-अलग स्तर पर बिखरे हुए प्रशिक्षण मॉडल के कारण स्वास्थ्य कर्मियों को एक समान और व्यवस्थित प्रशिक्षण नहीं मिल पाता था। अब इस नई पहल के जरिए एकीकृत ढांचा तैयार किया गया है, जिससे प्रशिक्षण प्रक्रिया अधिक मजबूत और प्रभावी बनेगी। इसका सीधा लाभ ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को मिलेगा।
सरकार ने बताया कि आयुष्मान भारत योजना के तहत विकसित आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को निवारक, प्रोत्साहनात्मक और उपचारात्मक स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमुख केंद्र बनाया जा रहा है। ऐसे में यह प्रशिक्षण कार्यक्रम इन केंद्रों की कार्यक्षमता को और मजबूत करेगा। प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मी लोगों तक समय पर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने, जागरूकता बढ़ाने और बीमारियों की शुरुआती पहचान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
इस पहल का एक बड़ा उद्देश्य महिला सशक्तिकरण भी है। सरकार के मुताबिक प्राथमिक स्वास्थ्य कार्यबल में 70 प्रतिशत से अधिक महिलाएं कार्यरत हैं। ऐसे में यह कार्यक्रम महिलाओं को तकनीकी और व्यावसायिक रूप से अधिक मजबूत बनाएगा। इसे प्रधानमंत्री की ‘नारी शक्ति’ और ‘विकसित भारत @2047’ की सोच को आगे बढ़ाने वाली महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में डिजिटल प्लेटफॉर्म आइगोट कर्मयोगी का उपयोग किया जाएगा। इस प्लेटफॉर्म के जरिए स्वास्थ्य कर्मियों को लगातार सीखने, नई तकनीकों को समझने और बदलती स्वास्थ्य जरूरतों के अनुसार खुद को अपडेट रखने में मदद मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्रशिक्षण मॉडल से देश के दूरदराज क्षेत्रों में भी गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण पहुंचाना आसान होगा।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि यह पहल सिर्फ एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं बल्कि भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र को भविष्य के लिए तैयार करने की रणनीतिक योजना है। आने वाले वर्षों में इससे देश की प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है और आम लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिलेगा।





