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Pediatric Airway: बच्चों की सांस की नली का इलाज करने वाले डॉक्टरों को मिली विशेषज्ञ ट्रेनिंग, सफदरजंग अस्पताल में 5वीं पीडियाट्रिक एयरवे वर्कशॉप

Pediatric Airway: बच्चों की सांस की नली का इलाज करने वाले डॉक्टरों को मिली विशेषज्ञ ट्रेनिंग, सफदरजंग अस्पताल में 5वीं पीडियाट्रिक एयरवे वर्कशॉप

नई दिल्ली, 17 अगस्त। बच्चों की सांस की नली में अचानक रुकावट, जन्मजात समस्या या किसी बीमारी के कारण पैदा होने वाली जटिल एयरवे स्थिति में डॉक्टरों को बेहद कम समय में सही फैसला लेना पड़ता है। ऐसे मामलों में केवल किताबी जानकारी पर्याप्त नहीं होती, बल्कि डॉक्टरों के पास आधुनिक तकनीक, विशेष उपकरणों के इस्तेमाल और आपात स्थिति में तुरंत निर्णय लेने की व्यावहारिक दक्षता भी होना जरूरी है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए सफदरजंग अस्पताल में बच्चों के जटिल एयरवे मामलों के प्रबंधन को लेकर डॉक्टरों को विशेष फील्ड ट्रेनिंग दी गई।

अस्पताल के एनेस्थीसियोलॉजी विभाग की ओर से एएमएफ और आईएपीआई दिल्ली के सहयोग से 5वीं एक्सक्लूसिव पीडियाट्रिक एयरवे सीड वर्कशॉप एंड सीएमई का आयोजन किया गया। इसमें देश के विभिन्न हिस्सों से अनुभवी फैकल्टी और डॉक्टरों ने भाग लिया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य नवजात शिशुओं और बच्चों में सांस की नली से जुड़ी आपातकालीन तथा जटिल परिस्थितियों के प्रबंधन के लिए डॉक्टरों की व्यावहारिक क्षमता को मजबूत करना रहा।

कार्यशाला के दौरान चुनौतीपूर्ण पीडियाट्रिक एयरवे मामलों पर केस-बेस्ड डिस्कशन आयोजित किए गए। डॉक्टरों को अलग-अलग जटिल परिस्थितियों में मरीज की स्थिति का आकलन करने, संभावित जोखिमों को समझने और उपचार की रणनीति तय करने के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। इसके बाद आधुनिक एयरवे उपकरणों के माध्यम से प्रतिभागियों को हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग दी गई, ताकि वे वास्तविक आपात स्थितियों में तकनीक और उपकरणों का प्रभावी इस्तेमाल कर सकें।

प्रशिक्षण के दौरान डॉक्टरों ने मुश्किल परिस्थितियों में बच्चों की एयरवे को सुरक्षित रखने, उसके प्रबंधन और स्थिति के अनुसार सही तकनीक तथा उपकरण का चयन करने का व्यावहारिक अभ्यास किया। विशेषज्ञों ने बताया कि बच्चों की सांस की नली वयस्कों की तुलना में अधिक संवेदनशील और कई मामलों में अधिक चुनौतीपूर्ण होती है। ऐसे में छोटी सी तकनीकी चूक या निर्णय लेने में देरी भी गंभीर स्थिति पैदा कर सकती है। इसलिए बच्चों के एयरवे प्रबंधन में तकनीकी दक्षता के साथ तेज और सही निर्णय लेना बेहद महत्वपूर्ण है।

कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों ने नवीनतम चिकित्सा दिशानिर्देशों और एडवांस एयरवे गैजेट्स के इस्तेमाल पर भी जानकारी साझा की। प्रतिभागियों को यह समझाने पर जोर दिया गया कि किसी भी जटिल मामले में केवल उपकरण उपलब्ध होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि डॉक्टर को यह भी पता होना चाहिए कि किस परिस्थिति में कौन सा उपकरण और कौन सी तकनीक सबसे उपयुक्त होगी।

विभागाध्यक्ष डॉ. प्रो. केटी भौमिक ने कहा कि एयरवे मैनेजमेंट में छोटी सी चूक भी मरीज के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। उन्होंने बताया कि 5वीं सीड वर्कशॉप का उद्देश्य डॉक्टरों को नवीनतम गाइडलाइंस और एडवांस एयरवे गैजेट्स के सही इस्तेमाल में दक्ष बनाना है, ताकि वे जटिल परिस्थितियों का आत्मविश्वास के साथ सामना कर सकें।

कार्यशाला में चिकित्सा निदेशक डॉ. कविता रानी शर्मा के साथ डॉ. सुजाता चौधरी, डॉ. अनुदीप जाफरा और डॉ. नीरजा भारद्वाज सहित कई विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया और अपने अनुभव साझा किए। विशेषज्ञों ने बच्चों में एयरवे से जुड़ी आपात स्थितियों के दौरान टीमवर्क, सही तकनीक और समय पर निर्णय की अहमियत पर भी जोर दिया।

इस प्रशिक्षण से डॉक्टरों को बच्चों में सांस की नली से जुड़ी कठिन परिस्थितियों से निपटने के लिए अधिक व्यावहारिक और तकनीकी रूप से सक्षम बनाने की कोशिश की गई है। सफदरजंग अस्पताल की इस पहल से पीडियाट्रिक एयरवे इमरजेंसी के बेहतर प्रबंधन और गंभीर मामलों में मरीजों की सुरक्षा मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

 

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संवाददाता

Priyanka Singh

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