Naval EOD Exercise: समुद्री बारूदी खतरों से निपटने की तैयारी मजबूत, भारत-अमेरिका नौसेना का ईओडी अभ्यास संपन्न
नई दिल्ली, 17 अगस्त। समुद्र में विस्फोटक और बारूदी खतरों से निपटने की परिचालन क्षमता मजबूत करने के उद्देश्य से भारत और अमेरिका की नौसेनाओं का आठवां एक्सप्लोसिव ऑर्डनेंस डिस्पोजल (EOD) अभ्यास 2026 कोच्चि में संपन्न हो गया। दक्षिणी नौसेना कमान में 14 अगस्त को समाप्त हुए इस द्विपक्षीय अभ्यास के दौरान दोनों देशों की विशेषज्ञ टीमों ने अत्याधुनिक तकनीकों, संचालन प्रक्रियाओं और समुद्री सुरक्षा से जुड़ी सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान किया।
संयुक्त अभ्यास का उद्देश्य समुद्र में संभावित विस्फोटक और बारूदी खतरों की पहचान, उनके सुरक्षित निपटारे और विशेष समुद्री अभियानों के दौरान टीमों के बीच बेहतर तालमेल विकसित करना था। अभ्यास के दौरान दोनों देशों की नौसेनाओं के विशेषज्ञों ने विभिन्न चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अपनी तकनीकी क्षमताओं और परिचालन प्रक्रियाओं को साझा किया।
अभ्यास में इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) से निपटने, विस्फोटकों को सुरक्षित करने और समुद्री बारूदी सुरंगों को निष्क्रिय करने से संबंधित प्रशिक्षण दिया गया। इसके अलावा मानव रहित अंडरवाटर सिस्टम के इस्तेमाल पर भी विशेषज्ञ स्तर पर प्रशिक्षण और जानकारी का आदान-प्रदान हुआ। इन गतिविधियों का उद्देश्य समुद्री क्षेत्र में विस्फोटक खतरों के सामने आने पर दोनों नौसेनाओं की प्रतिक्रिया क्षमता को अधिक प्रभावी बनाना रहा।
क्रॉस-ट्रेनिंग के दौरान मलबे की तलाश और उसे निकालने, विशेष उपकरणों के इस्तेमाल तथा डाइविंग ऑपरेशन का भी अभ्यास किया गया। दोनों देशों के डाइविंग विशेषज्ञों ने एक-दूसरे की कार्यप्रणाली और प्रक्रियाओं को समझने के साथ संयुक्त रूप से विभिन्न प्रशिक्षण गतिविधियों को पूरा किया।
भारतीय नौसेना के अनुसार इस संयुक्त प्रशिक्षण से दोनों देशों की डाइविंग टीमों की तकनीकी दक्षता और आपसी समझ मजबूत हुई है। साथ ही, अभ्यास ने जटिल समुद्री परिस्थितियों में एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करने और परिचालन स्तर पर बेहतर समन्वय स्थापित करने में भी मदद की।
भारत और अमेरिका के बीच इस तरह के संयुक्त नौसैनिक अभ्यास दोनों देशों के रक्षा सहयोग को मजबूत करने के साथ-साथ समुद्री सुरक्षा से जुड़े विशेष अभियानों में व्यावहारिक क्षमताओं को बढ़ाने का अवसर देते हैं। EOD अभ्यास के दौरान विशेषज्ञों के बीच तकनीक और अनुभव साझा होने से समुद्री विस्फोटक खतरों से निपटने की संयुक्त क्षमता को और मजबूत करने पर जोर रहा।
अभ्यास के समापन के साथ दोनों नौसेनाओं ने विशेष समुद्री अभियानों में सहयोग और परिचालन तालमेल को आगे बढ़ाने की दिशा में अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत किया। समुद्री सुरक्षा के बदलते स्वरूप में EOD और डाइविंग जैसी विशेष क्षमताओं का महत्व लगातार बढ़ रहा है और ऐसे संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम इन क्षमताओं को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।


