Friday, 6 November 2026निष्पक्ष खबरें • बेबाक नज़रिया
TOP STORY
THE COMPLETE NEWSROOMखबर पूरी। नज़रिया साफ़।भारत से आपके शहर तक
▤ ई-पेपर पढ़ें ↗
BREAKING NEWS
Hapur News : हापुड़ में किशोरी से दुष्कर्म के दोषी को 10 साल की सजा, 5 हजार का जुर्माना भी लगाHapur News : हापुड़ के उद्योगपति संजय गुप्ता का होगा राष्ट्रीय सम्मान, दिल्ली में मिलेगा ग्लोबल आइकॉन अवार्डLucknow : जिस निष्पक्षता से मिली नौकरी, उसी ईमानदारी से पीड़ित को न्याय दिलाएं वैज्ञानिक अधिकारी- सीएम योगीLucknow : पुलिस महारथी और फॉरेंसिक विभाग सारथी बनकर हर व्यक्ति को दिलाएं न्याय- मुख्यमंत्री योगीAyodhya : ‘पुष्पक विमान’ और ‘राम दरबार’ के साथ ही मोहित करेगी रामायण थीमLucknow : बुजुर्गों के सम्मान और आर्थिक सुरक्षा का सहारा बनी योगी सरकार, 67.50 लाख लोगों को हर महीने मिल रही पेंशनAyodhya : 15 फीट ऊँचे रामरथ पर विराजेंगे जगत के पालनहारीAyodhya : रामनगरी के दसवें दीपोत्सव में दिखेगा वैश्विक रामकथा का रंग

जलवायु-अनुकूल कृषि और सुशासन पर सांसदों-विधायकों के लिए NFPRC की कार्यशाला आयोजित

NFPRC Organizes Workshop for Socialist Legislators on Climate-Resilient Agriculture and Good Governance

जलवायु-अनुकूल कृषि और सुशासन पर सांसदों-विधायकों के लिए NFPRC की कार्यशाला आयोजित

नई दिल्ली, 1 अगस्त। नेशन फर्स्ट पॉलिसी रिसर्च एंड चेंज फाउंडेशन (NFPRC) ने इंडिया हैबिटेट सेंटर में सांसदों और विधायकों के लिए जलवायु-अनुकूल कृषि, सिंचाई, फसल बीमा, डिजिटल संचार और विधायी क्षमता निर्माण पर एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया। इसमें लोकसभा, राज्यसभा और विभिन्न राज्यों की विधानसभाओं के जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया।

NFPRC के अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद तरुण चुघ ने कहा कि साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण और जलवायु-अनुकूल शासन व्यवस्था विकसित भारत@2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आवश्यक है। उन्होंने फसल विविधीकरण, जल संरक्षण, सिंचाई विस्तार, फसल बीमा और डिजिटल संवाद को मजबूत बनाने पर जोर दिया।

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के कृषि आयुक्त डॉ. प्रवीण कुमार सिंह और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के उप महानिदेशक डॉ. राजबीर सिंह ने जलवायु-अनुकूल कृषि पर आयोजित सत्र में कहा कि देश में अधिकांश क्षेत्रों में भूजल की स्थिति स्थिर है, लेकिन इसे बनाए रखने के लिए सतत जल संरक्षण आवश्यक है। उन्होंने मोटे अनाज, दलहन, तिलहन, बागवानी फसलों, वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और सूक्ष्म सिंचाई को बढ़ावा देने पर बल दिया।

ICRIER के विशिष्ट प्रोफेसर एवं नीति आयोग के पूर्व सदस्य रमेश चंद ने कहा कि तकनीक आधारित सरकारी पहलों से भारतीय कृषि अधिक सशक्त हुई है। उन्होंने बताया कि 2015-16 के बाद कृषि क्षेत्र में नकारात्मक वृद्धि का दौर समाप्त हुआ है तथा AI, IoT, ड्रोन और डिजिटल सप्लाई चेन जैसी तकनीकें कृषि परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

संचार एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ अरुण यादव ने सोशल मीडिया, डिजिटल विश्लेषण, तथ्य सत्यापन, साइबर सुरक्षा और जिम्मेदार AI आधारित संचार पर प्रशिक्षण दिया।

कार्यक्रम के समापन पर डॉ. अभिनव प्रकाश ने शोध-आधारित नीति निर्माण, विधायी क्षमता निर्माण और संस्थागत सहयोग के प्रति NFPRC की प्रतिबद्धता दोहराई। प्रतिभागियों ने कार्यशाला को नीति संवाद और सुशासन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।

इस खबर पर आपकी प्रतिक्रिया

Avatar photo
संवाददाता

Priyanka Singh

संबंधित खबरें