Noida Sector 150 accident: युवराज की मौत का खुलासा, तय मानकों से तीन गुना गहरा गड्ढा बना हादसे की वजह

Noida Sector 150 accident: युवराज की मौत का खुलासा, तय मानकों से तीन गुना गहरा गड्ढा बना हादसे की वजह
नोएडा। सेक्टर-150 स्थित स्पोर्ट्स सिटी में इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत के मामले में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जिस गड्ढे में गिरकर युवराज की जान गई, उसकी खुदाई तय मानकों से करीब तीन गुना अधिक की गई थी। नोएडा प्राधिकरण ने बिल्डर को केवल एक बेसमेंट बनाने की अनुमति दी थी, लेकिन नियमों को नजरअंदाज करते हुए बिना अनुमति डबल बेसमेंट की खुदाई कर दी गई। इसी वजह से गड्ढे की गहराई खतरनाक स्तर तक पहुंच गई और यह हादसा हो गया।
प्राधिकरण के अनुसार बिल्डर को खनन विभाग से दो एनओसी दी गई थीं, जिनमें पहली 3 मीटर और दूसरी 5 मीटर तक खुदाई की अनुमति थी, यानी कुल 8 मीटर। इसके बावजूद मौके पर करीब 20 मीटर तक खुदाई की गई। अत्यधिक खुदाई के चलते वर्ष 2022 से ही गड्ढे में पानी भरना शुरू हो गया था, लेकिन इसके बावजूद न तो खुदाई रोकी गई और न ही कोई सुरक्षा उपाय किए गए।
विशेष जांच टीम की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि जिस गड्ढे में युवराज की कार गिरी, उसकी अनुमानित गहराई जलभराव समेत करीब 55 से 70 फीट थी। तेज अंधेरा और पानी से भरे गड्ढे के कारण कार सीधे उसमें समा गई, जिससे युवराज मेहता की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे ने बिल्डर की लापरवाही और निगरानी तंत्र की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है।
नोएडा प्राधिकरण ने बताया कि यह स्थल स्पोर्ट्स सिटी के प्लॉट नंबर-2 से सब-डिवीजन के बाद बने ए-3 भूखंड पर स्थित है। लगभग 27,185 वर्ग मीटर क्षेत्रफल वाले इस प्लॉट पर वर्ष 2017 में 12 मंजिला इमारत के निर्माण का नक्शा पास किया गया था। स्वीकृत नक्शे के अनुसार केवल एक बेसमेंट की अनुमति थी, जिसमें 644 वाहनों की पार्किंग प्रस्तावित की गई थी, लेकिन इसके विपरीत डबल बेसमेंट की खुदाई कर दी गई।
युवराज की मौत के मामले में गठित विशेष जांच टीम अपनी प्राथमिक रिपोर्ट शासन को सौंप चुकी है। अब जिम्मेदारी तय करने के लिए नोएडा प्राधिकरण, पुलिस और जिला प्रशासन से प्राप्त जवाबों की विस्तृत जांच की जा रही है। जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि नियोजन विभाग, वर्क सर्कल और जल विभाग की ओर से बिल्डर को पत्र भेजे गए थे, इसके बावजूद समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। माना जा रहा है कि रिपोर्ट के अंतिम रूप लेने के बाद इस मामले में बिल्डर और संबंधित अधिकारियों पर बड़ी कार्रवाई हो सकती है।





