Noida Electric Vehicles: नोएडा में निजी इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रति रुचि कम, 70 फीसदी ईवी अभी भी व्यावसायिक उपयोग में

Noida Electric Vehicles: नोएडा में निजी इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रति रुचि कम, 70 फीसदी ईवी अभी भी व्यावसायिक उपयोग में

नोएडा: जिले में इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर सरकारी प्रोत्साहन और सब्सिडी योजनाओं के बावजूद निजी उपयोग के लिए लोगों का रुझान अभी भी अपेक्षा के अनुरूप नहीं बढ़ पाया है। मौजूदा स्थिति यह है कि जिले में चल रहे इलेक्ट्रिक वाहनों में करीब 70 फीसदी ई-रिक्शा और इलेक्ट्रिक ऑटो हैं, जो मुख्य रूप से व्यावसायिक उपयोग में आते हैं। निजी इलेक्ट्रिक कार और दोपहिया वाहनों की संख्या अभी भी काफी कम बनी हुई है।

परिवहन विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, नोएडा जिले में इस समय करीब 12 लाख वाहन पंजीकृत हैं। इनमें से लगभग 50 हजार इलेक्ट्रिक वाहन हैं। इन इलेक्ट्रिक वाहनों में 26,200 से अधिक ई-रिक्शा, करीब 10 हजार इलेक्ट्रिक ऑटो शामिल हैं, जबकि शेष संख्या इलेक्ट्रिक कार और दोपहिया वाहनों की है। इनमें भी व्यावसायिक उपयोग वाले वाहनों की संख्या निजी वाहनों की तुलना में अधिक है।

एआरटीओ प्रशासन नंदकुमार ने बताया कि बीते वर्ष की तुलना में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में बढ़ोतरी जरूर हुई है, लेकिन यह वृद्धि मुख्य रूप से व्यावसायिक श्रेणी में देखी गई है। निजी उपयोग के लिए इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने की गति अभी धीमी है। परिवहन विभाग द्वारा विभिन्न माध्यमों से लोगों को इलेक्ट्रिक वाहनों के फायदे बताए जा रहे हैं और घरेलू उपयोग के लिए इन्हें अपनाने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं लागू की गई हैं। दोपहिया इलेक्ट्रिक वाहन की खरीद पर 5 हजार रुपये तक की सब्सिडी, जबकि चार पहिया इलेक्ट्रिक वाहन पर 1 लाख रुपये तक की सब्सिडी दी जा रही है। इसके अलावा इलेक्ट्रिक वाहनों पर रोड टैक्स और पंजीकरण शुल्क पूरी तरह माफ है। सब्सिडी के लिए वाहन मालिक को www.upevsubsidy.in पोर्टल पर आवेदन करना होता है।

इलेक्ट्रिक वाहनों के कई फायदे भी हैं। ये वाहन चलते समय किसी तरह का टेलपाइप उत्सर्जन नहीं करते, जिससे वायु प्रदूषण और ग्रीनहाउस गैसों में कमी आती है। पेट्रोल और डीजल की तुलना में बिजली सस्ती होने से ईंधन खर्च कम होता है। इनमें इंजन और चलने वाले पुर्जे कम होते हैं, जिससे रखरखाव का खर्च भी कम आता है। इलेक्ट्रिक मोटर बेहद शांत होती है, जिससे ध्वनि प्रदूषण घटता है और ड्राइविंग अनुभव आरामदायक होता है। साथ ही, इलेक्ट्रिक वाहन तुरंत टॉर्क प्रदान करते हैं, जिससे वे तेजी से रफ्तार पकड़ते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि निजी इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में तेजी न आने का सबसे बड़ा कारण चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी है। जब तक इलेक्ट्रिक चार्जिंग प्वाइंट की उपलब्धता पेट्रोल पंपों की तरह व्यापक नहीं होगी, तब तक आम लोग निजी इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने से हिचकिचाते रहेंगे। वर्तमान में लोग इलेक्ट्रिक वाहन केवल शहर के सीमित दायरे में उपयोग के लिए ही खरीद रहे हैं।

नोएडा में कुल 69 इलेक्ट्रिक चार्जिंग प्वाइंट बनाए गए थे, लेकिन इनमें से करीब 90 फीसदी खराब या बंद पड़े हैं। चार्जिंग प्वाइंट की यह खराब स्थिति भी निजी इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रति लोगों की रुचि कम होने की बड़ी वजह मानी जा रही है। यदि चार्जिंग नेटवर्क को मजबूत किया जाए, तो आने वाले समय में निजी इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या में भी तेजी से बढ़ोतरी हो सकती है।

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