Noida Cyber Crime: नोएडा में बीमा पॉलिसी के नाम पर 500 लोगों से ठगी करने वाले कॉल सेंटर का पर्दाफाश, पांच गिरफ्तार

Noida Cyber Crime: नोएडा में बीमा पॉलिसी के नाम पर 500 लोगों से ठगी करने वाले कॉल सेंटर का पर्दाफाश, पांच गिरफ्तार

नोएडा। सेक्टर-6 में शुक्रवार को फेज-1 पुलिस ने बीमा पॉलिसी और रियल एस्टेट निवेश के झांसे में लोगों से करोड़ों की ठगी कर रहे फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया। पुलिस ने मौके से पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस का दावा है कि कॉल सेंटर के माध्यम से अब तक 500 लोगों को निशाना बनाया गया। आरोपियों के कब्जे से एक लैपटॉप, 16 मोबाइल फोन, एक प्रिंटर और 45 कॉल डेटा शीट बरामद की गई।

एडिशनल डीसीपी नोएडा शैव्या गोयल ने बताया कि पुलिस को कुछ दिनों पहले इनपुट मिला था कि शहर में एक कॉल सेंटर संचालित है, जो आम नागरिकों को फर्जी बीमा पॉलिसी और निवेश योजनाओं के झांसे में फंसा रहा है। इसके बाद पुलिस ने सेक्टर-6 स्थित डी-16 मकान पर छापा मारा। गिरफ्तार आरोपी अनुज, राकेश कुमार, मनीष मंडल, शुभम सक्सेना और शहजाद अहमद हैं। भंगेल निवासी अनुज इस गिरोह का सरगना है।

पुलिस के मुताबिक, आरोपी कॉल के जरिए खुद को बीमा कंपनी, बैंक या निवेश सलाहकार का प्रतिनिधि बताते थे। वे लोगों को लैप्स पॉलिसी के रुपये वापस दिलाने, पॉलिसी को जल्दी मेच्योर कराने और रियल एस्टेट में सुरक्षित निवेश का झांसा देते थे। भरोसा दिलाने के लिए फर्जी दस्तावेज और आकर्षक स्कीमों का इस्तेमाल किया जाता था। आरोपी आम लोगों से 5,000 रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक का निवेश कराते थे और ठगी की रकम फर्जी और किराये के बैंक खातों में ट्रांसफर कर आपस में बांट लेते थे। पुलिस को लैपटॉप से कॉल डेटा शीट, पीड़ितों की जानकारी और लेन-देन से जुड़े डिजिटल साक्ष्य मिले हैं।

जांच में सामने आया कि आरोपियों के खिलाफ पहले से एनसीआरपी पोर्टल पर विभिन्न राज्यों से शिकायतें दर्ज हैं। पुलिस अब इन डेटा के आधार पर पीड़ितों की पहचान कर उन्हें सूचना देने और कानूनी कार्रवाई पूरी करने में जुटी है। अधिकांश पीड़ित सुदूर राज्यों के हैं, ताकि वे बार-बार नोएडा न आ सकें।

एसीपी स्वतंत्र सिंह ने बताया कि गिरफ्तार ज्यादातर आरोपी स्नातक हैं और उनकी उम्र 20 से 35 साल के बीच है। पूछताछ में यह भी पता चला कि कॉल सेंटर बंद करके आरोपी फरार होने वाले थे। कॉल सेंटर किराये पर लिया गया था और करीब 40,000 रुपये में सेटअप तैयार किया गया था। पुलिस आरोपियों से कॉल सेंटर संचालन और बीमा संबंधी डेटा के स्रोत की जांच कर रही है।

पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल, मैसेज या ई-मेल पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। यदि कोई खुद को बैंक या बीमा कंपनी का अधिकारी बताकर धन की मांग करता है, तो इसकी पुष्टि संबंधित कंपनी के आधिकारिक माध्यम से जरूर करें। किसी को भी ओटीपी, बैंक खाता विवरण, एटीएम या डेबिट/क्रेडिट कार्ड की जानकारी साझा न करें। साइबर ठगी की आशंका होने या धनराशि ट्रांसफर हो जाने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।

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