Compressed Biogas Plant: नोएडा की कंपनी कचरे से बनाएगी ईंधन, 1000 करोड़ रुपये के निवेश से 10 सीबीजी प्लांट लगाने की तैयारी
नोएडा। आयातित ईंधन पर निर्भरता कम करने और कृषि अवशेषों को ऊर्जा के स्रोत में बदलने की दिशा में नोएडा आधारित नेक्सजेन एनर्जिया लिमिटेड ने बड़े विस्तार की तैयारी की है। कंपनी कृषि अवशेष, जैविक कचरे और पशु अपशिष्ट से कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी), जैव ईंधन और जैव उर्वरक तैयार कर रही है। कंपनी अब उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान में 10 नए सीबीजी संयंत्र स्थापित करने की योजना पर काम कर रही है। इस विस्तार पर करीब 1000 करोड़ रुपये निवेश की तैयारी है।
फरवरी 2019 में शुरू हुई कंपनी का उद्देश्य कृषि अवशेष जलाने की समस्या को कम करने के साथ-साथ किसानों के लिए इसे आय और ऊर्जा का स्रोत बनाना है। कंपनी का पहला सीबीजी संयंत्र गोरखपुर में शुरू हुआ था। इसके अलावा हरिद्वार और चेन्नई में भी संयंत्र संचालित किए जा रहे हैं।
10 नए सीबीजी संयंत्र लगाने की योजना
कंपनी उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान में 20 टन प्रतिदिन तक की क्षमता वाले 10 नए सीबीजी संयंत्र लगाने की योजना बना रही है। बुलंदशहर, फतेहगढ़, बलरामपुर, आरा, कोटा और बीकानेर समेत कई स्थानों पर परियोजनाएं प्रस्तावित हैं।
कंपनी के विस्तार प्लान में विजयवाड़ा, इंदौर और राजकोट में तीन और संयंत्र शुरू करना भी शामिल है। इन्हें साल के अंत तक शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। कंपनी का कहना है कि सीबीजी के उत्पादन से कृषि अवशेषों का उपयोग ऊर्जा उत्पादन में किया जा सकेगा और इससे पराली व अन्य जैविक कचरे के निपटारे की समस्या भी कम होगी।
भूमि मालिकों के साथ साझेदारी मॉडल
कंपनी करीब 10 एकड़ जमीन उपलब्ध कराने वाले भूमि मालिकों के साथ साझेदारी मॉडल पर संयंत्र स्थापित कर रही है। इस मॉडल में संयंत्र की डिजाइन, स्थापना और संचालन की जिम्मेदारी नेक्सजेन एनर्जिया की होगी, जबकि भूमि मालिक को लंबे समय तक आय में हिस्सेदारी का अवसर मिलेगा।
कंपनी के प्रवक्ता आनंद द्विवेदी के अनुसार, सीबीजी उत्पादन के साथ जैव उर्वरक और ब्रिकेट भी तैयार किए जा सकते हैं। इससे कृषि अवशेष को जलाने के बजाय उसका आर्थिक इस्तेमाल किया जा सकेगा।
कंपनी का लक्ष्य सीबीजी उत्पादन बढ़ाकर देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मजबूत करना है। साथ ही कृषि अवशेषों के बेहतर उपयोग के जरिए किसानों की अतिरिक्त आय बढ़ाने और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा करने पर भी जोर दिया जा रहा है।

