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Noida Court: एफआईआर दर्ज न होने पर महिला की अग्रिम जमानत याचिका निस्तारित, अदालत ने गिरफ्तारी आशंका के पर्याप्त आधार न होने की कही बात

Noida Court: एफआईआर दर्ज न होने पर महिला की अग्रिम जमानत याचिका निस्तारित, अदालत ने गिरफ्तारी आशंका के पर्याप्त आधार न होने की कही बात

नोएडा। सत्र अदालत ने एक महिला द्वारा दायर अग्रिम जमानत याचिका को समय से पूर्व दायर मानते हुए निस्तारित कर दिया है। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति के विरुद्ध विधिवत प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज हुए बिना तथा गिरफ्तारी की वास्तविक और निकटवर्ती आशंका के पर्याप्त आधार उपलब्ध हुए बिना अग्रिम जमानत याचिका पर गुण-दोष के आधार पर विचार करना न्यायोचित नहीं माना जा सकता। मामला नेहा श्रीवास्तव द्वारा दाखिल अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र से संबंधित है। याचिका में उन्होंने दावा किया था कि थाना फेज-3 क्षेत्र में एक प्रभावशाली व्यक्ति ने उनके खिलाफ झूठी और मनगढ़ंत शिकायत दर्ज कराई है। उनका आरोप था कि शिकायत के आधार पर पुलिस लगातार उनके घर के आसपास मौजूद रही और उन्हें तथा उनके परिवार के सदस्यों को गिरफ्तार करने का प्रयास कर रही थी। याचिका में यह भी कहा गया कि पुलिस की कथित घेराबंदी के कारण वह अपने घर नहीं जा पा रही हैं। इससे उनके परिवार को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने अदालत को बताया कि उनके वृद्ध ससुर गंभीर रूप से बीमार हैं और उन्हें नियमित रूप से डायलिसिस करानी पड़ती है। घर से दूर रहने की स्थिति का उनके इलाज और देखभाल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। महिला ने अदालत के समक्ष यह भी कहा कि उन्होंने शिकायतकर्ता के साथ किसी प्रकार की धोखाधड़ी नहीं की है और न ही कोई फर्जी दस्तावेज तैयार किया है। उन्होंने अपने ऊपर लगाए गए अवैध धन उगाही और आपराधिक धमकी जैसे आरोपों को भी पूरी तरह निराधार बताया। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि उनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और केवल संभावित गिरफ्तारी की आशंका के कारण उन्होंने अग्रिम जमानत की मांग की है। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने थाना फेज-3 पुलिस से रिपोर्ट तलब की। उपलब्ध तथ्यों और पुलिस रिपोर्ट पर विचार करने के बाद अदालत ने पाया कि संबंधित मामले में अभी तक विधिवत एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। साथ ही गिरफ्तारी की ऐसी कोई ठोस और तात्कालिक स्थिति भी सामने नहीं आई, जिसके आधार पर अग्रिम जमानत याचिका पर विचार किया जाए। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अग्रिम जमानत का प्रावधान उन परिस्थितियों के लिए है, जहां किसी व्यक्ति को गिरफ्तारी की वास्तविक और निकट भविष्य में आशंका हो। केवल आशंका या अनुमान के आधार पर अग्रिम जमानत प्रदान नहीं की जा सकती। इसी आधार पर अदालत ने महिला की याचिका को असमय प्रस्तुत मानते हुए निस्तारित कर दिया। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यह आदेश स्पष्ट करता है कि अग्रिम जमानत के लिए केवल शिकायत का अस्तित्व पर्याप्त नहीं होता, बल्कि एफआईआर दर्ज होना और गिरफ्तारी की वास्तविक संभावना भी महत्वपूर्ण कानूनी शर्तें हैं।

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