Diesel Purchase Rules: नोएडा में डीजल खरीद पर सख्ती, नए नियमों से छोटे कारोबारी और किसानों की बढ़ीं मुश्किलें

Diesel Purchase Rules: नोएडा में डीजल खरीद पर सख्ती, नए नियमों से छोटे कारोबारी और किसानों की बढ़ीं मुश्किलें

नोएडा। जिले में डीजल की बिक्री और खरीद को लेकर नए सुरक्षा नियम लागू होने के बाद छोटे कारोबारियों, किसानों और औद्योगिक इकाइयों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। केंद्र सरकार के नए गजट के अनुसार अब पेट्रोल पंप संचालक किसी भी सामान्य डिब्बे में डीजल नहीं बेच सकेंगे। डीजल केवल पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गेनाइजेशन (पेसो) द्वारा स्वीकृत कंटेनरों में ही दिया जाएगा। इसके अलावा स्थानीय खरीदारों और छोटे कारोबारियों को एक बार में 200 लीटर से अधिक डीजल बेचने पर भी रोक लगा दी गई है।

जिला पूर्ति अधिकारी स्मृति गौतम ने बताया कि यह निर्णय सुरक्षा मानकों को मजबूत करने और संभावित दुर्घटनाओं को रोकने के उद्देश्य से लिया गया है। उनके अनुसार खुले, असुरक्षित या गैर-मानक डिब्बों में डीजल का भंडारण आग और विस्फोट जैसी घटनाओं का कारण बन सकता है। पेसो प्रमाणित कंटेनर विशेष सुरक्षा मानकों के अनुरूप बनाए जाते हैं, जिससे ईंधन के सुरक्षित परिवहन और भंडारण को सुनिश्चित किया जा सकता है।

उन्होंने बताया कि नया नियम तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है और जिले के सभी पेट्रोल पंपों को इसके संबंध में निर्देश जारी कर दिए गए हैं। नियमों का उल्लंघन करने वाले पेट्रोल पंप संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सभी संबंधित पक्षों को नए नियमों का पालन करना होगा।

हालांकि नए नियमों के लागू होने के बाद औद्योगिक क्षेत्रों और छोटे व्यवसायों से जुड़े लोगों ने चिंता जताई है। ग्रेटर नोएडा के उद्यमी अमित उपाध्याय का कहना है कि औद्योगिक इकाइयों में उपयोग होने वाले जेनरेटर और मशीनों के संचालन के लिए एक बार में 400 से 500 लीटर डीजल की आवश्यकता होती है। ऐसे में 200 लीटर की सीमा के कारण बार-बार पेट्रोल पंपों के चक्कर लगाने पड़ेंगे, जिससे समय और संसाधनों दोनों की बर्बादी होगी।

उद्योग जगत से जुड़े संजय बत्रा ने कहा कि सरकार को ऐसे नियम लागू करते समय एमएसएमई क्षेत्र की व्यावहारिक जरूरतों पर भी विचार करना चाहिए। उनका मानना है कि अचानक लागू किए गए प्रतिबंधों का असर छोटे और मध्यम उद्योगों के संचालन पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि कारोबार को सुचारु रूप से चलाने के लिए पर्याप्त मात्रा में ईंधन की उपलब्धता बेहद जरूरी है।

उद्यमी सतीश सिंह ने बताया कि पेसो स्वीकृत कंटेनर बाजार में आसानी से उपलब्ध नहीं हैं। अधिकांश लोगों को इन्हें ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से खरीदना पड़ रहा है और उनकी कीमत सामान्य प्लास्टिक या लोहे के डिब्बों की तुलना में काफी अधिक है। ऐसे में छोटे कारोबारियों और किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है।

दूसरी ओर प्रशासन का कहना है कि यह व्यवस्था पूरी तरह जन सुरक्षा को ध्यान में रखकर लागू की गई है। जिला पूर्ति अधिकारी ने बताया कि पेट्रोल पंप संचालकों और उपभोक्ताओं को नए नियमों के बारे में जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे केवल पेसो प्रमाणित कंटेनरों का ही उपयोग करें और सुरक्षा मानकों का पालन करें।

नए नियमों के लागू होने के बाद अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन सुरक्षा और व्यापारिक जरूरतों के बीच संतुलन कैसे स्थापित करता है, ताकि नियमों का उद्देश्य भी पूरा हो और कारोबार पर अनावश्यक प्रभाव भी न पड़े।

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