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Real Estate: गौतमबुद्ध नगर की 27 रियल एस्टेट परियोजनाओं में 13,160 फ्लैट, विला और दुकानों का निर्माण होगा

Real Estate: गौतमबुद्ध नगर की 27 रियल एस्टेट परियोजनाओं में 13,160 फ्लैट, विला और दुकानों का निर्माण होगा

नोएडा। गौतमबुद्ध नगर में रियल एस्टेट क्षेत्र में तेजी का दौर जारी है। उत्तर प्रदेश भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (यूपी रेरा) की ओर से जनवरी से जून 2026 के बीच जिले में 27 नई रियल एस्टेट परियोजनाओं को पंजीकृत किया गया है। इन परियोजनाओं में कुल 13,160 फ्लैट, विला और दुकानों का निर्माण किया जा सकेगा। इन परियोजनाओं के लिए करीब 15,678 करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान है।

यूपी रेरा के अध्यक्ष संजय भूसरेड्डी ने शनिवार को प्रेसवार्ता में बताया कि जनवरी से जून 2026 तक प्रदेश के अलग-अलग जिलों में कुल 143 नई रियल एस्टेट परियोजनाएं पंजीकृत हुई हैं। परियोजनाओं की संख्या के लिहाज से लखनऊ सबसे आगे है, जबकि निवेश और निर्माण होने वाली इकाइयों की संख्या के मामले में गौतमबुद्ध नगर ने बढ़त बनाई है।

प्रदेश की सभी 143 परियोजनाओं में कुल 46,049 आवासीय इकाइयों के निर्माण की संभावना है। इन परियोजनाओं में करीब 31,952 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। रेरा के आंकड़ों के मुताबिक वर्तमान में बाजार में करीब 2,55,687 इकाइयां उपलब्ध हैं। इनमें फ्लैट, दुकान, विला और भूखंड शामिल हैं। इससे घर और संपत्ति खरीदने वाले लोगों के सामने अलग-अलग बजट और जरूरत के हिसाब से कई विकल्प उपलब्ध हैं।

गौतमबुद्ध नगर में 27 परियोजनाओं में 13,160 इकाइयों के निर्माण की योजना है। जिले में प्रस्तावित निवेश 15,678 करोड़ रुपये है। निवेश और निर्माण होने वाली इकाइयों की संख्या के लिहाज से यह प्रदेश के अन्य प्रमुख जिलों की तुलना में काफी आगे है।

लखनऊ में सबसे अधिक 37 परियोजनाएं पंजीकृत हुई हैं। इन परियोजनाओं में 9,872 इकाइयों के निर्माण के साथ करीब 3,834 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। वहीं गाजियाबाद में 19 परियोजनाओं में 9,500 इकाइयों का निर्माण होगा और यहां करीब 3,989 करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान है।

यूपी रेरा के आंकड़ों से पिछले कुछ वर्षों में रियल एस्टेट परियोजनाओं के पंजीकरण में बढ़ोतरी का भी संकेत मिलता है। वर्ष 2023 में प्रदेश में 197 परियोजनाएं मंजूर हुई थीं। वर्ष 2024 में यह संख्या बढ़कर 259 और वर्ष 2025 में 308 हो गई। वर्ष 2026 में अभी जनवरी से जून तक के छह महीनों में ही 143 परियोजनाएं पंजीकृत हो चुकी हैं।

52 हजार से अधिक शिकायतों का निस्तारण

यूपी रेरा में फ्लैट खरीदारों से संबंधित शिकायतों के निस्तारण में भी बड़ी संख्या में मामले पूरे किए गए हैं। रेरा में अब तक 61,357 शिकायतें दर्ज हुई हैं। इनमें से करीब 52 हजार शिकायतों का निस्तारण किया जा चुका है।

विभिन्न मंचों के माध्यम से 11,558 मामलों में करीब 6,032.42 करोड़ रुपये मूल्य के संपत्ति विवादों का समाधान कराया गया है। इनमें रेरा की पीठ द्वारा 3,237 मामलों का निस्तारण, कंसिलिएशन फोरम के माध्यम से 1,648 मामलों का समाधान और रेरा पोर्टल के माध्यम से 6,673 आवंटियों से जुड़े मामलों का समाधान शामिल है।

रेरा की ओर से अब तक 20 हजार से अधिक आरसी यानी वसूली प्रमाणपत्र जारी किए जा चुके हैं। इनमें से 8,212 खरीदारों को करीब 2,173 करोड़ रुपये वापस कराए गए हैं। हालांकि, अभी सात हजार से अधिक आरसी लंबित हैं। इन मामलों में 3,000 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली की जानी है।

इन लंबित मामलों में 300 से अधिक आरसी दिल्ली के पते से संबंधित हैं। कई खरीदार करीब चार वर्षों से अपनी राशि की वसूली का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे मामलों में रेरा की ओर से वसूली प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

नोएडा और ग्रेटर नोएडा में खरीदारों के लिए संवाद सत्र

बिल्डर परियोजनाओं में फ्लैट, दुकान और भूखंड खरीदने वाले लोगों की समस्याओं को सीधे सुनने के लिए यूपी रेरा जल्द ही नोएडा और ग्रेटर नोएडा में संवाद सत्र आयोजित करेगा। इसमें संपत्ति खरीदारों को आमंत्रित कर उनकी समस्याओं, शिकायतों और परियोजनाओं से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।

इससे पहले मेरठ में संवाद सत्र आयोजित किया जा चुका है। अब नोएडा और ग्रेटर नोएडा में इस तरह के कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी है। इससे खरीदारों को अपनी समस्याएं संबंधित अधिकारियों के सामने रखने और समाधान की प्रक्रिया को समझने का अवसर मिलेगा।

लखनऊ के बाद गौतमबुद्ध नगर में सबसे अधिक परियोजनाएं

जनवरी से जून 2026 तक पंजीकृत प्रमुख परियोजनाओं के आंकड़ों पर नजर डालें तो लखनऊ में 37 परियोजनाएं, गौतमबुद्ध नगर में 27 और गाजियाबाद में 19 परियोजनाएं पंजीकृत हुई हैं।

लखनऊ की 37 परियोजनाओं में 9,872 इकाइयों के साथ 3,834 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। गौतमबुद्ध नगर की 27 परियोजनाओं में 13,160 इकाइयों के साथ 15,678 करोड़ रुपये का निवेश है। वहीं गाजियाबाद की 19 परियोजनाओं में 9,500 इकाइयों के निर्माण के लिए 3,989 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है।

आंकड़ों से साफ है कि परियोजनाओं की संख्या में लखनऊ आगे है, लेकिन निवेश और निर्माण होने वाली इकाइयों के मामले में गौतमबुद्ध नगर की स्थिति मजबूत है।

एनसीआर से बाहर भी बढ़ रहा रियल एस्टेट कारोबार

यूपी रेरा की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में रियल एस्टेट विकास अब केवल राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और लखनऊ तक सीमित नहीं रह गया है। आगरा, मथुरा, वाराणसी, झांसी, बरेली और अन्य शहर भी नए रियल एस्टेट केंद्र के रूप में उभर रहे हैं।

आगरा और मथुरा में 10-10 परियोजनाएं पंजीकृत हुई हैं। वाराणसी में सात परियोजनाओं को पंजीकरण मिला है। झांसी, बाराबंकी, बरेली और प्रयागराज में तीन-तीन परियोजनाएं पंजीकृत हुई हैं। इससे संकेत मिलता है कि प्रदेश के अलग-अलग शहरों में भी आवासीय और वाणिज्यिक संपत्तियों की मांग बढ़ रही है।

यूपी रेरा अध्यक्ष संजय भूसरेड्डी ने कहा कि छह माह की रिपोर्ट रियल एस्टेट क्षेत्र में घर खरीदारों और निवेशकों के बढ़ते विश्वास का प्रमाण है। परियोजनाओं के पंजीकरण, आवासीय इकाइयों की उपलब्धता और पूंजी निवेश में लगातार वृद्धि हो रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस साल 315 से अधिक परियोजनाएं पंजीकृत हो सकती हैं।

उनके अनुसार नई परियोजनाओं के आने से घर और संपत्ति खरीदने वालों के पास अधिक विकल्प उपलब्ध रहते हैं। वहीं निवेश बढ़ने से रियल एस्टेट क्षेत्र के साथ निर्माण, रोजगार और इससे जुड़े अन्य कारोबारों को भी गति मिलने की संभावना है।

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