Noida Consumer Court: फ्लैट की सजावट का अधूरा काम दूसरी कंपनी से कराने का खर्च नहीं मिलेगा, आयोग ने याचिका खारिज की

Noida Consumer Court: फ्लैट की सजावट का अधूरा काम दूसरी कंपनी से कराने का खर्च नहीं मिलेगा, आयोग ने याचिका खारिज की
फ्लैट की सजावट और सौंदर्यकरण का काम एग्रीमेंट के अनुसार पूरा नहीं होने की स्थिति में ग्राहक अपनी मर्जी से किसी दूसरी कंपनी से काम नहीं करा सकता। जिस कंपनी के साथ कार्य पूरा करने का समझौता किया गया है, उसी कंपनी से काम कराने की प्रक्रिया अपनानी होगी। इसी तरह के एक मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने अधूरे कार्य को दूसरी कंपनी से पूरा कराने के लिए खर्च की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है।
ग्रेटर नोएडा के मी-सैटलर निवासी डॉ. अपूर्वा अस्थाना ने मैसर्स सजावट इंटीरियर प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड के प्रतिनिधियों की बातों पर भरोसा करते हुए अपने फ्लैट के सौंदर्यकरण का कार्य कराने का निर्णय लिया था। इसके लिए 26 अगस्त 2017 को कंपनी और उनके बीच एक एग्रीमेंट किया गया था।
समझौते के अनुसार कंपनी को 40 दिनों के भीतर फ्लैट की सजावट का पूरा कार्य पूरा करना था। तय शर्तों के मुताबिक काम पूरा होने के बाद कुल भुगतान 9 लाख रुपये किया जाना था। शिकायतकर्ता ने कंपनी को काम की एवज में करीब 87 प्रतिशत भुगतान भी कर दिया था।
डॉ. अपूर्वा अस्थाना का आरोप था कि 40 दिन पूरे होने के बाद जब उन्होंने फ्लैट का निरीक्षण किया तो वहां केवल 40 से 45 प्रतिशत तक ही कार्य पूरा हुआ था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एग्रीमेंट में तय मानकों के अनुसार गुणवत्ता वाले सामान का इस्तेमाल नहीं किया गया।
काम अधूरा मिलने के बाद उन्होंने कंपनी के प्रतिनिधि से बातचीत की। शिकायत के अनुसार, कंपनी प्रतिनिधि ने कहा कि अब तक किया गया कार्य सही है और आगे का काम भुगतान मिलने के बाद पूरा किया जाएगा। इसके बाद विवाद बढ़ गया और मामला जिला उपभोक्ता आयोग तक पहुंच गया।
शिकायतकर्ता ने आयोग में वाद दायर करते हुए मांग की थी कि अधूरे छोड़े गए कार्य को पूरा कराने में आने वाली राशि ब्याज सहित कंपनी से दिलाई जाए। उनका कहना था कि कंपनी ने एग्रीमेंट के अनुसार कार्य पूरा नहीं किया, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
मामले की सुनवाई के दौरान कंपनी की ओर से कोई पक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया, जिसके बाद आयोग ने एकपक्षीय सुनवाई की। हालांकि, आयोग के अनुसार शिकायतकर्ता अपने दावे को पर्याप्त साक्ष्यों के साथ साबित नहीं कर सकीं।
जिला उपभोक्ता आयोग ने सुनवाई के बाद वाद को निरस्त कर दिया। आयोग ने माना कि एग्रीमेंट के तहत जिस कंपनी को कार्य सौंपा गया था, उसी से काम पूरा कराने की प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए थी। दूसरी कंपनी से कार्य कराने के खर्च की मांग को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
इस फैसले से यह स्पष्ट हुआ है कि उपभोक्ता मामलों में केवल आरोप लगाना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि शिकायतकर्ता को अपने दावे के समर्थन में ठोस प्रमाण भी प्रस्तुत करने होते हैं।





