Himachal Politics: मुख्यमंत्री ने डॉ. यशवंत सिंह परमार की 120वीं जयंती पर दी श्रद्धांजलि, कहा- उनके विजन ने रखी आधुनिक हिमाचल की नींव

Himachal Politics: मुख्यमंत्री ने डॉ. यशवंत सिंह परमार की 120वीं जयंती पर दी श्रद्धांजलि, कहा- उनके विजन ने रखी आधुनिक हिमाचल की नींव
शिमला, 4 अगस्त। हिमाचल प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री और ‘हिमाचल निर्माता’ के रूप में विख्यात डॉ. यशवंत सिंह परमार की 120वीं जयंती पर मंगलवार को मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने शिमला के रिज मैदान स्थित उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों की ओर से उन्हें नमन करते हुए कहा कि डॉ. परमार का योगदान हिमाचल प्रदेश के इतिहास में सदैव प्रेरणास्रोत बना रहेगा।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि डॉ. यशवंत सिंह परमार दूरदर्शी नेतृत्व वाले ऐसे महान व्यक्तित्व थे, जिन्होंने आधुनिक हिमाचल प्रदेश के विकास की मजबूत आधारशिला रखी। उन्होंने अपने पूरे जीवन को प्रदेश के विकास, जनकल्याण और पहाड़ी क्षेत्रों की उन्नति के लिए समर्पित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का विकसित हिमाचल, डॉ. परमार की दूरदृष्टि, प्रतिबद्धता और नेतृत्व का परिणाम है।
श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के कलाकारों ने भक्ति गीत प्रस्तुत कर वातावरण को श्रद्धामय बना दिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और गणमान्य नागरिकों ने भाग लेकर डॉ. परमार को श्रद्धासुमन अर्पित किए।
इस अवसर पर राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी, शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर, तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष विनय कुमार, विधायक मोहन लाल ब्राक्टा, हरीश जनारथा, रणजीत सिंह राणा एवं विवेक शर्मा सहित कई जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। इसके अलावा प्रदेश वन विकास निगम के उपाध्यक्ष केहर सिंह खाची, हिमुडा के उपाध्यक्ष यशवंत छाजटा, हिमाचल प्रदेश सहकारी बैंक के अध्यक्ष देवेंद्र श्याम, शिमला के महापौर सुरेंद्र चौहान, उपमहापौर उमा कौशल, पार्षदगण, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी तथा अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया और डॉ. परमार के योगदान को स्मरण किया।
डॉ. यशवंत सिंह परमार को हिमाचल प्रदेश के निर्माण और विकास का शिल्पकार माना जाता है। उनके नेतृत्व में प्रदेश ने विकास की नई दिशा प्राप्त की और प्रशासनिक एवं सामाजिक ढांचे को मजबूत आधार मिला। उनकी जयंती पर आयोजित यह कार्यक्रम उनके आदर्शों और योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण अवसर बना।




