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नई दिल्ली: कैंसर मौतों को रोकने में प्रभावी हो सकती है पंचवर्षीय योजना : AIIMS 

नई दिल्ली: -पंचवर्षीय योजना से कैंसर मृत्युदर कम करने में जापान- कोरिया -सिंगापुर को मिली सफलता

नई दिल्ली, 25 जुलाई : अगर हम एशिया के प्रभावशाली मॉडल का प्रयोग करें तो देश में कैंसर के चलते जान गंवाने वाले मरीजों की संख्या में कमी लाई जा सकती है। यह दावा एम्स दिल्ली के भीम राव अंबेडकर – इंस्टीटूट रोटरी कैंसर हॉस्पिटल (बीआरए-आईआरसीएच) के डॉ. अभिषेक शंकर ने शुक्रवार को एक अध्ययन के हवाले से किया।

डॉ. शंकर ने कहा, देश में प्रतिवर्ष करीब 14.25 लाख लोग कैंसर से ग्रस्त हो जाते हैं और इनमें से करीब 9.16 लाख मरीज अपनी बेशकीमती जान गंवा देते हैं। इससे जहां मृतकों के परिवार को आर्थिक, भावनात्मक और मानसिक आघात पहुंचता है। वहीं, असमय होने वाली मौतों के चलते देश की अर्थव्यवस्था को भी नुकसान पहुंचता है। कैंसर नियंत्रण और इलाज को लेकर एम्स दिल्ली के 5 विशेषज्ञों ने एशिया के 21 देशों की स्वास्थ्य सेवाओं का अध्ययन किया है।

अध्ययन में सामने आया कि जापान, कोरिया और सिंगापुर में कैंसर डिटेक्शन के लिए व्यापक अभियान चलाया जाता है। जो पंचवर्षीय योजना के तहत देशभर में लागू है। वहां बड़े पैमाने पर कैंसर स्क्रीनिंग और डायग्नोसिस टेस्ट किए जाते हैं जिससे कैंसर जल्दी पकड़ में आ जाता है। यानि कैंसर की पहचान प्रथम चरण में ही हो जाती है। कैंसर मरीजों को सर्जरी, रेडिएशन, कीमोथेरेपी, लक्षित चिकित्सा और इम्यूनोथेरेपी के अलावा हार्मोन थेरेपी, स्टेम सेल प्रत्यारोपण और अन्य उपचार दिए जाते हैं। नतीजा मृत्यु दर में व्यापक कमी के रूप में सामने आता है।

डॉ. शंकर ने कहा, अगर जापान- कोरिया -सिंगापुर का पंचवर्षीय मॉडल भारत में भी लागू किया जा सके तो हम कैंसर के कारण होने वाली मौतों में कमी ला सकते हैं। इस योजना के तहत वहां कैंसर स्क्रीनिंग और डायग्नोसिस की दर 90% तक दर्ज की गई है। लेकिन भारत में अधिकांश लोग कैंसर स्क्रीनिंग टेस्ट या डायग्नोसिस टेस्ट कराने से कतराते हैं। यहां जब कैंसर गंभीर स्तर तक पहुंच जाता है तब पकड़ में आता है लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।

स्क्रीनिंग और डायग्नोस्टिक में अंतर ?
स्क्रीनिंग टेस्ट और डायग्नोस्टिक टेस्ट दोनों ही चिकित्सा परीक्षण हैं, लेकिन उनका उद्देश्य अलग-अलग होता है। स्क्रीनिंग टेस्ट का मुख्य उद्देश्य बीमारी का जल्द पता लगाना है, खासकर उन लोगों में जिनमें अभी तक कोई लक्षण नहीं दिख रहे हैं। वहीं, डायग्नोस्टिक टेस्ट का उपयोग किसी बीमारी की पुष्टि करने या उसे खारिज करने के लिए किया जाता है, खासकर तब जब किसी व्यक्ति में लक्षण मौजूद हों या स्क्रीनिंग टेस्ट में कुछ असामान्य पाया गया हो।

भारत में कैंसर की स्थिति ?
भारत में कई प्रकार के कैंसर पाए जाते हैं, जिनमें स्तन कैंसर, गर्भाशय ग्रीवा कैंसर, मुंह का कैंसर, फेफड़ों का कैंसर, पेट का कैंसर और कोलोरेक्टल कैंसर प्रमुख हैं। इसके अलावा ओवेरियन कैंसर, थायराइड कैंसर, अग्नाशय कैंसर, पित्ताशय कैंसर और प्रोस्टेट कैंसर भी भारत में पाए जाते हैं। इनकी वजह से देश में प्रतिवर्ष 14.25 लाख लोग कैंसर पीड़ित हो जाते हैं और 9.16 लाख पीड़ित अपनी जान गंवा देते हैं।

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