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Mental Health Awareness: बुजुर्गों में मानसिक रोग तेजी से बढ़ रहे, इलाज में न करें संकोच

Mental Health Awareness: बुजुर्गों में मानसिक रोग तेजी से बढ़ रहे, इलाज में न करें संकोच

नई दिल्ली। देश में बुजुर्गों में मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएँ तेजी से बढ़ रही हैं। हालिया आंकड़ों के अनुसार, मानसिक विकार से पीड़ित बुजुर्गों की आबादी बढ़कर 6% से 10% हो गई है। विशेषज्ञों के मुताबिक, हर तीन में से एक बुजुर्ग मानसिक स्वास्थ्य की किसी न किसी समस्या से जूझ रहा है।

एम्स दिल्ली के मनोचिकित्सा विभाग के प्रोफेसर राजेश सागर ने जेएलएन सभागार में आयोजित जेरी-साइक कांफ्रेंस में बताया कि भारत में बुजुर्गों की आबादी 2036 तक लगभग 23 करोड़ तक पहुंच जाएगी, जो कुल जनसंख्या का लगभग 15% होगी। यानी हर सात में से एक भारतीय 60 वर्ष या उससे अधिक आयु का होगा। इस वृद्धि के पीछे जीवन प्रत्याशा में इजाफा, जीवनशैली और रहन-सहन में बदलाव जैसे कारक हैं। उम्र बढ़ने, आर्थिक रूप से कमजोर होना और दूसरों पर निर्भर रहना भी बुजुर्गों की मानसिक सेहत को प्रभावित कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि देश के लगभग 75% बुजुर्ग पुरानी बीमारियों से जूझ रहे हैं, और हर तीन में से एक बुजुर्ग मानसिक स्वास्थ्य की समस्या से पीड़ित है। लगभग 25% बुजुर्ग दैनिक कामकाज जैसे खाना, नहाना और घर से बाहर निकलने में कठिनाई महसूस करते हैं। कई बुजुर्ग महसूस करते हैं कि वे आत्मनिर्भर नहीं रह पाए और हर काम के लिए दूसरों पर आश्रित हैं। उन्हें नजरअंदाज किए जाने या बुरे बर्ताव का सामना करना पड़ता है। डिप्रेशन बुजुर्गों में आम लोगों की तुलना में लगभग दस गुना ज्यादा पाया जाता है, जिसके पीछे अकेलापन सबसे बड़ी वजह है। बच्चों के दूसरे शहरों या विदेश जाने के कारण कई बुजुर्ग अकेलेपन से silently जूझते हैं।

क्या करें?
बुजुर्गों का सम्मान करें। उन्हें महत्व दें और उनके साथ समय बिताएं। उनके अनुभव, जीवन और योगदान की कदर करें। उनके साथ बैठें, बात करें और भावनात्मक सहारा दें। इससे उनका तनाव कम होगा और मानसिक स्वास्थ्य बेहतर रहेगा। दुर्व्यवहार से बचें और उन्हें परिवार एवं समाज का महत्वपूर्ण अंग समझें।

लक्षण पहचानें और समय पर इलाज शुरू करें
अगर घर का बुजुर्ग अचानक उदास रहने लगे, चुप रहें, बात करने से कतराए, व्यवहार में चिड़चिड़ापन दिखाए, अपने आप से बातें करने लगे, मूड अचानक बदलने लगे, बिना वजह गुस्सा करे या दूसरों पर शक करने लगे, तो यह मानसिक स्वास्थ्य में समस्या का संकेत है। ऐसी स्थिति में तुरंत मनोचिकित्सक से परामर्श लें और इलाज शुरू करें।

बुजुर्गों की मानसिक सेहत पर ध्यान देना न केवल उनके जीवन की गुणवत्ता बढ़ाता है, बल्कि समाज में उनके सम्मान और भूमिका को भी मजबूत करता है।

ममूटी ने कहा कि उन्हें ‘मेगास्टार’ की उपाधि पसंद नहीं है, उन्हें लगता है कि उनके जाने के बाद लोग उन्हें याद नहीं रखेंगे

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