Dr. Abhijat Seth ‘आयातित AI भारत की जरूरत पूरी नहीं करेगा’: डॉ. अभिजात सेठ ने India-specific AI पर दिया जोर
नई दिल्ली, 19 अगस्त: भारतीय चिकित्सा शिक्षा के सामने अब केवल मेडिकल कॉलेजों और सीटों की संख्या बढ़ाने की चुनौती नहीं है, बल्कि गुणवत्तापूर्ण डॉक्टर तैयार करने, सिमुलेशन आधारित प्रशिक्षण को मजबूत करने और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जिम्मेदार इस्तेमाल के लिए शिक्षा व्यवस्था को तैयार करने की जरूरत है। यह बात बुधवार को आयोजित दूसरे ICC मेडिकल एजुकेशन फोरम में सामने आई।
इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स (ICC) ने मेडिकल स्टूडेंट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (MSAI) के सहयोग से फोरम का आयोजन किया। कार्यक्रम में चिकित्सा शिक्षा नियामकों, नर्सिंग नेतृत्व, शिक्षकों और छात्रों ने मेडिकल शिक्षा में सुधार, क्लिनिकल ट्रेनिंग, सिमुलेशन, Competency-Based Medical Education (CBME) और AI पर चर्चा की।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के चेयरपर्सन डॉ. अभिजात चंद्रकांत सेठ ने कहा कि देश में 820 से अधिक मेडिकल कॉलेज हो चुके हैं और अब ध्यान संख्या बढ़ाने के बजाय गुणवत्ता सुधारने पर होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सफलता का आकलन इस बात से नहीं होना चाहिए कि कितने डॉक्टर तैयार किए जा रहे हैं, बल्कि यह देखा जाना चाहिए कि वे किस प्रकार के डॉक्टर बन रहे हैं और समाज की सेवा के लिए कितने सक्षम हैं।
AI पर बोलते हुए डॉ. सेठ ने कहा कि आधुनिक मेडिकल शिक्षा का उद्देश्य छात्रों को केवल AI का इस्तेमाल सिखाना नहीं, बल्कि उसकी कार्यप्रणाली और सीमाओं को समझाना भी होना चाहिए। उन्होंने कहा कि AI पेशेवर जिम्मेदारी और जवाबदेही की जगह नहीं ले सकता और मरीज के इलाज से जुड़े फैसलों के लिए डॉक्टर ही जिम्मेदार रहेगा।
उन्होंने NBEMS के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 2026 में करीब 50,000 डॉक्टर संरचित ऑनलाइन AI प्रशिक्षण पूरा कर चुके हैं। वहीं, 2023 में NBEMS के CPR कार्यक्रम से करीब 20 लाख स्वास्थ्यकर्मी जुड़े थे।
इंडियन नर्सिंग काउंसिल के अध्यक्ष डॉ. टी. दिलीप कुमार ने सिमुलेशन आधारित नर्सिंग शिक्षा पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मरीज की सुरक्षा के लिए डॉक्टरों और नर्सों को उसी तरह प्रशिक्षण की जरूरत है, जैसे पायलटों को सिमुलेटर के माध्यम से प्रशिक्षित किया जाता है। उन्होंने बताया कि करीब 2,000 नर्सिंग फैकल्टी को सिमुलेशन प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
MSAI की अध्यक्ष डॉ. चैत्रा बी.ए. ने छात्रों की थकान और बर्नआउट का मुद्दा उठाते हुए कहा कि “थकान कोई competency नहीं है और burnout को workforce strategy नहीं बनाया जाना चाहिए।”
फोरम में यह सहमति उभरकर सामने आई कि भारत के लिए चुनौती अब मेडिकल कॉलेजों और सीटों की संख्या नहीं, बल्कि फैकल्टी प्रशिक्षण, पाठ्यक्रम की गुणवत्ता, व्यावहारिक दक्षता और AI-आधारित भविष्य के लिए डॉक्टरों को तैयार करना है।


