Gum Disease Warning: मसूढ़ों की बीमारी बढ़ा सकती है उम्र बढ़ने की रफ्तार, विशेषज्ञों ने दी चेतावनी

Gum Disease Warning: मसूढ़ों की बीमारी बढ़ा सकती है उम्र बढ़ने की रफ्तार, विशेषज्ञों ने दी चेतावनी
New Delhi के स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने मसूढ़ों की बीमारी को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। विशेषज्ञों का कहना है कि मसूढ़ों से खून आना, सांस की बदबू या दांतों में संवेदनशीलता जैसी समस्याओं को मामूली समझकर नजरअंदाज करना शरीर की सेहत पर भारी पड़ सकता है। उनका कहना है कि गम डिजीज यानी मसूढ़ों की बीमारी शरीर में लगातार सूजन पैदा कर सकती है, जिससे उम्र बढ़ने की प्रक्रिया तेज हो सकती है और हृदय, मस्तिष्क, प्रतिरक्षा तंत्र तथा रक्त वाहिकाओं पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
Maulana Azad Institute of Dental Sciences के प्रोफेसर Dr. Gyanendra Kumar के अनुसार मसूढ़ों में लंबे समय तक रहने वाली सूजन शरीर में ‘इन्फ्लेमेजिंग’ नामक स्थिति को बढ़ावा देती है। उन्होंने बताया कि यह ऐसी सूजन होती है जो कम स्तर पर लगातार बनी रहती है और उम्र से जुड़ी कई बीमारियों का कारण बन सकती है। उन्होंने कहा कि मुंह शरीर का प्रवेश द्वार होता है और अगर दांतों तथा मसूढ़ों की देखभाल नहीं की जाए तो इसका असर पूरे शरीर की सेहत पर पड़ सकता है।
वहीं All India Institute of Medical Sciences के दंत चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान केंद्र की प्रोफेसर Dr. Deepika Mishra ने बताया कि मसूढ़ों की पुरानी सूजन धमनियों को नुकसान पहुंचा सकती है। इससे हृदय रोग, कमजोर प्रतिरक्षा तंत्र और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि मसूढ़ों से खून आना, लगातार बदबू रहना, दांतों का हिलना, दांतों में संवेदनशीलता और चबाने में परेशानी जैसे संकेतों को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित ब्रशिंग और फ्लॉसिंग मसूढ़ों की बीमारी को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। हालांकि यह पूरी तरह साबित नहीं हुआ है कि फ्लॉसिंग से उम्र सीधे बढ़ती है, लेकिन इससे शरीर में सूजन कम होती है और समग्र स्वास्थ्य बेहतर बना रहता है। डॉक्टरों का कहना है कि दांतों की सही सफाई से कई गंभीर बीमारियों के खतरे को कम किया जा सकता है।
दंत चिकित्सकों ने सलाह दी है कि बच्चों और वयस्कों दोनों को हर छह महीने में दंत जांच जरूर करानी चाहिए। विशेष रूप से मधुमेह, धूम्रपान या पहले से मसूढ़ों की बीमारी से पीड़ित लोगों को अधिक नियमित जांच की जरूरत हो सकती है। विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि वे दांतों और मसूढ़ों की देखभाल को अपनी दैनिक दिनचर्या का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाएं ताकि लंबे समय तक स्वस्थ जीवन जी सकें।





