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Haryana: दादा लख्मीचंद हरियाणा की आत्मा और हमारी लोक संस्कृति के अमर स्वर :- मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी

Haryana: दादा लख्मीचंद हरियाणा की आत्मा और हमारी लोक संस्कृति के अमर स्वर :- मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी

रिपोर्ट: कोमल रमोला

चंडीगढ़ , 23 जुलाई। मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि सूर्य कवि पंडित दादा लख्मी चंद केवल एक कवि नहीं थे, बल्कि हरियाणा की आत्मा, लोक संस्कृति के प्रहरी और जन-जन के शिक्षक थे। उन्होंने अपनी रागनियों और सांगों के माध्यम से सत्य, त्याग, धर्म, निष्ठा और मानवीय मूल्यों को समाज तक पहुंचाया। दादा लख्मी चंद ने केवल मनोरंजन नहीं किया, बल्कि पीढिय़ों का चरित्र निर्माण किया और लोक संस्कृति को नई पहचान दिलाई।

श्री नायब सिंह सैनी रोहतक में दादा लख्मी चंद राज्य प्रदर्शन एवं दृश्य कला विश्वविद्यालय के केंद्रीय सभागार में विश्वविद्यालय तथा हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, पंचकूला के संयुक्त तत्वावधान में सूर्यकवि दादा लख्मी चंद जी की जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित साहित्यकार सम्मान समारोह में बतौर मुख्यातिथि संबोधित कर रहे थे। इससे पूर्व उन्होंने दादा लख्मी चंद की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर नमन किया, विश्वविद्यालय परिसर में पौधारोपण किया तथा विद्यार्थियों द्वारा लगाई गई भव्य प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इसके उपरांत मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम का दीप प्रज्ज्वलन से विधिवत शुभारंभ किया। उन्होंने विभिन्न भाषाओं के साहित्यकारों, कवियों व कलाकारों को विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित किया।

मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि किसी भी समाज की पहचान उसकी ऊंची इमारतों या आर्थिक प्रगति से नहीं, बल्कि उसकी भाषा, साहित्य, संस्कृति और कलाकारों से होती है। इतिहास घटनाओं को दर्ज करता है, लेकिन साहित्य एक युग की संवेदनाओं को अमर बना देता है, जो समाज अपनी सांस्कृतिक विरासत का सम्मान करता है, वही भविष्य की मजबूत नींव रखता है। उन्होंने कहा कि आधुनिकता को अपनाना आवश्यक है, लेकिन अपनी जड़ों से जुड़े रहना उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है।

श्री नायब सिंह सैनी ने सम्मानित होने वाले साहित्यकारों, कवियों और कलाकारों को बधाई देते हुए कहा कि उनकी लेखनी केवल शब्दों का सृजन नहीं करती, बल्कि समाज की चेतना को दिशा देती है। उनकी कला केवल मनोरंजन नहीं करती, बल्कि संस्कृति को पीढ़ी-दर-पीढ़ी जीवित रखने का कार्य करती है। उन्होंने कहा कि साहित्यकारों का सम्मान वास्तव में समाज की सृजनशील चेतना का सम्मान है।

मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि राज्य सरकार हरियाणा की भाषा, साहित्य, लोक कलाओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर कार्य कर रही है। सरकार का उद्देश्य केवल कलाकारों और साहित्यकारों को सम्मानित करना नहीं, बल्कि आने वाली पीढिय़ों को अपनी सांस्कृतिक धरोहर से जोडऩा भी है। इसी सोच के तहत रोहतक स्थित विश्वविद्यालय का नाम दादा लख्मी चंद राज्य प्रदर्शन एवं दृश्य कला विश्वविद्यालय रखा गया है। यह केवल नामकरण नहीं, बल्कि हरियाणा की सांस्कृतिक चेतना को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सरकार का संकल्प है।

श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी द्वारा हिंदी में विश्वविद्यालय स्तर की विभिन्न विषयों की पुस्तकों का प्रकाशन किया गया है, जिससे मातृभाषा में उच्च शिक्षा को नई गति मिल रही है। साथ ही फारसी लिपि में उपलब्ध दुर्लभ हिंदी साहित्य को देवनागरी में प्रकाशित करने का महत्वपूर्ण कार्य भी किया जा रहा है, ताकि ऐतिहासिक धरोहर नई पीढ़ी तक पहुंच सके।

मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी भाषा, साहित्य, इतिहास और संस्कृति के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। पंचकूला स्थित हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी भवन साहित्यिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का सशक्त केंद्र बन चुका है, जबकि राखीगढ़ी स्थित सप्त सिंधु हड़प्पा ज्ञान केंद्र भारत की प्राचीन सभ्यता और सांस्कृतिक विरासत को जन-जन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है।

श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि सरकार का उद्देश्य ऐसी सांस्कृतिक चेतना का निर्माण करना है, जिससे नई पीढ़ी अपनी भाषा, इतिहास, परंपराओं और राष्ट्र पर गर्व कर सके। उन्होंने विश्वास जताया कि हरियाणा अपनी समृद्ध भाषा, साहित्य और लोक संस्कृति के बल पर देश और दुनिया में नई पहचान स्थापित करेगा। उन्होंने पंडित लख्मीचंद के पौत्र विष्णु दत्त कौशिक को स्मृतिचिन्ह व शॉल भेंट कर सम्मानित किया। पंडित लख्मी चंद के प्रपौत्र चेतन कौशिक व विश्वविद्यालय के विद्यार्थी योगेश ने दादा लख्मी चंद की रचनाओं की प्रस्तुति दी।

पंडित लख्मी चंद ने अपने समय में कलयुग का किया है वर्णन-सहकारिता मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा*

प्रदेश के सहकारिता मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि पंडित लख्मी चंद ने वर्षों पूर्व वर्तमान समय की वास्तविकताओं का अपनी रचनाओं में वर्णन किया है। उन्होंने अपने समय में कलयुग के बारे में भी वर्णन किया। उन्होंने इस अवसर पर हरियाणवीं संस्कृति में सामण और फाल्गुन महीनों में गाये जाने वाले गीतों को भी गुनगुनाया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी हमेशा साहित्यकारों, कवियों व कलाकारों को आगे बढ़ाने का कार्य कर रहे है। केंद्रीय ऊर्जा मंत्री व प्रदेश के पूर्व मंत्री मनोहर लाल ने इस विश्वविद्यालय का नाम सूर्य कवि पंडित लख्मी चंद के नाम पर रखा तथा भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रो. राम बिलास शर्मा ने भी इस संदर्भ में उल्लेखनीय योगदान दिया है।

डीएलसी सुपवा के कुलगुरु अमित आर्य ने मुख्यातिथि व अन्य अतिथिगण का स्मृतिचिन्ह भेंट कर किया सम्मान

डीएलसी सुपवा के कुलगुरु डॉ. अमित आर्य ने मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी को शॉल, स्मृतिचिन्ह तथा चित्र भेंट कर सम्मानित किया। उन्होंने समारोह के अन्य अतिथिगण को भी शॉल व स्मृतिचिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि सम्मान समारोह में हिंदी व हरियाणवीं भाषा साहित्यकार अभिनंदन योजना, संस्कृत भाषा साहित्यकार अभिनंदन योजना, पंजाबी साहित्यकार अभिनंदन योजना, उर्दू साहित्यकार अभिनंदन योजना के तहत साहित्यकारों, कलाकारों व कवियों को सम्मानित किया गया।
विश्वविद्यालय की कुलसचिव डॉ. गुंजन मलिक मनोचा ने मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी तथा कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि गण व साहित्यकारों का स्वागत किया तथा मुख्यमंत्री के जीवन परिचय पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. अमित आर्य विश्वविद्यालय को उन्नति के शिखर की और अग्रसर कर रहे है। कार्यक्रम के शुभारंभ में राष्ट्रीय गीत की प्रस्तुति दी गई। विश्वविद्यालय का कुलगीत भी प्रस्तुत किया गया तथा कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।

कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी सीताराम व्यास,पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर, रोहतक के मेयर राम अवतार वाल्मीकि, हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के अध्यक्ष प्रो. कुलदीप चंद्र अग्निहोत्री, मुख्यमंत्री के ओएसडी वीरेंद्र बढख़ालसा, मुख्यमंत्री के मीडिया सचिव प्रवीण आत्रेय सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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