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Cancer Drug Racket: सामान्य तापमान पर रखी थीं ढाई करोड़ की जीवनरक्षक दवाएं, जांच में खुली बड़ी लापरवाही

Cancer Drug Racket: सामान्य तापमान पर रखी थीं ढाई करोड़ की जीवनरक्षक दवाएं, जांच में खुली बड़ी लापरवाही

नोएडा। सेक्टर-76 स्थित आम्रपाली प्रिंसले एस्टेट सोसायटी के एक फ्लैट से करीब ढाई करोड़ रुपये की जीवनरक्षक और जैविक दवाओं की बरामदगी के मामले में जांच के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। अधिकारियों ने पाया कि जिन दवाओं को दो से आठ डिग्री सेल्सियस के बीच सुरक्षित रखना अनिवार्य होता है, उन्हें सामान्य कमरे के तापमान पर रखा गया था। इससे इन दवाओं की गुणवत्ता और प्रभावशीलता प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। जांच में कई दवाओं पर “सरकारी आपूर्ति, बिक्री के लिए नहीं” भी अंकित मिला है, जिससे सरकारी दवाओं की कालाबाजारी की आशंका और गहरा गई है।

औषधि निरीक्षक जयसिंह ने बताया कि अंतरराज्यीय प्रकोष्ठ, अपराध शाखा चाणक्यपुरी से मिली सूचना के आधार पर सीडीएससीओ उत्तर जोन, गाजियाबाद, दिल्ली अपराध शाखा और जिला औषधि विभाग की संयुक्त टीम ने सेक्टर-76 स्थित आम्रपाली प्रिंसले एस्टेट सोसायटी के फ्लैट पर छापेमारी की थी। कार्रवाई के दौरान फ्लैट में मौजूद आनंद कुमार, बसंत लाल वर्णवाल और प्रीति से पूछताछ की गई।

जांच में सामने आया कि फ्लैट का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर तैयार औषधियों के अवैध भंडारण के लिए किया जा रहा था। मौके से गोलियां, कैप्सूल, इंजेक्शन, टीके, ह्यूमन एल्ब्यूमिन, इम्युनोग्लोबुलिन, रेबीज वैक्सीन, सर्पदंश एंटीसीरम आईपी समेत कई महंगी और उच्च मूल्य की जैविक दवाएं बरामद हुईं। इनमें से कई दवाएं निर्धारित तापमान के बजाय सामान्य कमरे के तापमान पर रखी गई थीं।

अधिकारियों के अनुसार जैविक दवाओं के लिए कोल्ड चेन बनाए रखना बेहद आवश्यक होता है। यदि इन्हें तय तापमान से अधिक गर्मी में रखा जाए तो उनकी गुणवत्ता खराब हो सकती है और मरीजों के इलाज पर गंभीर असर पड़ सकता है। बरामद दवाओं का कुल मूल्य एमआरपी के आधार पर 2 करोड़ 48 लाख 66 हजार 658 रुपये आंका गया है।

जांच के लिए आठ दवा उत्पादों के नमूने औषधि निरीक्षक ने एकत्र किए हैं, जबकि आयातित दवाओं के नमूने सीडीएससीओ उत्तर जोन अलग से जांच के लिए लेगा। कार्रवाई के दौरान आनंद कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि अन्य संदिग्धों से पूछताछ जारी है। जब्त दवाओं और अन्य सामग्री को कब्जे में लेकर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि दवाएं किन स्रोतों से लाई जा रही थीं और किन-किन राज्यों में उनकी आपूर्ति की जा रही थी। पूरे नेटवर्क का खुलासा करने के लिए जांच का दायरा उत्तर प्रदेश और दिल्ली से आगे बढ़ाकर अन्य राज्यों तक विस्तारित किया गया है। मामले की तह तक पहुंचने के लिए एक टीम हैदराबाद भी भेजी गई है, जहां से कुछ महत्वपूर्ण सुराग मिलने की उम्मीद है।

औषधि विभाग का कहना है कि यदि जांच में सरकारी दवाओं की कालाबाजारी, सप्लाई में हेराफेरी या अन्य अनियमितताओं की पुष्टि होती है तो संबंधित आरोपियों के खिलाफ ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट समेत अन्य प्रासंगिक धाराओं में सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही विभिन्न राज्यों की एजेंसियों के सहयोग से पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए जांच लगातार जारी रहेगी।

प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि कैंसर और बायोलॉजिकल दवाओं की तस्करी कई स्तरों पर फैले नेटवर्क के जरिए संचालित की जाती है। इसमें अस्पतालों, गोदामों और सप्लाई चेन से जुड़े कुछ लोग मिलकर सरकारी या सब्सिडी वाली दवाओं को बीच में ही निकाल लेते हैं। कई मामलों में फर्जी बिलिंग, फर्जी मरीजों के नाम और गलत स्टॉक एंट्री का सहारा लिया जाता है। इसके बाद दवाओं को अलग-अलग शहरों में छोटे-छोटे स्टॉक के रूप में रखा जाता है ताकि आसानी से पकड़ में न आएं। जांच एजेंसियों को यह भी संदेह है कि खरीदारों तक पहुंचने के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और व्हाट्सऐप ग्रुप का भी इस्तेमाल किया जा रहा था।

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