भूपेंद्र सिंह हुड्डा का बड़ा इंटरव्यू: डॉ. अनिल सिंह से खास बातचीत कहा, हरियाणा में बदलाव की जरूरत, EVM पर उठाए सवाल

हरियाणा में हालिया चुनावों, EVM विवाद, शिक्षा, बेरोज़गारी और किसान आंदोलन पर भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने Top Story को दिए इंटरव्यू में रखी अपनी बेबाक राय। कांग्रेस की वापसी के लिए किया जनसमर्थन का आह्वान

 

अनिल सिंह: भूपेंद्र सिंह हुड्डा जी, Top Story में आपका स्वागत है।
भूपेंद्र हुड्डा: धन्यवाद।

अनिल सिंह: हाल ही में हरियाणा ने दो अहम चुनाव देखे—2024 का लोकसभा चुनाव और फिर विधानसभा चुनाव। आप वर्तमानराजनीतिक हालात और जनता के मूड को कैसे आंकते हैं?

भूपेंद्र हुड्डा: देखिए, लोकसभा चुनाव में हमारी स्थिति में ज़बरदस्त सुधार हुआ। पिछली बार एक भी सीट नहीं मिली थी, लेकिन इस बार 10 में से 5 सीटें जीतीं और पूरे हरियाणा में कांग्रेस का वोट प्रतिशत सबसे ज़्यादा—लगभग 48% रहा। विधानसभा चुनाव में भी हमारा प्रदर्शन बेहतर हुआ, वोट शेयर में लगभग 12% की बढ़ोतरी हुई। जनता ने बदलाव का संकेत दिया, लेकिन सीटों की गणना में यह समर्थन सही ढंग से परिलक्षित नहीं हो पाया।

अनिल सिंह: लेकिन कांग्रेस सीटों की संख्या में पीछे रह गई?

भूपेंद्र हुड्डा: बीजेपी और कांग्रेस के वोट शेयर में केवल 0.5% का अंतर था—बीजेपी को लगभग 39.9% और कांग्रेस को 39.45% वोट मिले। इतने छोटे अंतर में भी सीटों का इतना बड़ा फासला बना, यह चुनावी व्यवस्था में बदलाव की मांग करता है।

अनिल सिंह: कहा जा रहा है कि हरियाणा में जो पार्टी पोस्टल बैलट में आगे रहती है, वही सरकार बनाती है। क्या इस बार वह ट्रेंड टूटा?

भूपेंद्र हुड्डा: जी नहीं, इस बार भी हम पोस्टल बैलट में 90 में से 76 सीटों पर आगे रहे। लेकिन EVM में नतीजे एकदम अलग दिखे। हमने चुनाव आयोग से इस असमानता पर आपत्ति दर्ज कराई है। बीते पाँच चुनावों में जो ट्रेंड था, वह पहली बार संदिग्ध तरीके से टूटा।

अनिल सिंह: क्या आप मानते हैं कि देश में फिर से बैलेट पेपर से वोटिंग होनी चाहिए?

भूपेंद्र हुड्डा: हां, बिल्कुल। आज भी जर्मनी, नीदरलैंड जैसे विकसित देश इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग नहीं करते। भारत में भी जनता का विश्वास बहाल करने के लिए बैलेट पेपर पर वापसी ज़रूरी है।

अनिल सिंह: हरियाणा कांग्रेस अध्यक्ष को लेकर क्या स्थिति है? क्या CLP और PCC में तालमेल है?

भूपेंद्र हुड्डा: जो अध्यक्ष तीन साल पहले नियुक्त हुए थे, वही अब तक कार्यरत हैं। तालमेल है, लेकिन और मजबूत समन्वय तथा जमीनी स्तर पर संगठन को सक्रिय करने की आवश्यकता है। जनसमर्थन हमारे पक्ष में है, हमें केवल उसे एकजुट करना है।

अनिल सिंह: हाल ही में हरियाणा बोर्ड के परीक्षा परिणाम आए, कई स्कूलों में एक भी छात्र पास नहीं हो पाया। क्या यह शिक्षा व्यवस्था के पतन का संकेत है?

भूपेंद्र हुड्डा: बिल्कुल। भाजपा सरकार के 11 सालों में हज़ारों स्कूल बंद हो गए हैं। सरकारी स्कूलों की हालत इतनी खराब है कि कई जगह बच्चों को गोदामों में पढ़ाया जा रहा है। न तो आधारभूत ढांचा है, न ही पर्याप्त शिक्षक नियुक्त हो रहे हैं।

अनिल सिंह: हरियाणा जो कभी प्रति व्यक्ति आय में देश में पहले स्थान पर था, अब निवेश के मामले में पिछड़ रहा है। क्यों?

भूपेंद्र हुड्डा: 2005 से 2014 तक हरियाणा देश में प्रति व्यक्ति निवेश और आय में नंबर एक था। आज स्थिति ये है कि 2 लाख सरकारी पद खाली हैं और हरियाणा बेरोज़गारी में पहले नंबर पर है। न उद्योग हैं, न योजनाएं—निवेशक भी अब दक्षिण भारत या उत्तर प्रदेश की ओर रुख कर रहे हैं।

अनिल सिंह:अगले विधानसभा चुनाव में क्या आप उतनी ही सक्रिय भूमिका में रहेंगे?

भूपेंद्र हुड्डा: मैं हमेशा पार्टी के साथ सक्रिय रहा हूं। नेतृत्व किसी व्यक्ति की निजी चाहत नहीं होता, यह सामूहिक जिम्मेदारी होती है। पार्टी जो जिम्मेदारी देगी, मैं उसे पूरी निष्ठा से निभाऊंगा।

अनिल सिंह: क्या मौजूदा भाजपा सरकार स्थिर है? विशेष रूप से जब भाजपा-जजपा गठबंधन में दरारें साफ़ नज़र आ रही हैं?

भूपेंद्र हुड्डा: यह सरकार नाम मात्र की है। भाजपा-जजपा का गठबंधन सिर्फ सत्ता की मजबूरी थी, आज वह बिखर चुका है। कोई ठोस योजना नहीं है, न कोई बड़ा संस्थान, न बिजली उत्पादन, न रेलवे परियोजनाएं, और न ही रोज़गार के अवसर।

अनिल सिंह: यदि कांग्रेस सत्ता में आती है, तो क्या आप वैकल्पिक नीति, रोज़गार और कानून व्यवस्था को दुरुस्त करने की स्थिति में हैं?

भूपेंद्र हुड्डा: 2005 में जब हमारी सरकार बनी थी, तो अपराधी जेल से सरकार चला रहे थे। हमने कानून व्यवस्था मजबूत की, सरकारी पद भरे, और विदेशी निवेशक लाए। आज भी हम वैसा ही बदलाव ला सकते हैं।

अनिल सिंह: भाजपा लगातार “राष्ट्रवाद” और “विकास” के मुद्दे पर चुनाव लड़ रही है। क्या कांग्रेस इसका जवाब दे पाएगी?

भूपेंद्र हुड्डा: राष्ट्रवाद कोई चुनावी हथियार नहीं होना चाहिए। देशभक्ति तो हर नागरिक में होती है। जहां तक विकास की बात है, जमीनी सच्चाई क्या है? युवा बेरोज़गार हैं, किसान नाराज़ हैं, महंगाई चरम पर है। कांग्रेस झूठे प्रचार के बजाय आंकड़ों, योजनाओं और ज़मीनी काम से जवाब देगी।

अनिल सिंह: भाजपा का आरोप है कि आपके शासनकाल में कांग्रेस ने जाटों को प्राथमिकता दी। क्या यह सही है?

भूपेंद्र हुड्डा: यह पूरी तरह मिथक है। हमने हर जिले में यूनिवर्सिटी, कॉलेज, मेडिकल संस्थान खोले—यमुनानगर, हिसार, दादरी से लेकर मेवात तक। IIT से लेकर महिला मेडिकल कॉलेज तक हर वर्ग के लिए काम किया। यह जातिगत नहीं, समावेशी विकास था।

अनिल सिंह: क्या आपको लगता है कि कांग्रेस की उपलब्धियाँ जनता तक ठीक से पहुंच पा रही हैं?

भूपेंद्र हुड्डा: हमें 39% से ज़्यादा वोट मिले हैं—जो दर्शाता है कि जनता का भरोसा हमारे साथ है। हां, मीडिया में हमें जितना प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए, उतना नहीं मिलता। हमें अपने काम को बेहतर तरीक़े से जनता तक पहुँचाना होगा।

अनिल सिंह: हरियाणा किसान आंदोलन का केंद्र रहा है। आप इस पर क्या कहेंगे?

भूपेंद्र हुड्डा: भाजपा तीन काले कानून लेकर आई थी, जिन्हें किसानों के दबाव में वापस लेना पड़ा। उन्होंने कहा था कि 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी होगी। हकीकत यह है कि आमदनी दोगुनी नहीं हुई, लेकिन लागत ज़रूर दोगुनी हो गई। कांग्रेस सत्ता में आते ही MSP की कानूनी गारंटी लाएगी।

अनिल सिंह: अंत में, हरियाणा की जनता को आप क्या संदेश देना चाहेंगे?

भूपेंद्र हुड्डा: मेरी अपील है कि जनता भटकावे में न आए, सच्चाई और विकास की राजनीति को चुने। हरियाणा का निर्माण कांग्रेस ने किया—इंदिरा गांधी जी से लेकर हमारी सरकारों तक। अगर हरियाणा को आगे बढ़ाना है तो वह काम फिर से कांग्रेस ही कर सकती है—जो अनुभव, दृष्टि और जनविश्वास से भरी हुई है।

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