Defence Modernisation India: आत्मनिर्भर रक्षा क्षेत्र से सैन्य आधुनिकीकरण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता
नई दिल्ली, 14 अगस्त। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आत्मनिर्भर, आधुनिक और भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में सक्षम रक्षा क्षेत्र के जरिए सैन्य आधुनिकीकरण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। आकाशवाणी के माध्यम से सैनिकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ की नीतियों ने भारत की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के साथ देश को वैश्विक रक्षा विनिर्माण और रक्षा निर्यात के क्षेत्र में भी आगे बढ़ाया है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत के रक्षा उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2014 में देश का रक्षा उत्पादन करीब 46 हजार करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। उन्होंने कहा कि यह वृद्धि देश में रक्षा उपकरणों और प्रणालियों के घरेलू निर्माण की बढ़ती क्षमता को दर्शाती है।
रक्षा निर्यात के क्षेत्र में भी भारत ने तेजी से प्रगति की है। राजनाथ सिंह के अनुसार, वर्ष 2014 में जहां रक्षा निर्यात करीब 686 करोड़ रुपये था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये हो गया। वर्तमान में 145 कंपनियां 80 से अधिक देशों को रक्षा उत्पादों का निर्यात कर रही हैं। इससे भारतीय रक्षा उद्योग को अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी मौजूदगी मजबूत करने का अवसर मिला है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि सैन्य आधुनिकीकरण के लिए रक्षा बजट में भी लगातार वृद्धि की गई है। वर्ष 2013-14 में रक्षा बजट 2.53 लाख करोड़ रुपये था, जो 2026-27 में बढ़कर 7.85 लाख करोड़ रुपये हो गया है। इसके साथ ही रक्षा अनुसंधान और विकास के लिए आवंटित बजट भी बढ़ाकर 29,100 करोड़ रुपये किया गया है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति को देखते हुए अत्याधुनिक तकनीकों और स्वदेशी रक्षा प्रणालियों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। हाइपरसोनिक तकनीक के विकास और परीक्षण, अग्नि मिसाइल, पिनाका, रुद्र-2, एलआरएलएसीएम तथा स्वदेशी ‘कुशा’ वायु रक्षा प्रणाली जैसे कार्यक्रमों को उन्होंने देश की सैन्य क्षमता में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी के रूप में रेखांकित किया।
रक्षा मंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भरता का उद्देश्य केवल विदेशों से रक्षा उपकरणों की खरीद कम करना नहीं है, बल्कि देश में ऐसी तकनीकी और औद्योगिक क्षमता विकसित करना है जिससे भारत अपनी सुरक्षा जरूरतों के लिए अत्याधुनिक प्रणालियां खुद तैयार कर सके। इससे सैन्य जरूरतों के लिए विदेशी आपूर्ति पर निर्भरता कम करने के साथ देश में रोजगार और तकनीकी विशेषज्ञता को भी बढ़ावा मिलता है।
उन्होंने सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण को भी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल बताया। रक्षा क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भूमिका का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सशस्त्र बलों में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है और वे विभिन्न महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में योगदान दे रही हैं।
राजनाथ सिंह ने कहा कि मजबूत रक्षा उत्पादन क्षमता और आधुनिक सैन्य तकनीक भारत की सुरक्षा को नई मजबूती प्रदान कर रही है। सरकार का लक्ष्य ऐसा रक्षा क्षेत्र विकसित करना है जो न केवल वर्तमान सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर सके, बल्कि भविष्य में उभरने वाली तकनीकी और रणनीतिक चुनौतियों के लिए भी तैयार रहे।

