Medical Research: केंद्रीय अस्पतालों के डॉक्टर करेंगे बड़े शोध, सरकार देगी हर साल करोड़ों की सहायता

Medical Research: केंद्रीय अस्पतालों के डॉक्टर करेंगे बड़े शोध, सरकार देगी हर साल करोड़ों की सहायता
देश में चिकित्सा अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। स्वास्थ्य मंत्रालय दिल्ली के चार प्रमुख केंद्रीय अस्पतालों में शोध गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए अगले तीन वर्षों तक हर साल दो-दो करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराएगा। इस फंडिंग का उद्देश्य नई बीमारियों, आधुनिक उपचार तकनीकों और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार से जुड़े शोध को प्रोत्साहित करना है।
सरकार की इस पहल से डॉक्टरों को अपने अनुभव और अस्पतालों में उपलब्ध मरीजों के बड़े डेटा के आधार पर नए शोध करने का अवसर मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इन शोधों से भविष्य में मरीजों को अधिक प्रभावी, सुरक्षित और आधुनिक उपचार उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
इस योजना के तहत दिल्ली के चार प्रमुख केंद्रीय अस्पतालों को शामिल किया गया है। इनमें एलएचएमसी से संबद्ध सुचेता कृपलानी अस्पताल और कलावती सरण बाल चिकित्सालय, वीएमएमसी से संबद्ध सफदरजंग अस्पताल तथा एबीवीआईएमएस से संबद्ध डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल शामिल हैं।
शोध गतिविधियों की शुरुआत एलएचएमसी ने कर दी है। संस्थान की निदेशक डॉ. सरिता बेरी ने बताया कि अस्पताल ने अपने डॉक्टरों से शोध प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं। विशेषज्ञ समिति द्वारा चुनी गई परियोजनाओं को भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के माध्यम से वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
इस फंडिंग के जरिए ऐसे शोधों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिनका सीधा लाभ आम जनता के स्वास्थ्य से जुड़ा हो। डॉक्टर नई उपचार पद्धतियों, बीमारियों की रोकथाम, बेहतर जांच तकनीक और मरीजों की देखभाल से जुड़े विषयों पर अध्ययन कर सकेंगे।
किसी भी शोध परियोजना को वित्तीय सहायता मिलने से पहले उसे कई वैज्ञानिक मानकों से गुजरना होगा। शोध का विषय नया और उपयोगी होना चाहिए तथा उससे बीमारी की पहचान, रोकथाम या उपचार में सुधार की संभावना होनी चाहिए। इसके अलावा प्रत्येक परियोजना के लिए अस्पताल की एथिक्स कमेटी से मंजूरी लेना भी अनिवार्य होगा।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार अस्पतालों में होने वाले शोध का फायदा केवल वैज्ञानिक समुदाय तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका सीधा लाभ मरीजों को मिलता है। शोध के आधार पर नई दवाओं, आधुनिक जांच तकनीकों, बेहतर सर्जिकल प्रक्रियाओं और गंभीर बीमारियों की जल्द पहचान के लिए नए समाधान विकसित किए जा सकते हैं।
अब तक दिल्ली में चिकित्सा शोध के क्षेत्र में एम्स की प्रमुख भूमिका रही है। नई फंडिंग व्यवस्था के बाद अन्य केंद्रीय अस्पतालों के डॉक्टरों को भी बड़े स्तर पर शोध करने का अवसर मिलेगा। इससे देश में चिकित्सा नवाचार को बढ़ावा मिलेगा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार आने की उम्मीद है।
सरकार का लक्ष्य है कि केंद्रीय अस्पतालों में होने वाले शोध को मरीजों की वास्तविक जरूरतों से जोड़ा जाए। इससे अस्पतालों में उपचार की नई तकनीकों का विकास होगा और देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलेगी।





