Delhi Building Collapse: रोहिणी में 30 साल पुराना जर्जर मकान भरभराकर गिरा, समय रहते टला बड़ा हादसा रिपोर्ट: तीर्थांकर सरकार

Delhi Building Collapse: रोहिणी में 30 साल पुराना जर्जर मकान भरभराकर गिरा, समय रहते टला बड़ा हादसा
रिपोर्ट: तीर्थांकर सरकार
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के रोहिणी सेक्टर-7 स्थित साईं बाबा मंदिर के पास मंगलवार को उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया जब सड़क किनारे स्थित करीब 30 साल पुराना एक जर्जर मकान अचानक क्षतिग्रस्त होकर गिरने लगा। घटना के दौरान मकान के पिलर कमजोर होकर टूट गए और इमारत का छज्जा भरभराकर नीचे आ गिरा। गनीमत रही कि समय रहते लोग वहां से दूर हट गए, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई और एक बड़ा हादसा टल गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मकान काफी समय से जर्जर अवस्था में था। स्थानीय लोगों का कहना है कि भवन की दीवारों और पिलरों में पहले से ही दरारें दिखाई दे रही थीं। मंगलवार को अचानक इमारत के कुछ हिस्से टूटने लगे, जिसके बाद आसपास मौजूद लोगों में दहशत फैल गई। कुछ ही देर में मकान का बाहरी हिस्सा और छज्जा नीचे गिर गया, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया।
घटना के समय सड़क पर लोगों की आवाजाही जारी थी। जैसे ही मकान से मलबा गिरना शुरू हुआ, स्थानीय लोगों ने तुरंत आसपास मौजूद लोगों को सतर्क किया और सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। लोगों की सतर्कता और समय पर मिली चेतावनी के कारण कोई व्यक्ति मलबे की चपेट में नहीं आया।
मकान के गिरने की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों को जानकारी दी गई। घटना स्थल के आसपास सुरक्षा के मद्देनजर लोगों की आवाजाही सीमित कर दी गई ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना न हो। क्षेत्र में मौजूद लोगों ने जर्जर इमारतों की समय-समय पर जांच कराने और खतरनाक भवनों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि दिल्ली के कई इलाकों में पुराने और जर्जर भवन आज भी लोगों के लिए खतरा बने हुए हैं। ऐसे भवनों की पहचान कर उन्हें या तो मरम्मत कराया जाना चाहिए या फिर सुरक्षित तरीके से हटाया जाना चाहिए ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे से बचा जा सके।
विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय तक रखरखाव न होने, भवन सामग्री के कमजोर होने और मौसम के प्रभाव के कारण पुराने भवनों की संरचना कमजोर हो जाती है। समय रहते निरीक्षण और आवश्यक मरम्मत नहीं होने पर ऐसे भवन कभी भी दुर्घटना का कारण बन सकते हैं।
रोहिणी की इस घटना ने एक बार फिर राजधानी में जर्जर इमारतों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि इस मामले में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है, लेकिन स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि घटना के समय वहां अधिक भीड़ होती तो बड़ा हादसा हो सकता था।
फिलहाल संबंधित विभाग स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और आसपास की इमारतों की सुरक्षा की भी जांच किए जाने की संभावना है। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्र में मौजूद अन्य पुराने और खस्ताहाल भवनों का सर्वे कराया जाए ताकि भविष्य में किसी अप्रिय घटना को रोका जा सके।





