Delhi Cyber Crime: म्यूल अकाउंट सप्लाई गैंग का भंडाफोड़, 10 आरोपी गिरफ्तार, साइबर ठगों को उपलब्ध कराते थे बैंक खाते

Delhi Cyber Crime: म्यूल अकाउंट सप्लाई गैंग का भंडाफोड़, 10 आरोपी गिरफ्तार, साइबर ठगों को उपलब्ध कराते थे बैंक खाते
रिपोर्ट: रवि डालमिया
पूर्वी जिला पुलिस की साइबर ईस्ट थाना टीम ने एक बड़े साइबर अपराध नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए साइबर ठगों को बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले संगठित म्यूल अकाउंट सप्लाई गैंग के 10 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 11 पीओएस मशीनें, 27 चेक बुक, 17 एटीएम कार्ड और 12 मोबाइल फोन बरामद किए हैं। पुलिस का दावा है कि यह गिरोह देशभर में सक्रिय साइबर अपराधियों को बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराकर ठगी की रकम को ठिकाने लगाने में मदद करता था।
पूर्वी जिले के डीसीपी राजीव कुमार ने बताया कि इस पूरे नेटवर्क का खुलासा केरल निवासी जिजी शाइन के साथ हुई दो लाख रुपये की साइबर ठगी की जांच के दौरान हुआ। शिकायतकर्ता के खाते से ठगी गई रकम की जांच करते हुए पुलिस को पता चला कि पैसा यस बैंक के एक ऐसे खाते में जमा किया गया था, जिसका उपयोग म्यूल अकाउंट के रूप में किया जा रहा था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर ईस्ट थाना पुलिस ने एक विशेष जांच टीम का गठन किया। टीम ने वित्तीय लेन-देन की गहन जांच, तकनीकी विश्लेषण और विभिन्न राज्यों में फील्ड वेरिफिकेशन के जरिए पूरे नेटवर्क तक पहुंच बनाई। जांच के दौरान कई बैंक खातों और संदिग्ध लेन-देन की कड़ियां सामने आईं, जिनके आधार पर पुलिस ने संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया।
पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी बेरोजगार और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को नौकरी दिलाने या अतिरिक्त आय का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे। खाते खुलवाने के बाद आरोपियों द्वारा एटीएम कार्ड, चेक बुक, मोबाइल नंबर, सिम कार्ड और इंटरनेट बैंकिंग की पूरी जानकारी अपने कब्जे में ले ली जाती थी। बाद में इन खातों को साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराया जाता था, जिनका इस्तेमाल ठगी की रकम प्राप्त करने और उसे विभिन्न खातों में ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह पीओएस मशीनों और इंटरनेट बैंकिंग के जरिए ठगी की रकम को कई खातों में घुमाकर उसकी वास्तविक पहचान छिपाने का प्रयास करता था। इस प्रक्रिया के कारण जांच एजेंसियों के लिए असली अपराधियों तक पहुंचना कठिन हो जाता था।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान विजय कुमार, प्रदीप कुमार, यतेन्द्र कुमार, मुकेश, विनेश, गुरबाज सिंह, अमन, सूरज यादव, गौरव नाहर और लक्ष्मण के रूप में हुई है। ये सभी दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के विभिन्न इलाकों के निवासी हैं और लंबे समय से इस नेटवर्क से जुड़े हुए थे।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 11 पीओएस मशीनें, 27 चेक बुक, 17 एटीएम कार्ड और 12 मोबाइल फोन बरामद किए हैं। बरामद सामग्री से संकेत मिलते हैं कि गिरोह बड़े पैमाने पर साइबर ठगों को बैंकिंग संसाधन उपलब्ध करा रहा था। पुलिस अब जब्त किए गए उपकरणों और बैंक खातों का विश्लेषण कर रही है ताकि नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा सके।
डीसीपी राजीव कुमार ने बताया कि मामले की जांच अभी जारी है और उन साइबर अपराधियों तथा लाभार्थियों की पहचान की जा रही है जिन्होंने इन बैंक खातों का इस्तेमाल कर देशभर में साइबर धोखाधड़ी की वारदातों को अंजाम दिया। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस नेटवर्क के माध्यम से कितनी रकम का लेन-देन किया गया है।
पूर्वी जिला पुलिस ने नागरिकों को आगाह करते हुए कहा है कि वे अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड, चेक बुक, ओटीपी या इंटरनेट बैंकिंग संबंधी जानकारी किसी भी व्यक्ति के साथ साझा न करें। पुलिस ने चेतावनी दी है कि किसी लालच या कमीशन के बदले अपना बैंक खाता किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग करने देना गंभीर अपराध है और इसके लिए कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
पुलिस का मानना है कि इस कार्रवाई से साइबर अपराधियों को बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराने वाले एक बड़े नेटवर्क पर चोट पहुंची है और आने वाले दिनों में जांच के दौरान कई और महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।
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