Myopia Awareness: बढ़ता स्क्रीन टाइम बच्चों की आंखों के लिए बना खतरा, एलएचएमसी ने मायोपिया को लेकर किया जागरूक

Myopia Awareness: बढ़ता स्क्रीन टाइम बच्चों की आंखों के लिए बना खतरा, एलएचएमसी ने मायोपिया को लेकर किया जागरूक
नई दिल्ली, 25 मई: मोबाइल, लैपटॉप और अन्य डिजिटल स्क्रीन पर बढ़ती निर्भरता अब बच्चों की आंखों पर गंभीर असर डाल रही है। लगातार बढ़ता स्क्रीन टाइम बच्चों में निकट दृष्टि दोष यानी मायोपिया के मामलों को तेजी से बढ़ा रहा है। इसी चिंता को लेकर Lady Hardinge Medical College के नेत्र चिकित्सा विभाग ने मरीजों, तीमारदारों और बच्चों के लिए विशेष ‘मायोपिया अवेयरनेस टॉक’ का आयोजन किया।
‘मायोपिया अवेयरनेस वीक’ के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने बच्चों और अभिभावकों को आंखों की देखभाल और स्क्रीन टाइम के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक किया। कार्यक्रम के दौरान विभाग के सीनियर रेजिडेंट्स और पीजी रेजिडेंट्स ने एक रोचक और प्रभावशाली स्किट भी प्रस्तुत की, जिसमें बताया गया कि घंटों तक मोबाइल और डिजिटल स्क्रीन देखने से बच्चों की आंखों पर कितना बुरा प्रभाव पड़ सकता है।
विशेषज्ञों ने समझाया कि लगातार स्क्रीन पर नजर टिकाए रखने से आंखों पर दबाव बढ़ता है, जिसके कारण कम उम्र में ही चश्मे का नंबर तेजी से बढ़ने लगता है। साथ ही बच्चों की आउटडोर गतिविधियां कम होने से भी मायोपिया का खतरा बढ़ रहा है। डॉक्टरों ने कहा कि बच्चों को पर्याप्त प्राकृतिक रोशनी और खुली जगह में खेलने का समय मिलना बेहद जरूरी है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता Smt. Sucheta Kriplani Hospital के चिकित्सा अधीक्षक L. H. Ghotekar ने की। उन्होंने कहा कि मायोपिया की समय रहते पहचान और सही देखभाल से बच्चों की आंखों को गंभीर नुकसान से बचाया जा सकता है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों का स्क्रीन टाइम सीमित करें और उन्हें अधिक से अधिक आउटडोर गतिविधियों में शामिल होने के लिए प्रेरित करें।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते सावधानी नहीं बरती गई तो आने वाले वर्षों में बच्चों में आंखों की समस्याएं और तेजी से बढ़ सकती हैं। इसलिए परिवारों को डिजिटल उपकरणों के उपयोग पर संतुलन बनाए रखने की जरूरत है।




