दिल्ली

EPFO: डिजिटल श्रम सुधारों से बदलेगी EPFO सेवाओं की तस्वीर, व्हाट्सएप पर मिलेगी 24×7 सुविधा

EPFO: डिजिटल श्रम सुधारों से बदलेगी EPFO सेवाओं की तस्वीर, व्हाट्सएप पर मिलेगी 24×7 सुविधा

नई दिल्ली, 19 मई : Employees’ Provident Fund Organisation और Ministry of Labour and Employment ने श्रमिकों और कर्मचारियों को तेज, पारदर्शी और तकनीक आधारित सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में बड़े डिजिटल सुधारों की शुरुआत की है। सरकार ने जहां लंबित मुकदमों के निस्तारण में रिकॉर्ड सफलता हासिल की है, वहीं अब पीएफ खाताधारकों को व्हाट्सएप आधारित 24×7 डिजिटल सेवाएं भी मिलने जा रही हैं। इसके साथ ही श्रम सुविधा 2.0 और समाधान 2.0 पोर्टल लॉन्च कर श्रम प्रशासन को पूरी तरह ऑनलाइन और फेसलेस बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है।

केंद्रीय श्रम मंत्री Mansukh Mandaviya ने बताया कि पिछले दो वर्षों में मिशन मोड अभियान चलाकर लंबित मामलों में ऐतिहासिक कमी लाई गई है। उपभोक्ता अदालतों में लंबित मामलों की संख्या 1 अप्रैल 2024 के 4,936 से घटकर 31 मार्च 2026 तक 2,646 रह गई। वहीं कुल लंबित मुकदमे 31,036 से घटकर 27,639 पर पहुंच गए हैं।

सरकार के मुताबिक 10 वर्ष से अधिक पुराने मामलों में भी करीब 45 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। ऐसे मामलों की संख्या 8,539 से घटकर 4,665 रह गई। फरवरी और मार्च 2026 में केंद्रीय औद्योगिक न्यायाधिकरणों में चलाए गए विशेष अभियान के दौरान 353 अपीलों का निस्तारण किया गया, जबकि 650 अन्य मामलों पर कार्रवाई जारी है।

ईपीएफओ अब जल्द ही व्हाट्सएप आधारित नई डिजिटल सेवा शुरू करने जा रहा है। इस सुविधा के तहत सदस्य केवल अंग्रेजी में “हैलो” लिखकर अपने पीएफ बैलेंस, पिछले पांच लेनदेन, क्लेम की स्थिति और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां अपनी स्थानीय भाषा में प्राप्त कर सकेंगे। यह सेवा 24 घंटे उपलब्ध रहेगी।

अधिकारियों के अनुसार ईपीएफओ के सत्यापित ग्रीन टिक नंबर पर संदेश भेजते ही एआई आधारित चैटबॉट यूएएन से जुड़े मोबाइल नंबर की पहचान करेगा और तुरंत जरूरी जानकारी व मार्गदर्शन उपलब्ध कराएगा। इससे लोगों को कार्यालयों के चक्कर लगाने और कॉल सेंटर पर निर्भर रहने की जरूरत कम होगी।

इसी क्रम में श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने 9 मई 2026 को श्रम सुविधा 2.0 और समाधान 2.0 पोर्टल भी लॉन्च किए हैं। चारों नए श्रम संहिताओं के अनुरूप विकसित इन पोर्टलों में सिंगल यूनिफाइड रजिस्ट्रेशन, लेबर आइडेंटिफिकेशन नंबर, ऑनलाइन लाइसेंसिंग, यूनिफाइड वार्षिक रिटर्न, सिस्टम आधारित निरीक्षण, रियल-टाइम केस ट्रैकिंग और स्वचालित शिकायत आवंटन जैसी सुविधाएं दी गई हैं।

पोर्टलों में भाषिणी आधारित बहुभाषी समर्थन और मोबाइल फ्रेंडली इंटरफेस भी जोड़ा गया है, जिससे श्रमिकों और नियोक्ताओं को डिजिटल सेवाओं तक आसान पहुंच मिल सकेगी। सरकार का कहना है कि इन पहलों से श्रम कानूनों का अनुपालन अधिक सरल होगा, शिकायतों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित होगा और मानवीय हस्तक्षेप तथा कागजी प्रक्रिया में बड़ी कमी आएगी।

सरकार का मानना है कि एआई आधारित सेवाओं और डिजिटल तकनीक के जरिए देश में पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित श्रम प्रशासन की नई व्यवस्था स्थापित की जा रही है।

Related Articles

Back to top button