
New Delhi Desk : हिमाचल प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व युवा कांग्रेस उपाध्यक्ष राजेश रॉकी ने महिला आरक्षण बिल के मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन संविधान संशोधन विधेयक संसद में दो-तिहाई बहुमत न मिलने के कारण पारित नहीं हो सका, जबकि इसके माध्यम से 2029 के चुनावों में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की बात कही जा रही थी।
राजेश रॉकी ने आरोप लगाया कि महिला आरक्षण बिल के पीछे एक सुनियोजित रणनीति थी, जिसके जरिए परिसीमन विधेयक को आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया के तहत सांसदों और विधायकों की सीटों में वृद्धि कर राजनीतिक लाभ लेने की योजना बनाई जा रही थी।
उन्होंने यह भी कहा कि महिला आरक्षण कानून 2023 में ही विपक्ष के समर्थन से पारित हो चुका था और अप्रैल 2026 से लागू भी कर दिया गया था, जिसका उद्देश्य केवल लोकसभा की 543 सीटों में आरक्षण तय करना था। इसके बावजूद भाजपा अब इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर महिला विरोधी होने का आरोप लगा रही है।
रॉकी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया संबोधन पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि महिलाओं के सम्मान की बात करने से पहले सरकार को अपने नेताओं पर लगे आरोपों पर जवाब देना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि भाजपा के कई नेताओं पर महिला उत्पीड़न से जुड़े मामले लंबित हैं, ऐसे में पार्टी का नारी सम्मान पर बोलना उचित नहीं है।
उन्होंने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को महिलाओं के अधिकारों का सच्चा संरक्षक बताते हुए कहा कि भाजपा संविधान के विरुद्ध कार्य कर विपक्ष को बदनाम करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने देश की महिलाओं से आह्वान किया कि वे अपने मताधिकार का उपयोग कर इसका जवाब दें।
राजेश रॉकी ने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण में कांग्रेस की ऐतिहासिक भूमिका रही है और देश में कई महत्वपूर्ण पदों पर महिलाओं की नियुक्ति कांग्रेस शासनकाल में ही संभव हुई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा ने महिला आरक्षण को केवल चुनावी मुद्दा बनाया और इसे लागू करने में गंभीरता नहीं दिखाई।
अंत में उन्होंने कहा कि वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में प्रधानमंत्री नैतिक आधार खो चुके हैं और उन्हें पद छोड़कर दोबारा जनादेश लेना चाहिए।





