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Noida Baby Trafficking Case: नवजात बच्ची की खरीद-फरोख्त मामले में आरोपियों को शर्तों के साथ जमानत

Noida Baby Trafficking Case: नवजात बच्ची की खरीद-फरोख्त मामले में आरोपियों को शर्तों के साथ जमानत

नोएडा: थाना बिसरख क्षेत्र के नवजीवन अस्पताल से जुड़े नवजात बच्ची की कथित खरीद-फरोख्त मामले में जिला अदालत ने मुख्य आरोपियों को शर्तों के साथ जमानत दे दी है। अदालत ने मुनीम उर्फ अरुण कुमार, गजेंद्र सिंह और रंजीत सिंह को सख्त शर्तों के तहत रिहा करने का आदेश दिया है, साथ ही उन्हें जांच में सहयोग करने और किसी भी तरह के सबूतों से छेड़छाड़ न करने के निर्देश भी दिए हैं।

यह मामला मार्च महीने में उस समय सामने आया था, जब चाइल्डलाइन 1098 पर सूचना मिली कि एक नवजात बच्ची को पैसों के बदले बेचने की कोशिश की जा रही है। सूचना मिलते ही बिसरख पुलिस, एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) और चाइल्डलाइन की संयुक्त टीम ने त्वरित कार्रवाई की। जांच के दौरान ऐस सिटी सोसाइटी के पास संदिग्ध सौदे को पकड़ा गया, जहां दो आरोपी बच्ची को लेकर पहुंचे थे और खरीदार से पैसे की मांग कर रहे थे।

पुलिस ने मौके पर पहुंचकर बच्ची को सुरक्षित अपने कब्जे में ले लिया और आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार लोगों में रंजीत सिंह और गजेंद्र सिंह शामिल थे। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया, जिसमें नवजीवन अस्पताल की संचालिका यशिका गर्ग को भी गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि अस्पताल में जन्मी बच्ची को उसकी मां की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण बेचने की योजना बनाई गई थी।

जांच में यह भी सामने आया कि अस्पताल की एक नर्स पुष्पा और उसके पति ने इस पूरे मामले में अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने व्हाट्सएप के जरिए बच्ची को गोद दिलाने के नाम पर संपर्क स्थापित कराया और संभावित खरीदारों से सौदेबाजी की। आरोप है कि बच्ची की कीमत करीब 2 लाख से 2.60 लाख रुपये के बीच तय की गई थी।

पुलिस ने इस मामले में विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की थी, जिसमें मानव तस्करी और अवैध गोद लेने से जुड़े गंभीर आरोप शामिल हैं। फिलहाल अदालत द्वारा जमानत दिए जाने के बाद भी मामले की जांच जारी है और पुलिस अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है।

 

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