
Vendor Development Program: परमाणु जरूरतों के अनुरूप सेवाएं व उत्पाद विकसित करें देसी वेंडर, स्वदेशी पर दें जोर – एमआरपीयू
नई दिल्ली/चेन्नई, 17 फरवरी : परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने और आयात पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से मद्रास रीजनल परचेज यूनिट (एमआरपीयू) ने मंगलवार को वेंडर डेवलपमेंट प्रोग्राम का आयोजन किया। परमाणु ऊर्जा विभाग की विभिन्न इकाइयों के लिए उपकरण, मशीनरी, स्पेयर पार्ट्स और तकनीकी सेवाओं की खरीद करने वाली इस इकाई ने स्थानीय उद्योगों, विशेषकर एमएसएमई को परमाणु क्षेत्र की विशिष्ट जरूरतों के अनुरूप अपने उत्पाद और सेवाएं विकसित करने का आह्वान किया।
यह कार्यक्रम Department of Atomic Energy के नोडल सेंटर, पल्लवरम, चेन्नई में आयोजित किया गया। इसे ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘विकसित भारत 2047’ विजन के अनुरूप परमाणु क्षेत्र और घरेलू उद्योगों के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आयोजन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि देश में ही उच्च गुणवत्ता वाले उपकरणों और सेवाओं का विकास हो सके, जिससे विदेशी आयात पर निर्भरता घटे और स्वदेशी विनिर्माण को प्रोत्साहन मिले।
कार्यक्रम का उद्घाटन क्षेत्रीय निदेशक डॉ. किथेरी जोसेफ ने किया। उन्होंने एमआरपीयू की उपलब्धियों, पारदर्शी और डिजिटल खरीद प्रणाली तथा गुणवत्ता मानकों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि परमाणु क्षेत्र में कार्य करने के लिए उच्च स्तरीय तकनीकी दक्षता, गुणवत्ता नियंत्रण और समयबद्ध आपूर्ति अत्यंत आवश्यक है, और भारतीय उद्योग इन मानकों को प्राप्त करने की क्षमता रखते हैं।
इस अवसर पर Indira Gandhi Centre for Atomic Research के निदेशक जी. श्रीकुमार पिल्लई ने ‘मेक इन इंडिया’ पहल के अनुरूप गुणवत्ता सुधार, डिजिटल डॉक्यूमेंटेशन, स्किल अपग्रेडेशन और तकनीकी नवाचार पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि परमाणु परियोजनाओं में उपयोग होने वाले उपकरणों के लिए सटीकता और विश्वसनीयता सर्वोच्च प्राथमिकता होती है, इसलिए उद्योगों को वैश्विक मानकों के अनुरूप अपनी क्षमता विकसित करनी होगी।
साथ ही Bhabha Atomic Research Centre से जुड़े अधिकारियों ने मजबूत, सुरक्षित और विश्वसनीय सप्लाई चेन की आवश्यकता रेखांकित की। उन्होंने बताया कि कई ऐसे उपकरण और मशीनें हैं जिन्हें वर्तमान में विदेशों से आयात किया जाता है, जबकि उचित तकनीकी सहयोग और निवेश के माध्यम से उन्हें देश में ही विकसित किया जा सकता है।
कार्यक्रम के दौरान लगभग 20 तकनीकी प्रस्तुतियों के माध्यम से उन उत्पादों और प्रणालियों की विस्तृत जानकारी साझा की गई, जिनकी परमाणु इकाइयों में आवश्यकता है। प्रतिभागियों को तकनीकी विनिर्देशों, गुणवत्ता मानकों, परीक्षण प्रक्रियाओं और पंजीकरण प्रणाली के बारे में अवगत कराया गया। विभिन्न उद्योगों और एमएसएमई प्रतिनिधियों ने वैज्ञानिक संस्थानों के साथ सहयोग, संयुक्त अनुसंधान और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की संभावनाओं पर सक्रिय चर्चा की।
एमआरपीयू ने स्पष्ट किया कि स्वदेशी वेंडरों को प्रोत्साहन देने के लिए पारदर्शी निविदा प्रक्रिया, डिजिटल प्लेटफॉर्म और समयबद्ध भुगतान व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। यह पहल न केवल परमाणु क्षेत्र की आवश्यकताओं को घरेलू स्तर पर पूरा करने में सहायक होगी, बल्कि भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी।





