
Labour Codes Implementation: भुवनेश्वर में श्रम संहिताओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर दो दिवसीय क्षेत्रीय मंथन शुरू
नई दिल्ली/भुवनेश्वर : चार नई श्रम संहिताओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर देशभर में प्रस्तावित पांच क्षेत्रीय बैठकों की श्रृंखला में चौथी बैठक मंगलवार को भुवनेश्वर में आयोजित की गई। यह दो दिवसीय क्षेत्रीय सम्मेलन श्रम सुधारों को जमीनी स्तर पर लागू करने, राज्यों के बीच समन्वय बढ़ाने और श्रमिक कल्याण योजनाओं की प्रगति की समीक्षा के उद्देश्य से आयोजित किया गया है।
Ministry of Labour and Employment द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में ईएसआईसी और ईपीएफओ से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना की भी विस्तार से समीक्षा की जा रही है। सम्मेलन का उद्घाटन ओडिशा सरकार के श्रम एवं कर्मचारी राज्य बीमा के स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री गणेश राम सिंह खुंटिया ने किया। उन्होंने कहा कि नई श्रम संहिताएं देश में श्रम सुधारों की दिशा में ऐतिहासिक कदम हैं और इनका उद्देश्य श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करते हुए उद्योगों के लिए नियमों को सरल बनाना है।
कार्यक्रम में श्रम सचिव वंदना गुरनानी सहित ओडिशा, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और अंडमान-निकोबार के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इसके अलावा Employees’ State Insurance Corporation, Employees’ Provident Fund Organisation और V.V. Giri National Labour Institute के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।
मंत्री सिंह खुंटिया ने अपने संबोधन में कहा कि ओडिशा सरकार ने श्रम संहिताओं के क्रियान्वयन के लिए प्रारूप नियम प्रकाशित कर दिए हैं और उन्हें अंतिम रूप देने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। उन्होंने जोर दिया कि श्रमिकों के हितों की रक्षा करते हुए उद्योगों को अनुकूल वातावरण प्रदान करना सरकार की प्राथमिकता है।
श्रम सचिव वंदना गुरनानी ने कहा कि नई संहिताएं श्रमिक कल्याण को सुदृढ़ करने के साथ-साथ ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देंगी। उन्होंने आईटी सिस्टम को मजबूत करने, डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से पारदर्शिता बढ़ाने और केंद्र-राज्य समन्वय को बेहतर बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
सम्मेलन में श्रम कानूनों के तहत पंजीकरण, अनुपालन प्रणाली, सामाजिक सुरक्षा कवरेज के विस्तार, शिकायत निवारण तंत्र और आईटी आधारित निगरानी प्रणाली पर विस्तृत चर्चा हुई। साथ ही यह भी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया कि श्रमिकों और नियोक्ताओं दोनों को नई संहिताओं की जानकारी और प्रशिक्षण समय पर उपलब्ध कराया जाए।
यह क्षेत्रीय मंथन श्रम सुधारों को प्रभावी ढंग से लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे श्रमिकों को बेहतर सामाजिक सुरक्षा और उद्योगों को अधिक स्पष्ट व सरल नियामक ढांचा उपलब्ध हो सकेगा।
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