JP Infratech Resolution Plan: एनसीएलटी के पूर्व सदस्य करेंगे निगरानी, सुरक्षा रियल्टी पर फंड डाइवर्जन के आरोप

JP Infratech Resolution Plan: एनसीएलटी के पूर्व सदस्य करेंगे निगरानी, सुरक्षा रियल्टी पर फंड डाइवर्जन के आरोप
नोएडा। जेपी इंफ्राटेक की लंबित परियोजनाओं को पूरा कराने के लिए चल रहे रिजोल्यूशन प्लान की निगरानी अब National Company Law Tribunal के दो पूर्व सदस्य करेंगे। दिसंबर 2024 में फ्लैट खरीदारों की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए एनसीएलटी ने यह अहम आदेश जारी किया है। इस फैसले को करीब 20 हजार से अधिक घर खरीदारों के लिए राहत के रूप में देखा जा रहा है, जो वर्षों से अपने आशियाने का इंतजार कर रहे हैं।
एनसीएलटी ने पूर्व सदस्य पीके मोहंती और डॉ. दीप्ति मुकेश को रिजोल्यूशन प्लान की प्रगति की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी है। दोनों को 2.5-2.5 लाख रुपये प्रति माह मानदेय दिया जाएगा। ये दोनों सदस्य निर्माण कार्य, वित्तीय प्रवाह और प्लान के अनुपालन की समीक्षा कर नियमित रिपोर्ट एनसीएलटी को सौंपेंगे।
खरीदारों का आरोप है कि रिजोल्यूशन प्लान के तहत को-डेवलपर के रूप में चुनी गई Suraksha Realty Private Limited ने परियोजनाओं में अपेक्षित निवेश नहीं किया और न ही निर्धारित समयसीमा में निर्माण कार्य पूरा किया। उनका कहना है कि बार-बार अनुरोध और बैठकों के बावजूद प्लान को पूरी तरह लागू नहीं किया गया, जिससे परियोजनाएं ठप पड़ी रहीं।
गौरतलब है कि Jaypee Infratech Limited के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया 2017 में शुरू हुई थी। कंपनी पर बैंकों और खरीदारों का हजारों करोड़ रुपये बकाया था। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद मार्च 2023 में एनसीएलटी ने सुरक्षा रियल्टी के रिजोल्यूशन प्लान को मंजूरी दी थी।
रिजोल्यूशन प्लान के तहत सुरक्षा रियल्टी को विशटाउन समेत जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड की अधूरी परियोजनाएं पूरी करनी थीं। कुल 20,363 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव रखा गया था। इस राशि में फ्लैट खरीदारों को घर सौंपना और किसानों के मुआवजे का भुगतान शामिल था। लेकिन खरीदारों का आरोप है कि जमीनी स्तर पर प्रगति संतोषजनक नहीं रही।
इस बीच जनवरी 2026 में Enforcement Directorate ने दिल्ली पुलिस की Economic Offences Wing में एफआईआर दर्ज कराई है। आरोप है कि सुरक्षा रियल्टी और उसके सहयोगी लक्षदीप इन्वेस्टमेंट्स ने जेपी इंफ्राटेक से 235 करोड़ रुपये का फंड डाइवर्जन किया। साथ ही यह भी आरोप है कि रिजोल्यूशन प्लान के तहत 90 दिनों के भीतर 3000 करोड़ रुपये का ऋण नहीं लिया गया, जिससे परियोजनाओं की रफ्तार प्रभावित हुई।
जेआईएल रियल एस्टेट अलॉटीज वेलफेयर एसोसिएशन (JREAWAS) के अध्यक्ष आशीष मोहन गुप्ता ने कहा कि एनसीएलटी का यह निर्णय खरीदारों के हित में है। एसोसिएशन लंबे समय से रिजोल्यूशन प्लान के प्रभावी क्रियान्वयन की मांग कर रही थी। अब पूर्व सदस्यों की निगरानी से पारदर्शिता बढ़ेगी और खरीदार सीधे अपनी शिकायतें उनके समक्ष रख सकेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि एनसीएलटी के पूर्व सदस्यों की निगरानी से निर्माण कार्य, फंड उपयोग और समयसीमा पर सख्त नजर रखी जा सकेगी। यदि प्लान का पालन नहीं हुआ तो इसकी जानकारी सीधे ट्रिब्यूनल को दी जाएगी, जिससे आगे की कानूनी कार्रवाई का मार्ग प्रशस्त होगा।
जेपी इंफ्राटेक की परियोजनाओं में निवेश करने वाले हजारों परिवारों की उम्मीदें अब इस निगरानी तंत्र पर टिकी हैं। पारदर्शी और समयबद्ध क्रियान्वयन से ही वर्षों से अटकी परियोजनाओं को पूरा कर खरीदारों को उनका घर मिल सकेगा।
Realme GT 6 भारत में लॉन्च होने की पुष्टि। अपेक्षित स्पेक्स, फीचर्स, और भी बहुत कुछ





