Coffee and dementia study: सुबह की कॉफी और चाय से डिमेंशिया का खतरा घटने का दावा, अमेरिकी अध्ययन में खुलासा

Coffee and dementia study: सुबह की कॉफी और चाय से डिमेंशिया का खतरा घटने का दावा, अमेरिकी अध्ययन में खुलासा
नई दिल्ली, 15 फरवरी। सुबह की एक कप कॉफी या चाय सिर्फ ताजगी ही नहीं देती, बल्कि दिमाग को लंबे समय तक स्वस्थ रखने में भी मददगार हो सकती है। यह दावा 9 फरवरी को American Medical Association के जर्नल में प्रकाशित एक बड़े अमेरिकी अध्ययन में किया गया है। शोध के मुताबिक सीमित मात्रा में कैफीन युक्त कॉफी या चाय का सेवन करने वालों में डिमेंशिया का खतरा कम पाया गया है।
यह अध्ययन नर्सों के स्वास्थ्य अध्ययन और स्वास्थ्य पेशेवरों के फॉलोअप अध्ययन में शामिल 1,31,821 प्रतिभागियों के 43 वर्षों के विस्तृत आंकड़ों पर आधारित है। इतने लंबे समय तक किए गए विश्लेषण में 11,000 से अधिक प्रतिभागियों में डिमेंशिया विकसित हुआ। शोधकर्ताओं ने जीवनशैली, खानपान, शारीरिक गतिविधि और अन्य स्वास्थ्य कारकों को समायोजित करने के बाद पाया कि जो लोग प्रतिदिन 2 से 3 कप कैफीन वाली कॉफी पीते थे, उनमें डिमेंशिया का जोखिम लगभग 18 प्रतिशत तक कम था।
इसी तरह, रोजाना 1 से 2 कप चाय पीने वालों में भी जोखिम में कमी देखी गई। हालांकि अध्ययन में यह भी सामने आया कि डीकैफ यानी कैफीन रहित कॉफी से ऐसा कोई लाभ नहीं मिला। इससे संकेत मिलता है कि कैफीन इस संभावित लाभ में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कैफीन मस्तिष्क में सूजन कम करने, न्यूरॉन्स की कार्यक्षमता बेहतर करने और मानसिक सतर्कता बनाए रखने में सहायक हो सकता है। हालांकि यह अध्ययन यह साबित नहीं करता कि कॉफी या चाय सीधे तौर पर डिमेंशिया को रोकती है, बल्कि यह केवल दोनों के बीच संबंध को दर्शाता है।
All India Institute of Medical Sciences दिल्ली के न्यूरोलॉजी विभाग की अध्यक्ष डॉ. मंजरी त्रिपाठी ने कहा कि सीमित मात्रा में, खासकर दोपहर 2 बजे से पहले कैफीन का सेवन फायदेमंद हो सकता है। उन्होंने आगाह किया कि अत्यधिक कैफीन लेने से नींद की समस्या, घबराहट और हृदय गति में अनियमितता जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और मानसिक सक्रियता जैसे कारक भी डिमेंशिया के खतरे को कम करने में अहम भूमिका निभाते हैं। इसलिए केवल कॉफी या चाय पर निर्भर रहने के बजाय संतुलित जीवनशैली अपनाना ज्यादा जरूरी है।
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