Jarcha Murder Case: ताऊ-भतीजा हत्याकांड में आरोपी निखिल बरहेला को जमानत से इनकार, सत्र न्यायालय ने याचिका की खारिज

Jarcha Murder Case: ताऊ-भतीजा हत्याकांड में आरोपी निखिल बरहेला को जमानत से इनकार, सत्र न्यायालय ने याचिका की खारिज
नोएडा के जारचा कोतवाली क्षेत्र के सैंथली गांव में दीपावली के दिन हुए सनसनीखेज ताऊ-भतीजा हत्याकांड मामले में आरोपी निखिल बरहेला को सत्र न्यायालय से कोई राहत नहीं मिली है। सत्र न्यायालय ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज करते हुए साफ किया कि अपराध की प्रकृति, उसकी गंभीरता और विवेचना के दौरान सामने आए साक्ष्य आरोपी को जमानत देने के पक्ष में नहीं हैं। न्यायालय ने आदेश में कहा कि मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए जमानत के लिए कोई ठोस आधार नहीं बनता।
यह मामला थाना जारचा क्षेत्र का है, जहां 19 अक्तूबर 2025 को दीपावली के दिन गांव सैंथली में गोलीबारी की घटना हुई थी। इस वारदात में वादी के भाई अजयपाल और भतीजे दीपांशु की मौके पर ही मौत हो गई थी। घटना के बाद वादी धारा सिंह ने थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। एफआईआर में प्रिंस, बोबी, मनोज नागर सहित अन्य आरोपियों के नाम दर्ज किए गए थे। जांच के दौरान इस मामले में निखिल बरहेला का नाम भी सामने आया, जिसके बाद उसे आरोपी बनाया गया।
आरोपी पक्ष के अधिवक्ताओं ने न्यायालय में दलील दी कि निखिल बरहेला न तो एफआईआर में नामजद है और न ही उसके खिलाफ कोई स्वतंत्र और पुख्ता साक्ष्य मौजूद है। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि आरोपी से कोई हथियार बरामद नहीं हुआ है और पुलिस द्वारा दिखाई गई कथित बरामदगी फर्जी है। वहीं अभियोजन पक्ष ने इन दलीलों का कड़ा विरोध किया। अभियोजन की ओर से बताया गया कि विवेचना के दौरान दर्ज किए गए गवाहों के बयानों में आरोपी की घटना में सक्रिय भूमिका स्पष्ट रूप से सामने आई है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह माना कि मामले में गंभीर आरोप हैं और साक्ष्य ऐसे हैं, जिनके आधार पर आरोपी को जमानत देना न्यायोचित नहीं होगा। कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि इसी मामले में सह-आरोपी सचिन की जमानत याचिका पहले ही 18 दिसंबर 2025 को सत्र न्यायालय द्वारा खारिज की जा चुकी है। ऐसे में आरोपी निखिल बरहेला को भी जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता।
इस आदेश के बाद ताऊ-भतीजा हत्याकांड से जुड़े अन्य आरोपियों पर भी कानूनी शिकंजा और कसता नजर आ रहा है। पुलिस और अभियोजन पक्ष का कहना है कि मामले की सुनवाई के दौरान सभी तथ्यों और साक्ष्यों को मजबूती से न्यायालय के सामने रखा जाएगा ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके।
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