
India Canada Relations: भारत–कनाडा संबंधों में नई मजबूती, उर्वरक और पोटाश सुरक्षा पर रणनीतिक साझेदारी
नई दिल्ली, 30 जनवरी: भारत और कनाडा के द्विपक्षीय संबंधों में नई गति और मजबूती देखने को मिली है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और रसायन एवं उर्वरक मंत्री जे.पी. नड्डा ने वीरवार को नई दिल्ली में कनाडा के प्राकृतिक संसाधन मंत्री टिम हॉजसन के नेतृत्व में आए उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य उर्वरक और पोटाश सुरक्षा, निवेश और तकनीकी सहयोग को और मजबूत करना था।
बैठक के दौरान जे.पी. नड्डा ने कहा कि भारत में मृदा की उर्वरता बनाए रखना और संतुलित पोषण सुनिश्चित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके लिए पोटाश की उपलब्धता अहम भूमिका निभाती है। उन्होंने कनाडा की भूमिका को भरोसेमंद आपूर्तिकर्ता के रूप में सराहा और बताया कि भारत अपनी कुल एमओपी (म्यूरीएट ऑफ पोटाश) जरूरत का लगभग 25 प्रतिशत कनाडा से आयात करता है। इसके अलावा, उन्होंने गुजरात स्टेट फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स लिमिटेड (GSFC) द्वारा कनाडा की कर्नालाइट रिसोर्सेज इंक. में 49.68 मिलियन कनाडाई डॉलर के निवेश का उल्लेख किया, जिससे भारत को इस रणनीतिक परियोजना में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी प्राप्त हुई है।
कनाडा के मंत्री टिम हॉजसन ने भारत की कृषि उत्पादकता को समर्थन देने की प्रतिबद्धता दोहराई और कहा कि प्राकृतिक संसाधन क्षेत्र में भारतीय निवेश को कनाडा सरकार प्रोत्साहित करेगी। दोनों देशों ने पोटाश खनन, अन्वेषण, दीर्घकालिक आपूर्ति अनुबंध और तकनीकी सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की। इस साझेदारी से न केवल दोनों देशों के बीच आर्थिक और तकनीकी संबंध मजबूत होंगे, बल्कि यह खाद्य सुरक्षा और कृषि विकास के लिए भी एक ठोस आधार तैयार करेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत–कनाडा के बीच इस रणनीतिक सहयोग से किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध होगा, खाद्य उत्पादन में वृद्धि होगी और कृषि क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा। इसके अलावा, दीर्घकालिक आपूर्ति अनुबंध से बाजार में स्थिरता आएगी और दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों में नए अवसर पैदा होंगे।
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