Sector 150 Noida Accident: सेक्टर–150 नोएडा हादसा प्रशासनिक लापरवाही और आपदा प्रबंधन की विफलता का नतीजा, युवराज मेहता की मौत पर उठे गंभीर सवाल

 Sector 150 Noida Accident: सेक्टर–150 नोएडा हादसा प्रशासनिक लापरवाही और आपदा प्रबंधन की विफलता का नतीजा, युवराज मेहता की मौत पर उठे गंभीर सवाल

नोएडा। सेक्टर–150 नोएडा में 16 जनवरी 2025 की रात हुए दर्दनाक हादसे को लेकर उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल, नोएडा इकाई ने प्रशासन, नोएडा प्राधिकरण और आपदा प्रबंधन एजेंसियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इस हादसे में युवराज मेहता की उनके पिता की आंखों के सामने जान चली गई। संगठन के वरिष्ठ महामंत्री मनोज भाटी ने इस घटना को सामान्य सड़क दुर्घटना मानने से इनकार करते हुए इसे प्रशासनिक लापरवाही, सुरक्षा मानकों की अनदेखी और आपदा प्रबंधन व्यवस्था की पूरी तरह विफलता करार दिया है।

मनोज भाटी ने बताया कि जिस स्थान पर यह हादसा हुआ, वहां एक बिल्डर द्वारा गहराई तक बेसमेंट की खुदाई की गई थी, जिसमें लगभग 25 से 30 फीट तक पानी भरा हुआ था। इसके बावजूद सड़क पर न तो कोई बैरिकेडिंग की गई थी, न चेतावनी संकेतक, न रिफ्लेक्टर और न ही कोई सुरक्षा व्यवस्था मौजूद थी। घनी धुंध और कम दृश्यता के कारण युवराज मेहता की कार सड़क से फिसलते हुए दीवार तोड़कर सीधे पानी से भरे बेसमेंट में जा गिरी।

उन्होंने बताया कि हादसे के तुरंत बाद मृतक के पिता ने रात 12 बजकर 41 मिनट पर पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी। इसके बाद 12 बजकर 50 मिनट पर पुलिस और फायर विभाग की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन इसके बावजूद बचाव कार्य बेहद लापरवाही और अव्यवस्थित तरीके से किया गया। मौके पर मौजूद टीम के पास न तो पर्याप्त रस्सियां थीं, न लाइफ जैकेट, न रबर बोट और न ही पर्याप्त रोशनी या प्रशिक्षित संसाधन। युवराज के पिता करीब एक घंटा पैंतालीस मिनट तक अपने बेटे को बचाने की गुहार लगाते रहे, लेकिन 70 से 80 अधिकारियों और कर्मचारियों की मौजूदगी के बावजूद कोई प्रभावी रेस्क्यू नहीं हो सका।

मनोज भाटी ने कहा कि यह घटना साफ तौर पर प्रशासनिक असंवेदनशीलता, प्रशिक्षण की कमी और आपदा प्रबंधन प्रणाली की कमजोरियों को उजागर करती है। यदि समय रहते आवश्यक संसाधन, प्रशिक्षित टीम और जिम्मेदार रवैया अपनाया गया होता, तो युवराज मेहता की जान बचाई जा सकती थी।

उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल, नोएडा इकाई ने इस मामले में कई अहम मांगें रखी हैं। संगठन ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए एक स्वतंत्र एजेंसी के गठन की मांग की है। साथ ही बचाव कार्य में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई और आवश्यकता पड़ने पर गैर-इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग भी की गई है। इसके अलावा गौतम बुद्ध नगर जिले में एसडीआरएफ का स्थायी कार्यालय खोलने, फायर विभाग और एसडीआरएफ को रबर बोट, आधुनिक मशीनरी, हाईटेक ड्रोन और विशेष प्रशिक्षण उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है।

मनोज भाटी ने कहा कि जिले की सड़कों और निर्माण स्थलों पर अनिवार्य रूप से इंडिकेशन बोर्ड, रिफ्लेक्टर, बैरिकेडिंग और सुरक्षित रोड इंजीनियरिंग सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले गौतम बुद्ध नगर जैसे जिले में यदि आपदा के समय जिम्मेदार विभाग मूकदर्शक बने रहें, तो यह बेहद चिंताजनक स्थिति है। अंत में उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस गंभीर घटना का संज्ञान लेकर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस और निर्णायक कदम उठाने की मांग की।

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