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Indian millionaire story: 100 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति बनाकर भारत लौटे प्रवासी की आत्मकथा, सफलता के बाद भी अधूरापन क्यों

Indian millionaire story: 100 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति बनाकर भारत लौटे प्रवासी की आत्मकथा, सफलता के बाद भी अधूरापन क्यों

नई दिल्ली। अमेरिका में 12 मिलियन डॉलर यानी 100 करोड़ रुपये से अधिक का मजबूत निवेश पोर्टफोलियो खड़ा करने के बाद भारत लौटे एक भारतीय पेशेवर ने आर्थिक सफलता के बाद जीवन की वास्तविकता को लेकर अपने अनुभव साझा किए हैं। रेडिट पर लिखी गई पोस्ट में उन्होंने बताया कि अपार धन और वित्तीय स्वतंत्रता मिलने के बावजूद जीवन में एक तरह का खालीपन और निराशा भी महसूस हो सकती है।

इस भारतीय प्रवासी ने लिखा कि वह एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार से आते हैं। करियर की शुरुआत उन्होंने भारत की एक सर्विस कंपनी से की, फिर टेक सेक्टर में काम किया और आगे चलकर अमेरिका में बस गए। वर्षों तक लगातार मेहनत, निवेश और अनुकूल बाजार परिस्थितियों के चलते उनकी आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव आया। उन्होंने लिखा कि पिछले कुछ साल उनके शेयर पोर्टफोलियो के लिए असाधारण रहे और आज उनकी कुल संपत्ति 12 मिलियन डॉलर से अधिक है, एक ऐसा आंकड़ा जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी।

भारत लौटने के बाद उनका जीवन पूरी तरह बदल गया। अब वे एक सुरक्षित रेजिडेंशियल कम्युनिटी में रहते हैं, जहां उनकी दिनचर्या बेहद नियमित है। दिन का बड़ा हिस्सा वे खेल, जिम और फिटनेस गतिविधियों में बिताते हैं। इसके बाद किताबें पढ़ना, टीवी सीरीज़ देखना, बाजार की स्थिति पर नजर रखना और सबसे अहम, अपने परिवार के साथ समय बिताना उनकी दिनचर्या का हिस्सा है। उन्होंने बताया कि वे बच्चों और पत्नी के साथ काफी समय बिताते हैं और कई बार हफ्तों तक अपने परिसर से बाहर भी नहीं निकलते, जिससे बाहरी दुनिया की भागदौड़ और अव्यवस्था से पूरी तरह कटे रहते हैं।

इस स्थिर जीवन में ढलने से पहले उन्होंने खुद को लंबा ब्रेक दिया। इस दौरान उन्होंने द सोप्रानोस, द वायर, गेम ऑफ थ्रोन्स और ब्रेकिंग बैड जैसी मशहूर टीवी सीरीज़ दोबारा देखीं। उन्होंने द गॉडफादर से लेकर क्रिस्टोफर नोलन की फिल्मों तक का पूरा कलेक्शन देखा और वीडियो गेम्स में भी समय बिताया। यात्रा भी उनके जीवन का अहम हिस्सा रही। परिवार के साथ उन्होंने एशिया और यूरोप के कई देशों की यात्रा की, जहां साइकिलिंग, पैदल घूमना और डिजिटल दुनिया से पूरी तरह दूरी बनाना उनके अनुभव का हिस्सा रहा।

हालांकि यह कहानी केवल आर्थिक आज़ादी का उत्सव नहीं है। उन्होंने स्वीकार किया कि अब उन्हें कभी-कभी गहरी बोरियत भी महसूस होती है। उन्होंने साफ कहा कि वे किसी टेक कंपनी में दोबारा लगातार काम करने की कल्पना भी नहीं कर सकते, लेकिन साथ ही यह भी मानते हैं कि खाली समय के साथ एक मानसिक शून्यता आ जाती है।

आगे के जीवन को लेकर वे अब भी असमंजस में हैं। उन्होंने गैर-लाभकारी संगठनों के साथ काम करने की कोशिश की, लेकिन वहां का अनुभव उनके लिए निराशाजनक रहा। उनके अनुसार, हर स्तर पर फैली बेईमानी और भ्रष्टाचार ने उन्हें झकझोर कर रख दिया।

जब वे अपने अतीत को देखते हैं तो खुद में बड़ा बदलाव महसूस करते हैं। उनका कहना है कि युवावस्था में वे आदर्शवादी, आशावादी और समाज में बदलाव लाने की क्षमता रखने वाले व्यक्ति थे। आज वे खुद को अधिक अंतर्मुखी, भारतीय समाज के प्रति निराशावादी और लगभग पूरी तरह अपने परिवार और व्यक्तिगत कल्याण तक सीमित मानते हैं। उनकी यह कहानी यह सवाल छोड़ जाती है कि क्या केवल आर्थिक सफलता ही जीवन की पूर्णता है, या असली संतोष किसी और चीज में छिपा है।

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