हिमाचल प्रदेश

Chitta Campaign: हिमाचल में 1 जून से शुरू होगा एंटी-चिट्टा अभियान का दूसरा चरण, 31 सरकारी कर्मचारी बर्खास्त

Chitta Campaign: हिमाचल में 1 जून से शुरू होगा एंटी-चिट्टा अभियान का दूसरा चरण, 31 सरकारी कर्मचारी बर्खास्त

Sukhvinder Singh Sukhu ने सोमवार को शिमला में आयोजित नारकोटिक्स को-ऑर्डिनेशन सेंटर (एनकॉर्ड) की बैठक की अध्यक्षता करते हुए राज्य में नशे के खिलाफ बड़े स्तर पर कार्रवाई का ऐलान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार 1 जून से 20 अगस्त 2026 तक सभी सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में “एंटी-चिट्टा जागरूकता अभियान” का दूसरा चरण शुरू करेगी। इस अभियान के तहत प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी प्रदेशभर के शिक्षण संस्थानों में जाकर विद्यार्थियों को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक करेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल नशा तस्करों पर कार्रवाई करना नहीं, बल्कि समाज को चिट्टे जैसी खतरनाक लत से पूरी तरह मुक्त करना है। उन्होंने बताया कि अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों के कम से कम 10 शिक्षण संस्थानों का दौरा करें और युवाओं को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करें। साथ ही फार्मास्यूटिकल कंपनियों द्वारा दवा निर्माण और वितरण में नियमों के सख्त पालन को सुनिश्चित किया जाएगा। अवैध तरीके से दवाइयों की बिक्री करने वाली दुकानों के लाइसेंस रद्द किए जाएंगे।

बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि अब राज्य सरकार उपायुक्तों और पुलिस अधीक्षकों की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट में एंटी-चिट्टा अभियान के प्रदर्शन और नशे के खिलाफ कार्रवाई को भी शामिल करेगी। उन्होंने अधिकारियों को नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित करने और जब्त किए गए वाहनों तथा शराब के समय पर निपटान के निर्देश भी दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चिट्टा मामलों से जुड़ी फॉरेंसिक रिपोर्ट पांच दिनों के भीतर तैयार की जानी चाहिए ताकि जांच और अदालतों में मामलों का तेजी से निपटारा हो सके। उन्होंने पुलिस अधिकारियों को नशा तस्करी पर लगातार निगरानी रखने और तस्करों द्वारा अवैध रूप से बनाई गई संपत्तियों को ध्वस्त करने के निर्देश भी दिए। जिला प्रशासन को आदतन अपराधियों की मैपिंग करने के आदेश दिए गए हैं।

प्रेस वार्ता के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस सरकार बनने के बाद नशा तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और नशे के शिकार युवाओं के पुनर्वास पर विशेष ध्यान दिया गया है। उन्होंने कहा कि अब सरकारी विभागों में भर्ती और व्यावसायिक कॉलेजों में प्रवेश के लिए एंटी-चिट्टा टेस्ट अनिवार्य किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि चिट्टा केवल नशे की समस्या नहीं, बल्कि युवाओं, परिवारों और हिमाचल प्रदेश के भविष्य पर सीधा हमला है।

उन्होंने बताया कि 15 नवंबर 2025 को रिज शिमला से “एंटी-चिट्टा जन आंदोलन” की शुरुआत की गई थी, जो अब पूरे प्रदेश में एक बड़े सामाजिक अभियान का रूप ले चुका है। सरकार प्रवर्तन, आपूर्ति में कमी, मांग में कमी और पुनर्वास जैसे सभी पहलुओं पर एक साथ काम कर रही है।

मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि अब तक लगभग 12 हजार लोगों की पहचान की जा चुकी है और प्रदेश की 234 अति संवेदनशील पंचायतों में विशेष पुलिस और सीआईडी निगरानी लगाई गई है। सरकार ने राज्यभर में उन पंचायतों की पहचान की है जहां नशे का खतरा अधिक है। इनमें शिमला, सोलन, सिरमौर, बद्दी, बिलासपुर, हमीरपुर, कुल्लू, मंडी, कांगड़ा, चंबा, नूरपुर, देहरा और ऊना की पंचायतें शामिल हैं।

सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023 से अब तक एनडीपीएस अधिनियम के तहत 6,811 मामले दर्ज किए गए हैं, जो पिछली सरकार के मुकाबले 33 प्रतिशत अधिक हैं। इस दौरान 10,357 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और 45,867 किलोग्राम मादक पदार्थ जब्त किए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार नशे के खिलाफ केवल कागजी कार्रवाई नहीं कर रही, बल्कि जमीनी स्तर पर सख्त कदम उठा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब तक 174 नशा तस्करों और माफियाओं को एनडीपीएस अधिनियम के तहत हिरासत में लिया गया है। उन्होंने दावा किया कि निवारक कार्रवाई के मामले में हिमाचल प्रदेश देश में पहले स्थान पर पहुंच गया है और वर्ष 2026 में पूरे देश में एनडीपीएस एक्ट के तहत हुई कुल निवारक कार्रवाइयों में लगभग 33 प्रतिशत कार्रवाई अकेले हिमाचल पुलिस ने की है।

उन्होंने बताया कि पिछले साढ़े तीन वर्षों में लगभग 51 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति जब्त की गई है, जो पिछली सरकार के मुकाबले तीन गुना अधिक है। एसटीएफ ने 700 से अधिक मामलों की जांच की है और 300 मामलों को वित्तीय जांच तथा संपत्ति फ्रीज करने के लिए चिन्हित किया गया है। अब तक 76 अवैध संपत्तियों की पहचान कर 17 मामलों में अवैध निर्माण तोड़े जा चुके हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नशे के कारोबार में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह सरकारी कर्मचारी ही क्यों न हो। सरकार ने नशा गतिविधियों में शामिल पाए गए 123 सरकारी कर्मचारियों और पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की है। इनमें 10 सरकारी कर्मचारी और 21 पुलिस कर्मियों को सेवा से बर्खास्त किया गया है। कार्रवाई की जद में एचआरटीसी, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग, ग्रामीण विकास विभाग, बिजली बोर्ड, बैंकिंग क्षेत्र, जल शक्ति विभाग और पशुपालन विभाग के कर्मचारी भी आए हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार की नीति पूरी तरह शून्य सहिष्णुता पर आधारित है और नशा तस्करी में शामिल किसी भी सरकारी कर्मचारी को संरक्षण नहीं दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि नशा छोड़ना चाहने वाले युवाओं को उपचार, परामर्श और पुनर्वास सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। शिमला के मशोबरा में नया पुनर्वास केंद्र 20 मई से शुरू किया जाएगा, जबकि दूसरा केंद्र टांडा मेडिकल कॉलेज में जल्द शुरू होगा।

बैठक के दौरान उत्कृष्ट वित्तीय जांच कार्य के लिए पुलिस अधीक्षक शिमला गौरव सिंह, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ऊना रेनू शर्मा और एएसआई पारुल नैन्टा को सम्मानित भी किया गया। इस अवसर पर राजस्व मंत्री Jagat Singh Negi, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री Anirudh Singh सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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