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Uttar Pradesh : परिषदीय बच्चों में संवाद कौशल और आत्मविश्वास बढ़ाएगी योगी सरकार

Lucknow News : योगी सरकार परिषदीय स्कूलों के बच्चों में संवाद कौशल, आत्मविश्वास और प्रभावी अभिव्यक्ति विकसित करने पर विशेष जोर दे रही है। नई शिक्षा नीति और फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरेसी (एफएलएन) मिशन के अन्तर्गत बच्चों को आत्मविश्वास के साथ बोलने, अपनी बात प्रभावी ढंग से रखने और कक्षा में सक्रिय भागीदारी के लिए तैयार करने हेतु शिक्षकों को विशेष डिजिटल प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसी क्रम में एआरपी, एसआरजी और डाइट मेंटर्स के माध्यम से ‘डेवलपिंग ओरेसी इन प्राइमरी ग्रेड्स’ कोर्स को अधिक से अधिक शिक्षकों तक पहुंचाया जा रहा है।

प्रारंभिक कक्षाओं में बच्चों की बोलने और सुनने की क्षमता मजबूत होने से उनकी सीखने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी होती है। यही कारण है कि योगी सरकार द्वारा अब परिषदीय विद्यालयों में संवाद आधारित शिक्षण पद्धति को बढ़ावा देने पर विशेष फोकस किया जा रहा है।

प्रदेश में शिक्षा को अब केवल पाठ्यक्रम और परीक्षा तक सीमित नहीं रखा जा रहा, बल्कि बच्चों के व्यक्तित्व विकास, आत्मविश्वास और व्यावहारिक कौशल को भी उतनी ही प्राथमिकता दी जा रही है। यह प्रशिक्षण अभियान आने वाले समय में परिषदीय विद्यालयों के बच्चों को अधिक आत्मविश्वासी, अभिव्यक्तिशील और सक्रिय शिक्षार्थी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

संवाद आधारित शिक्षण पर जोर
शिक्षकों को कक्षा में बच्चों को आत्मविश्वासी वक्ता और सक्रिय श्रोता बनाये जाने सम्बन्धी प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके साथ ही बच्चों में मौखिक अभिव्यक्ति, संवाद कौशल और सहभागिता आधारित सीखने की क्षमता विकसित करने के तरीकों पर भी फोकस किया जाएगा। कोर्स में चर्चा आधारित शिक्षण, कहानी सुनाना, स्ट्रक्चर्ड बातचीत गतिविधियां और बच्चों की सक्रिय भागीदारी बढ़ाने वाले तरीकों को शामिल किया गया है, ताकि कक्षा का माहौल अधिक संवादात्मक और बच्चों के अनुकूल बनाया जा सके।

एफएलएन मिशन को मिल रही नई मजबूती
योगी सरकार पहले ही एफएलएन मिशन के अंतर्गत बच्चों में बुनियादी पठन-पाठन और गणितीय क्षमता विकसित करने पर जोर दे रही है। अब इस पहल के माध्यम से भाषा और संवाद कौशल को भी एफएलएन मिशन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जा रहा है। जब बच्चे आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रखना सीखते हैं, तो उनकी सीखने, समझने और कक्षा में भागीदारी की क्षमता भी अच्छी होती है।

एआरपी, एसआरजी और डायट मेंटर्स को मिली महत्वपूर्ण भूमिका
शासन स्तर से एआरपी, एसआरजी और डायट मेंटर्स को निर्देश दिए गए हैं कि वे इस कोर्स को अपने ब्लॉक और जनपद के अधिक से अधिक शिक्षकों तक पहुंचाएं। इसके माध्यम से प्रदेशभर के परिषदीय विद्यालयों में संवाद आधारित और सहभागिता पूर्ण शिक्षण वातावरण विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही शिक्षकों को डिजिटल माध्यमों से जोड़कर आधुनिक शिक्षण पद्धतियों के उपयोग को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

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संवाददाता

SHAHRUKH KHAN

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