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NFHS-6 रिपोर्ट से बढ़ी चिंता देश में शिशुओं को केवल मां का दूध पिलाने की दर में बड़ी गिरावट

NFHS-6: रिपोर्ट से बढ़ी चिंता देश में शिशुओं को केवल मां का दूध पिलाने की दर में बड़ी गिरावट

नई दिल्ली, 31 मई। शिशुओं के बेहतर स्वास्थ्य और पोषण के लिए जीवन के पहले छह महीनों तक केवल मां का दूध पिलाने की राष्ट्रीय मुहिम को बड़ा झटका लगा है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6) 2023-24 के ताजा आंकड़ों ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के अनुसार देश में छह महीने तक केवल स्तनपान (एक्सक्लूसिव ब्रेस्टफीडिंग) कराने वाली माताओं का प्रतिशत 64 प्रतिशत से घटकर 55.8 प्रतिशत रह गया है। उत्तर प्रदेश, हरियाणा और उत्तराखंड जैसे कई राज्यों में आई तेज गिरावट ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जन्म के बाद पहले छह महीनों तक केवल मां का दूध शिशु के लिए सबसे सुरक्षित, प्रभावी और कम लागत वाला पोषण स्रोत माना जाता है। इससे बच्चों में संक्रमण, डायरिया, निमोनिया और कुपोषण जैसी समस्याओं का खतरा कम होता है तथा उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। इसके बावजूद देश के अधिकांश राज्यों में स्तनपान की दर में गिरावट दर्ज होना चिंता का विषय है।

सर्वेक्षण के आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक दिखाई दी है। यहां छह महीने तक केवल स्तनपान प्राप्त करने वाले बच्चों का प्रतिशत 59.7 प्रतिशत से घटकर 34.6 प्रतिशत रह गया है। हरियाणा में यह दर 69.5 प्रतिशत से घटकर 41.2 प्रतिशत और उत्तराखंड में 52.5 प्रतिशत से गिरकर 40.8 प्रतिशत पर पहुंच गई है। राजस्थान में यह आंकड़ा लगभग 70 प्रतिशत से घटकर 54 प्रतिशत और असम में 64 प्रतिशत से घटकर 54 प्रतिशत रह गया है। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि जागरूकता अभियानों के बावजूद व्यवहारिक स्तर पर अभी भी बड़ी चुनौतियां मौजूद हैं।

हालांकि रिपोर्ट में कुछ सकारात्मक संकेत भी सामने आए हैं। जन्म के एक घंटे के भीतर नवजात को स्तनपान कराने की दर में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। पहले यह आंकड़ा लगभग 42 प्रतिशत था, जो अब बढ़कर 50 प्रतिशत तक पहुंच गया है। बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों ने इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति दिखाई है। बिहार में जन्म के पहले घंटे के भीतर स्तनपान शुरू कराने की दर 22 प्रतिशत से बढ़कर 46.8 प्रतिशत हो गई है, जबकि झारखंड और छत्तीसगढ़ में यह आंकड़ा 50 प्रतिशत से अधिक दर्ज किया गया है।

शिशु स्तनपान के मामले में केरल देश का सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला राज्य बनकर उभरा है। यहां 82 प्रतिशत से अधिक नवजातों को जन्म के पहले घंटे के भीतर स्तनपान कराया गया। वहीं छह महीने तक केवल स्तनपान कराने के मामले में छत्तीसगढ़ 76 प्रतिशत और केरल 73 प्रतिशत के साथ देश के शीर्ष राज्यों में शामिल हैं।

एनएफएचएस-6 की रिपोर्ट यह संकेत देती है कि अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में जन्म के तुरंत बाद स्तनपान शुरू कराने के प्रयासों को सफलता मिली है, लेकिन छह महीने तक केवल मां का दूध सुनिश्चित करने के लिए अभी व्यापक जागरूकता, परामर्श और सामाजिक सहयोग की आवश्यकता बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि माताओं को कार्यस्थल, परिवार और स्वास्थ्य सेवाओं के स्तर पर बेहतर समर्थन उपलब्ध कराकर ही इस गिरावट को रोका जा सकता है।

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संवाददाता

Priyanka Singh

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