Uttar Pradesh : प्रदेश मंत्री बनने के बाद पहली बार सासनी पहुंचे यतेन्द्र शर्मा, सरकारी बस से सफर कर दिया सादगी का संदेश

Lucknow/Hathras : उत्तर प्रदेश भाजपा के प्रदेश मंत्री बनने के बाद पहली बार अपने पैतृक आवास सासनी पहुंचे यतेन्द्र शर्मा का स्थानीय कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने गर्मजोशी से स्वागत किया। हालांकि इस दौरे की सबसे अधिक चर्चा उनके स्वागत से ज्यादा उस तरीके की रही, जिसे उन्होंने अपने गृह जनपद पहुंचने के लिए चुना।

आमतौर पर किसी बड़े राजनीतिक पद पर नियुक्ति के बाद नेताओं के गृह आगमन पर लंबे-चौड़े काफिले, लग्जरी गाड़ियां और शक्ति प्रदर्शन देखने को मिलता है। लेकिन यतेन्द्र शर्मा ने इस परंपरा से अलग रास्ता अपनाते हुए प्रचंड गर्मी के मौसम में गाजियाबाद से सासनी तक का सफर उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की सरकारी बस से किया।

सरकारी बस से उनके सासनी पहुंचने की जानकारी मिलते ही कार्यकर्ता और स्थानीय लोग चौंक गए क्योंकि परंपरा के अनुसार यतेन्द्र शर्मा को रिसीव करने के लिए गाड़ियों के बड़े काफिले की व्यवस्था की गई थी और कई जगहों पर भव्य स्वागत की तैयारियां थीं। सरकारी बस से आने के कारण जनता में उत्सुकता का माहौल बन गया। कई लोगों ने इसे सादगी और जनसामान्य से जुड़ाव का प्रतीक बताया। वहीं सोशल मीडिया पर भी उनके इस कदम की चर्चा शुरू हो गई।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि ऐसे समय में जब सार्वजनिक जीवन में सादगी और संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग की चर्चा हो रही है, किसी वरिष्ठ पदाधिकारी का सरकारी सार्वजनिक परिवहन से यात्रा करना एक अलग संदेश देता है। इससे अनावश्यक वाहनों के काफिले और ट्रैफिक दबाव से भी बचा जा सकता है।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ईरान-यूएस युद्ध के कारण बने हालातों के मद्देनजर ईंधन की बचत, संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग और जनहित को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए थे। पीएम मोदी ने खुद अपने काफिले से कई गाड़ियों को कम कर दिया है। यतेन्द्र शर्मा का यह कदम भी सार्वजनिक संसाधनों के उपयोग और सादगीपूर्ण राजनीतिक संस्कृति की दिशा में एक सकारात्मक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

सासनी पहुंचने पर यतेन्द्र शर्मा का भाजपा कार्यकर्ताओं, वरिष्ठ पदाधिकारियों और स्थानीय नागरिकों ने आत्मीय स्वागत किया। इस दौरान उन्होंने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संगठन ने जो जिम्मेदारी उन्हें सौंपी है, उसका निर्वहन पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ करेंगे। उन्होंने कहा कि उनके लिए पद से अधिक महत्वपूर्ण संगठन, कार्यकर्ता और जनता का विश्वास है।

यतेन्द्र शर्मा का यह सादा अंदाज अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। यतेन्द्र के बचपन के मित्र अरविंद तोमर बताते हैं कि यतेन्द्र को जानने वालों को पता है कि मीडिया में भी जब वे बड़े पद पर थे तब भी अक्सर ट्रेन और सरकारी बस से सासनी, हाथरस आते रहते थे।

समर्थकों का मानना है कि राजनीति में सादगी, जवाबदेही और जनता से सीधा जुड़ाव ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है। ऐसे में उनका यह कदम केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि राजनीतिक कार्यशैली का एक संदेश भी माना जा रहा है।

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