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Maharashtra Politics: पार्टी में टूट की अटकलों के बीच उद्धव ठाकरे का बड़ा बयान, कहा- ‘चाहो तो किसी और को बना दो शिवसेना अध्यक्ष’

Maharashtra Politics: पार्टी में टूट की अटकलों के बीच उद्धव ठाकरे का बड़ा बयान, कहा- ‘चाहो तो किसी और को बना दो शिवसेना अध्यक्ष’

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख Uddhav Thackeray ने पार्टी के 60वें स्थापना दिवस समारोह में बड़ा बयान देते हुए कहा कि यदि पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं को लगता है कि वह शिवसेना प्रमुख की जिम्मेदारी निभाने के लिए उपयुक्त नहीं हैं, तो वह पद छोड़ने के लिए तैयार हैं। उनके इस बयान को पार्टी के भीतर चल रही राजनीतिक चर्चाओं और संगठनात्मक चुनौतियों के बीच बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि वह किसी भी योग्य और सक्षम व्यक्ति को शिवसेना का अध्यक्ष बनाने के लिए तैयार हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्हें पद का कोई मोह नहीं है और जिस दिन पार्टी को लगेगा कि कोई दूसरा व्यक्ति संगठन को बेहतर तरीके से आगे बढ़ा सकता है, वह तुरंत पद छोड़ देंगे। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वह संघर्ष से पीछे हटने वाले नहीं हैं और पार्टी तथा विचारधारा के लिए लड़ाई जारी रखेंगे।

अपने भाषण में उद्धव ठाकरे ने भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना से अलग होकर गए नेताओं पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि पार्टी के कार्यकर्ताओं को किसी आदेश का इंतजार करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि पार्टी संस्थापक Bal Thackeray ने बहुत पहले ही गद्दारी और विश्वासघात के खिलाफ अपना स्पष्ट रुख बता दिया था।

उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में बालासाहेब ठाकरे का एक पुराना भाषण सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने पार्टी के साथ विश्वासघात करने वालों के खिलाफ कड़ा संदेश दिया था। उद्धव ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि राजनीतिक विरोधियों द्वारा लगातार दल-बदल और तोड़फोड़ की राजनीति जारी रही, तो “ऑपरेशन कमल” का जवाब “ऑपरेशन तोड़वा” से दिया जाएगा।

उद्धव ठाकरे ने आरोप लगाया कि देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है और कई जगह विपक्षी उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने तक का अवसर नहीं मिल रहा। उन्होंने कहा कि इस तरह की राजनीति देश को अराजकता की ओर ले जा सकती है।

भाजपा को निशाने पर लेते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि युवाओं की ताकत को कम करके नहीं आंकना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत की आजादी की लड़ाई में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी और आज भी युवा बड़े राजनीतिक और सामाजिक बदलाव लाने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने भाजपा को सलाह देते हुए कहा कि यदि वह इसी राह पर चलती रही तो भविष्य में उसे राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

पार्टी छोड़कर जाने वाले सांसदों और विधायकों पर भी उद्धव ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि इन नेताओं की जीत के पीछे कार्यकर्ताओं की मेहनत, किसानों का सहयोग और जनता का विश्वास था। इसलिए जनता को पूरा अधिकार है कि वह ऐसे नेताओं से जवाब मांगे जिन्होंने चुनाव जीतने के बाद पार्टी छोड़ दी।

कांग्रेस के साथ गठबंधन को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि शिवसेना ने लगभग 30 वर्षों तक भाजपा के साथ गठबंधन में रहते हुए भी अपनी अलग पहचान बनाए रखी थी। ऐसे में कांग्रेस में विलय होने की बातें पूरी तरह निराधार हैं। उन्होंने दावा किया कि महाराष्ट्र में भाजपा स्वयं अपने सहयोगी दलों और राजनीतिक परिस्थितियों के कारण कई चुनौतियों का सामना कर रही है।

अपने संबोधन के अंत में उद्धव ठाकरे ने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल की वास्तविक सफलता का आकलन चुनावी परिणामों से किया जाना चाहिए। उन्होंने पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री Indrajit Gupta का उल्लेख करते हुए कहा कि बालासाहेब ठाकरे हमेशा सिद्धांतों की राजनीति में विश्वास रखते थे और सत्ता को कभी अंतिम लक्ष्य नहीं मानते थे।

 

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